सब्सक्राइब करें

Nirbhaya case: फांसी से बचने को दोषी पवन का हर दांव फेल, दो विकल्प बाकी, मुश्किल है माफी

डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Thu, 06 Feb 2020 11:42 AM IST
विज्ञापन
nirbhaya case convict pawan gupta tried to save life, balance two option will also delay hanging out
pawan gupta - फोटो : अमर उजाला
दिसंबर 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया केस ने सिर्फ देश ही नहीं दुनिया को भी हिलाकर रख दिया था। तब राजपथ, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान समेत देश के कई हिस्सों में निर्भया के दोषियों को फांसी देने की मांग की गई थी लेकिन कानूनी पेंच के कारण सात साल बाद भी निर्भया के दोषियों को फांसी पर नहीं लटकाया जा सका है।


एक दोषी पवन गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दलील दी थी कि वह घटना के वक्त नाबालिग था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। पवन ने फांसी से बचने के लिए अब तक जो भी दांव खेला है, वो फेल ही रहा है, फिल्हाल उसके पास दो विकल्प मौजूद हैं।



आपको बता दें कि निर्भया के सभी दोषियों की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज जब तक सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दया याचिका खारिज नहीं कर देंगे, तब तक निर्भया के दोषी फांसी पर नहीं लटकाए जाएंगे, यानि कि सभी दोषियों के पास फांसी से बचने का कानूनी विकल्प रहेगा।
Trending Videos
nirbhaya case convict pawan gupta tried to save life, balance two option will also delay hanging out
htryhth - फोटो : अमर उजाला
बस्ती जिले के जगन्नाथपुर निवासी पवन गुप्ता के पिता बेटे को बचाने के लिए बहुत कोशिश कर रहे हैं। पवन के पिता हीरा लाल गुप्ता ने आरोप लगाया था कि निर्भया के मित्र ने पैसे लेकर समाचार चैनलों को साक्षात्कार दिया जिससे इस मामले की सुनवाई प्रभावित हुई। सत्र न्यायालय ने उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें निर्भया के मित्र व केस के एकमात्र गवाह पर एफआईआर दर्ज करने मांग की गई थी।

पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एके जैन अपील खारिज करते हुए कहा कि यह एक निराश पिता की अपने दोषी बेटे को बचाने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश है। याचिकाकर्ता का बेटा फांसी से एक कदम दूर है, इसलिए उस पर बेबुनियाद याचिका दायर करने के लिए जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी संपादक के ट्वीट के आधार पर चश्मदीद गवाह को कटघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
nirbhaya case convict pawan gupta tried to save life, balance two option will also delay hanging out
निर्भया का दोषी पवन गुप्ता - फोटो : सोशल मीडिया
अभियोजन पक्ष ने अपील खारिज करने की मांग करते हुए कहा था कि पवन के पिता बेटे को फांसी से बचाने के लिए बेमतलब की अर्जी दायर कर रहे हैं। सत्र न्यायालय ने माना कि गवाह के बयान और मृतका के मृत्यु पूर्व दिए बयान में कोई विरोधाभास नहीं है।

यहां तक कि पुलिस व अन्य बयान में कोई विरोधाभास नहीं है, इसलिए बयान को झूठा नहीं कहा जा सकता। दूसरा साक्षात्कार के लिए पैसे लेना गवाह का निजी मामला है। इसे भ्रष्टाचार कहना उचित नहीं है। इसका कोई साक्ष्य भी नहीं हैं। इसलिए इस अपील को खारिज किया जाता है।
nirbhaya case convict pawan gupta tried to save life, balance two option will also delay hanging out
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
आइए आपको बताते हैं कि अभी निर्भया के दोषियों के पास और कितने विकल्प बचे हैं?। सुप्रीम कोर्ट निर्भया कांड के चारों दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर चुका है। दोषी विनय, मुकेश और अक्षय की क्यूरेटिव पिटीशन भी सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो गई है, जबकि पवन गुप्ता को ही क्यूरेटिव पिटीशन फाइल करनी है।

अगर सुप्रीम कोर्ट से क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो गई तो दरिंदे अक्षय और पवन के पास मौका बचेगा सिर्फ दया याचिका का। यानि की दोनों दोषी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास दया याचिका भेज सकते हैं। वहीं, दोषी मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी थी।
विज्ञापन
nirbhaya case convict pawan gupta tried to save life, balance two option will also delay hanging out
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2012 में पैरामेडिक की छात्रा और उसका एक दोस्त एक बस में सवार हुए थे। उस बस में छात्रा से छह लोगों ने दुष्कर्म को अंजाम दिया था। दोषियों ने पीड़िता और उसके दोस्त को चलती बस से नीचे फेंक दिया था। इसके बाद छात्रा की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में अदालत ने चार लोगों अक्षय, विनय, पवन और मुकेश को दोषी ठहराया था, जबकि मामले में एक अन्य आरोपी ने दोषी साबित होने से पहले ही खुदकुशी कर ली थी। छठा आरोपी नाबालिग था, जिसे बाल सुधार गृह में सजा पूरी करने पर छोड़ दिया गया।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed