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Women's Day 2022: लगन और परिश्रम के बल पर मुकाम हासिल कर रहीं गोरखपुर शहर की बेटियां

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 08 Mar 2022 11:52 AM IST
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daughters of Gorakhpur achieving position on strength of perseverance and hard work
गोरखपुर की खास महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

हर क्षेत्र में लगन और परिश्रम के बल पर मुकाम हासिल कर महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। डॉ. शालिनी श्रीवास्तव ने कोरोना काल में मरीजों की सेवा की तो टीकाकरण के दौरान बढ़-चढ़कर लोगों को टीका लगवाया। डोर-टू-डोर सर्विलांस अभियान के सफल संचालन में खोराबार ब्लॉक की स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सूचना अधिकारी श्वेता पांडेय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बीसी सखी रन्नो चौरसिया ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही हैं। शहर की कवयित्री डॉ. चारुशीला सिंह ने महज चार वर्षों में कवि सम्मेलनों और मुशायरों में अपना बेहतर स्थान बनाया है। मूकबधिर बेटी आदित्या ने मां की नसीहत और उत्साहवर्धन के दम पर ब्राजील में 1-15 मई तक आयोजित होने वाले मूक बधिर ओलम्पिक के लिए क्वालिफाई किया है। विरासत में पिता मैहर घराने के बांसुरी वादक रमेश प्रसाद वर्मा से संगीत की शिक्षा लेकर शहर की सुनिषा पांच हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को संगीत की शिक्षा दे रही हैं।

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प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शालिनी श्रीवास्तव। - फोटो : अमर उजाला।

ओपीडी में मरीज देखने के साथ ही टीका भी लगवा रहीं

कोरोना काल में जहां हर किसी को अपनी जान बचाने की चिंता थी, वहीं झरना टोला शहरी स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शालिनी श्रीवास्तव ने इस दौरान सिर्फ मरीजों का इलाज किया। यही नहीं कोरोना से बचाव के लिए लोगों को प्रेरित भी किया।

अब भी ओपीडी में आने वाले मरीजों को देखने के साथ कोरोनारोधी टीकाकरण में अहम भूमिका निभा रही हैं। आशा और एएनएम की टीम के कहने पर, जो लोग टीका लगवाने से मना करते हैं, उनको फोन कर टीके के फायदे बता रही हैं। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को टीका लगवाने के लिए वह खुद का उदाहरण देती हैं। उनके प्रयास से 100 से अधिक टीका नहीं लगवाने वाले लोगों को टीका लगाया गया है।

डॉ. शालिनी के समझाने पर टीकाकरण करवाने वाले फागू (74) और शांति देवी (68) हृदय रोगी हैं। दोनों को टीका लगे एक महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है। नंदानगर के रहने वाले फागू बताते हैं कि पति-पत्नी दोनों की एंजियोप्लास्टी हुई है। इसलिए टीकाकरण से डर लग रहा था। डॉक्टर शालिनी ने समझाया कि टीकाकरण से कोई दिक्कत नहीं होगी। इसके बाद उन्होंने रेलवे अस्पताल के अपने चिकित्सक से परामर्श लिया। झरना टोला स्वास्थ्य केंद्र पर उन्हें टीका लगाया गया। उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई। दरगहिया इलाके की रहने वाली रिंकू देवी (30) का बच्चा सात महीने का है। वह बच्चे को स्तनपान कराती हैं, इसलिए टीका लगवाने से डर रही थीं। डॉ. शालिनी के कहने पर उन्होंने टीका लगवाया।

113 फीसदी प्रथम डोज टीकाकरण करवाया
डॉ. शालिनी झरना टोला के अलावा रामपुर शहरी स्वास्थ्य केंद्र की भी प्रभारी हैं। दोनों स्थानों को मिलाकर उन्होंने 113 फीसदी प्रथम डोज टीकाकरण करवा लिया है। उनके क्षेत्र के 74 फीसदी लोगों ने कोरोनारोधी टीके की दूसरी डोज लगवा ली है। अब वह लाभार्थियों को फोन करके सेकेंड डोज की वैक्सीनेशन लगवा रही हैं।


 

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स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सूचना अधिकारी श्वेता पांडेय। - फोटो : अमर उजाला।

श्वेता कर रही थीं कोरोना मरीजों को जागरूक, मिला था सीएम के हाथों सम्मान

डोर-टू-डोर सर्विलांस अभियान के सफल संचालन में खोराबार ब्लॉक की स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सूचना अधिकारी श्वेता पांडेय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। व्हाट्सएप का सहारा लेकर वह ऑडियो रिकॉर्ड कर आशा कार्यकर्ताओं तक पहुंचा रही थीं। ऑडियो संदेश के जरिए बता रही थीं कि हर घर में मरीज को मेडिकल किट अवश्य देनी है। कोरोना मरीजों को मेडिकल किट, जबकि लक्षणयुक्त मरीज को अलग मेडिकल किट दी जानी है। इस काम के लिए उन्हें मिशन शक्ति पुरस्कार से पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सम्मानित किया था। वह बताती हैं कि उनके ब्लॉक में 204 आशा कार्यकर्ता हैं। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में स्थिति ज्यादा विकट थी, तो ऑडियो का सहारा लेकर आशाओं तक संदेश पहुंचाती थीं। इसकी बदौलत वह लोगों के घरों तक पहुंचती थीं। इसका असर यह हुआ कि खोराबार ब्लॉक जल्द ही संक्रमण से मुक्त हो गया था। दूसरी ओर, लोगों को टीका लगवाने के लिए भी प्रेरित किया, जिसका असर हुआ कि ब्लॉक में 100 प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है।

