त्योहारों पर घर लौटना मुसीबत भरा हो गया है। ट्रेनों में इस कदर भीड़ है कि स्लीपर कोच की हालत जनरल जैसी हो गई है। चारों तरफ सिर ही सिर नजर आ रहे हैं। ट्रेनों में तिल रखने की जगह नहीं है। भीड़ की वजह से स्लीपर कोच में अपनी सीट तक पहुंचने में पसीने छूट जा रहे हैं। जो जैसे-तैसे पहुंच जा रहे हैं, उन्हें गंगा नहा लेने जैसा सुखद एहसास हो रहा है।
गोरखपुर: ट्रेन में सीट तक पहुंचे मतलब गंगा नहा लिए, स्लीपर कोच की हालत जनरल जैसी
शुक्रवार को दिल्ली से आई सत्याग्रह एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में भीड़ ठसाठस थी। यात्रियों के उतरने के दौरान ही बगहा, बेतिया आदि बिहार के शहरों के यात्री चढ़ने का प्रयास करने लगे। ट्रेन पहले से ही फुल थी। स्लीपर कोच में गोरखपुर से रक्सौल तक का टिकट लिए वीर प्रसाद साहनी दरवाजे पर जूझ रहे थे। वह सामान समेत अंदर नहीं घुस पा रहे थे। बार-बार चिल्ला रहे थे कि इसी कोच में हमारी कंफर्म सीट है, लेकिन अंदर के यात्री उन्हें दूसरे गेट से घुसने को कह रहे थे।
एसी थर्ड में भी एक्सट्रा यात्री सवार थे। दिल्ली से बेतिया जा रहीं विजयलक्ष्मी जायसवाल ने बताया कि कोच में अंदर तमाम यात्री वेटिंग टिकट लिए घूम रहे थे। एसी थर्ड की हालत स्लीपर कोच जैसी लग रही थी।
दोपहर 12.20 बजे पहुंची बाघ एक्सप्रेस की हालत तो और बुरी थी। इस ट्रेन की जनरल बोगी में चढ़ने के लिए मारा-मारी मची थी। जिसे जहां जगह मिल रही थी, वहीं से अंदर घुसने का प्रयास कर रहा था। एसी सेकेंड क्लास तक लोग घुसे हुए थे। रामकृपाल कुशवाहा ने बताया कि जनरल टिकट लिए हैं, टीटी ने फाइन भरने को कहा है। जगह नहीं मिल रही है तो फाइन भरकर ही चले जाएंगे।
अफरा-तफरी ऐसी की सुरक्षा की भी अनदेखी कर रहे यात्री
गोरखपुर जंक्शन पर शुक्रवार को लाइन की निगरानी का काम चल रहा था। बाघ एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर दो पर थी और प्लेटफार्म नंबर तीन से मालगाड़ी गुजर रही थी। इस बीच कई यात्री एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए सीढि़यों की बजाय लाइन पार कर रहे थे। एक दिन पहले ही रेलवे जीएम ने हादसे रोकने के लिए प्लेटफार्म पर भीड़, सीढि़यों व ओवरब्रिज पर भीड़ आदि को नियंत्रित करने का निर्देश दिया था, लेकिन शुक्रवार को गोरखपुर जंक्शन पर इसका असर नहीं दिखा।
ऑटो-टैक्सी वाले कर रहे मनमानी
बाहर से लौटने वाले यात्रियों के साथ परिवार व सामान होने का फायदा टैंपो व टैक्सी वाले उठा रहे हैं। दोपहर में स्टेशन के बाहर निकला देवरिया का एक परिवार साधन खोज रहा था। टैंपो चालक ने सामान समेत देवरिया पहुंचाने का 800 रुपये मांगा। वहीं यात्री का कहना था कि बस से वह 300 रुपये में चला जाएगा। इसी दौरान एक निजी टैक्सी चालक भी पहुंचा और उसने सामान समेत परिवार को देवरिया तक 2500 रुपये में छोड़ने की बात कही।