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गोरखपुर में खाद कारखाना: होली तक शुरू हो जाएगा यूरिया का उत्पादन, तैयारियां तेज

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 09 Mar 2022 11:46 AM IST
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gorakhpur Fertilizer factory Production of urea will start by Holi
गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।

होली तक हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के खाद कारखाने से यूरिया का उत्पादन नियमित रूप से शुरू हो जाएगा। पहले फरवरी के दूसरे सप्ताह से उत्पादन शुरू करने की तैयारी थी। कुछ मशीनों की जांच का काम पूरा नहीं होने की वजह से उत्पादन शुरू करने का नया समय तय किया गया है।



वहीं, कारखाने तक रेल लाइन बिछाने का काम आखिरी चरण में है। इसके अलावा एक और नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। इसका सर्वे पूरा हो गया है। जमीन चिह्नित हो गई है। जमीन का भुगतान होते ही रेल लाइन के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। शुरुआत में प्रतिदिन करीब 2,600 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन होगा। एक महीने बाद पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू हो जाएगा। रोजाना 3,850 मीट्रिक टन उत्पादन होगा।

 

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गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।

करीब 8,600 करोड़ की लागत से तैयार खाद कारखाने का बीते साल दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण किया था। इस मौके पर 500 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन किया गया था। तभी से प्लांट ट्रायल रन पर है। जापान और स्थानीय इंजीनियरों की देखरेख में प्लांट की मशीनों की सफाई और जांच का काम चल रहा है, जो तकरीबन पूरा हो गया है।


 

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रोशनी से जगमगाता खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।

ऐसे तैयार होती है यूरिया

प्राकृतिक गैस और नाइट्रोजन के रिएक्शन से अमोनिया का लिक्विड तैयार किया जाता है। अमोनिया के लिक्विड को प्रिलिंग टॉवर की 117 मीटर ऊंचाई से गिराया जाता है, जिसके लिए ऑटोमेटिक सिस्टम है। अमोनिया लिक्विड और हवा में मौजूद नाइट्रोजन के रिएक्शन से यूरिया के छोटे-छोटे दाने प्रिलिंग टावर के बेसमेंट में बने छिद्रों से बाहर आते हैं। इसके बाद यूरिया के दानों पर नीम का लेप चढ़ाया जाता है। नीम कोटिंग होने के बाद उसे पैक किया जाता है।

 

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गोरखपुर खाद कारखाना। - फोटो : अमर उजाला।

काफी छोटा होगा यूरिया का आकार, मिट्टी में तुरंत घुल जाएगा

एचयूआरएल के अधिकारियों के मुताबिक, यूरिया के आकार को लेकर देश में जो मानक तय हैं, उसके मुताबिक, यूरिया के दाने 0.3 एमएम से अधिक नहीं होने चाहिए। गोरखपुर खाद कारखाने का प्रिलिंग टावर दुनिया के खाद कारखानों की तुलना में सबसे ऊंचा होने की वजह से यहां 0.2 एमएम के दाने बनेंगे। दानों का आकार छोटा होने से मिट्टी में पड़ते ही तुरंत घुल जाएंगे, जिसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा।

 

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गोरखपुर खाद कारखाना - फोटो : अमर उजाला।

45 किग्रा की बोरी में बिकेगी यूरिया

खाद कारखाने में तैयार यूरिया 45 किलोग्राम की बोरी में बिकेगी। एक बोरी यूरिया की कीमत करीब 266.50 रुपये होगी।

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