बस्ती थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत मकदा के बीएसएफ जवान 53 वर्षीय जंदइल बहादुर पुत्र धनई का शव बुधवार रात घर लाया गया। तिरंगे में लिपटा शव जब सेना के वाहन से घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। चीख पुकार से सबकी आंखें भर आई। बैकुंठ धाम द्वार मूड़घाट पर सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। जिसके बाद बेटे नीलेश ने मुखग्नि दी। भाजपा जिलाध्यक्ष महेश शुक्ला, सदर विधायक दयाराम चौधरी, हरिशंकर चौधरी, ब्लॉक प्रमुख सल्टौआ अभिषेक कुमार, एसडीएम पवन जायसवाल, नायब तहसीलदार कृष्णकांत मिश्र, ग्राम प्रधान पंकेश कुमार चौधरी की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।
तस्वीरें: बीएसएफ जवान का शव घर पहुंचते ही मचा कोहराम, बांग्लादेश बार्डर पर थी तैनाती
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जवान के पुत्र नीलेश ने बताया कि जनवरी 2021 से वह लीवर संबंधित बीमारी से पीड़ित थे। जिससे इनके पेट में पानी बन रहा था। उन्हें बीएसएफ द्वारा कोलकाता के एमसीएच अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार दिन के लगभग दो बजे इलाज के दौरान उनकी मौत गई थी।
बेटे ने बताया कि नौ अप्रैल को उनके पिता घर पर आए थे और पांच जून को फिर ड्यूटी पर चले गए थे। ड्यूटी के दौरान इनका स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया। सेना के जवानों ने 27 जुलाई को फोन करके बताया गया कि आपके पिता की हालत काफी खराब है। सूचना मिलते ही परिजन 29 जुलाई को घर से कोलकाता के लिए निकल पड़े। इनका इलाज चल रहा था कि विगत सोमवार को लगभग दो बजे इनकी मौत हो गई। मृतक जवान की पत्नी कलावती, बड़ा बेटा नीलेश (30), बेटी रूबी (25), फोटू (22) व प्रिया (20) का रो-रोकर बुरा हाल है।
मदद का दिया भरोसा
शव के साथ कोलकाता से आए बीएसएफ इंस्पेक्टर महेश कुमार ने दिवंगत की पत्नी कलावती को आठ हजार रुपये दाह संस्कार व 20 हजार रुपये क्रिया कर्म हेतु दिए। इंस्पेक्टर ने बेटे को नौकरी व बेटियों की शादी हेतु एक-एक लाख रुपये प्रदान करने का भरोसा दिलाया।
सेना के जवान जंदइल बहादुर के बेटे नीलेश व ग्रामीणों की मांग पर सदर विधायक दयाराम चौधरी व भाजपा जिलाध्यक्ष महेश शुक्ला ने आश्वासन दिया कि बस्ती-बांसी मार्ग की सड़क से जवान के घर तक पक्की सड़क का निर्माण होगा। साथ ही बस्ती-बांसी मार्ग की सड़क पर शहीद द्वार का भी निर्माण कराया जाएगा।

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