 

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रन्नो चौरसिया। - फोटो : अमर उजाला।

ग्रामीण महिलाओं को सिखा रहीं बचत के गुर

बनौड़ा गांव की रन्नो चौरसिया ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही हैं। बैंकिंग कॉरेस्पांडेंट (बीसी) सखी के रूप में वे 20 से अधिक महिलाओं को बहुत कम दर पर ऋण उपलब्ध करा उद्यम स्थापित करने में मदद कर चुकी हैं। वहीं, पुरुषों को भी कृषि और घर बनाने के लिए धन उपलब्ध कराने में मदद कर रही हैं।

कोरोना संक्रमण के दौरान रन्नो चौरसिया के परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। इस दौरान वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं और पिपरौली ब्लॉक के बनौड़ा गांव के गगन स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं। अगस्त 2021 में बीसी सखी का कार्यभार संभाला। तब से वे बनौड़ा सहित आसपास के 15 से अधिक गांवों में ग्रामीणों को उनके घर पर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इन गांवों में वृद्धावस्था, दिव्यांग और विधवा पेंशन के आठ सौ से अधिक लाभार्थी हैं। रन्नो के कारण इन लाभार्थियों को पेंशन राशि निकालने के लिए 20 किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ता। वे इन लाभार्थियों के घर पर पहुंच कर उनके खाते से रकम निकाल कर उपलब्ध कराती हैं।

स्वयं सहायता समूह की करीब 20 महिला सदस्यों को वे उद्यम स्थापित करने के लिए समूह की बचत से मात्र दो प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा चुकी हैं। घर बैठे किसानों को कृषि ऋण और आवास बनाने के लिए गृह ऋण उपलब्ध कराने में मदद कर रही हैं। एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक सचिन जायसवाल ने बताया कि रन्नो चौरसिया बैंकिंग सखियों में सर्वश्रेष्ठ कार्य कर रही हैं।
 

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डॉ. चारुशीला सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

राष्ट्रीय फलक पर बड़ा मंच साझा कर रहीं कवयित्री डॉ. चारुशीला

कवि सम्मेलन और मुशायरे में शहर की कवयित्री डॉ. चारुशीला सिंह ने महज चार वर्षों में नया मुकाम हासिल किया है। डॉ. चारु अब राष्ट्रीय फलक पर बड़े मंचों को साझा कर रही हैं। अपनी दमदार रचनाओं से उन्होंने न सिर्फ बड़े कवियों से सराहना पाई है, बल्कि कई पुरस्कार से नवाजी भी जा चुकी हैं।

मूलत: संतकबीरनगर के देवरिया गंगा की रहने वाली डॉ. चारु कहती हैं कि साहित्य का माहौल उन्हें बचपन से मिला है। इनके पिता डॉ. नर्वदेश्वर सिंह गोरखपुर विश्वविद्यालय में बीएड के विभागाध्यक्ष रहे। शादी के बाद कविताओं के पाठ के लिए मंच तक जाने में उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। मां के साथ ससुराल के लोग भी पक्ष में नहीं थे। पति रीतेश शाही और पिता ने बहुत साथ दिया। जब वे बड़े मंचों पर कविताओं का पाठ करने लगीं, तो घरवालों की सोच बदल गई।

पढ़ाई में भी टॉपर रहीं
डॉ. चारु पढ़ाई में भी टॉपर रही हैं। तिलक इंटर कॉलेज, सिद्धार्थनगर से कक्षा 10वीं व 12वीं में टॉपर रहीं। उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली। गोरखपुर विश्वविद्यालय से हिंदी से एमए और पीएचडी कीं। वर्ष 2011 में वह शिक्षक बनीं और 2012 से एडी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में अध्यापन कर रही हैं।

पुरस्कार व सम्मान
महारानी मोहभक्त लक्ष्मी प्रतिभा सम्मान, शक्ति योद्धा सम्मान, नारी सशक्तीकरण सम्मान,  केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा से साहित्य सेवा सम्मान, साहित्य विभूति सम्मान-2021, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान,  फ्यूचर लीडर अवॉर्ड।

कुमार विश्वास के साथ कविता पाठ बड़ी उपलब्धि
डॉ. चारु कहती हैैं कि वर्ष 2018 में पहली बार गोरखपुर महोत्सव में मुझे कविता पाठ करने का मौका मिला। मेरे लिए गर्व की बात है कि 2019 से टैलेंट हंट में जज की भूमिका में आ गई। कला उत्सव व एमपी शिक्षा परिषद के संस्थापक समारोह में भी मुझे जज बनाया गया। वह कहती हैं कि कवि सम्मेलनों में महिलाओं को बड़ा मंच कम ही मिलता है। कपिलवस्तु महोत्सव में डॉ. कुमार विश्वास की मौजूदगी में मेरी कविता को बहुत सराहा गया। डॉ. चारु, ‘स्वप्न हूं, कल्पना हूं, मैं साकार हूं, दवा हूं, दर्द हूं, मैं ही उपचार हूं, मैं सृजन भी, प्रलय भी हूं, सुकुमार भी लोग कहते हैं सृष्टि का शृंगार हूं’ को अपनी श्रेष्ठ रचना मानती हैं।

 

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