केंद्रीय जल आयोग ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसके मुताबिक राप्ती नदी का जलस्तर 2017 को पार कर 1998 के करीब पहुंच गया है। 23 वर्ष पहले नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.56 मीटर ऊपर गया था। तब बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। उस समय तारामंडल, रुस्तमपुर, ट्रांसपोर्टनगर, गीडा और सहजनवां क्षेत्र डूब गया था। नौसड़ का पेट्रोल पंप तक बह गया था। यदि नदी का जलस्तर 27 सेंटीमीटर और बढ़ा तो बाढ़ की चुनौती और गंभीर हो जाएगी। बांधों के टूटने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। वहीं, 2017 की बाढ़ में चौरीचौरा क्षेत्र के कई तटबंध टूट गए थे। बाढ़ का असर देवरिया जिले में भी हुआ था। रोहिन नदी का तटबंध टूटने से जंगलकौड़िया ब्लॉक के अलावा सदर तहसील के कई गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे। सिंचाई विभाग के अभियंताओं का कहना है कि यदि नेपाल की पहाड़ी पर बारिश न हुई तो राप्ती, सरयू व रोहिन नदी का जलस्तर तेजी से नीचे आएगा।
गोरखपुर में बाढ़ का कहर: 1998 के करीब पहुंचा राप्ती का जलस्तर, 23 साल पहले मची थी तबाही
1998 में तारामंडल, रुस्तमपुर, ट्रांसपोर्टनगर, गीडा और सहजनवां क्षेत्र डूब गया था, 27 सेंटीमीटर और बढ़ा नदी का जलस्तर तो बाढ़ की चुनौती गंभीर होगी
गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर और बढ़ा पानी
जिले से होकर बहने वाली आमी नदी भी उफनाई है। बगहा बीर बाबा मंदिर के पास बाढ़ का पानी गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया है। पानी सड़क के दोनों लेन पर जमा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक करीब एक फीट पानी लगा है। इसी वजह से गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग से बड़े वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। कौड़ीराम के पास बैरिकेडिंग लगाकर गुरुवार को भी बड़े वाहनों को खजनी से बांसगांव, फिर बड़हलगंज की तरफ निकाला गया। वहीं शुक्रवार को जलस्तर और बढ़ने के कारण सभी तरह के वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है।
गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग की एक लेन अब भी बंद
रोहिन नदी का जलस्तर भले ही कम हो गया है, लेकिन गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग की एक लेन बंद है। बड़े या फिर छोटे वाहनों को गोरखपुर से सोनौली की तरफ जाने वाली लेन से निकाला जा रहा है। रोहिन का पानी राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो जगह चढ़ा था। एसबीएम स्कूल के सामने करीब डेढ़ फीट पानी लगा था। इसी तरह लोरेटो गर्ल्स स्कूल के सामने भी सड़क पर पानी जमा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गुरुवार को नदी का जलस्तर कम हुआ है। इस वजह से सड़क पर पानी कम हो गया। एहतियातन सड़क बंद की गई है। अगर वाहनों का आवागमन हुआ तो सड़क धंस सकती है।
आफत: गोर्रा नदी खतरे के निशान से 1.40 मीटर ऊपर
झंगहा क्षेत्र से होकर बहने वाली गोर्रा नदी भी जल तांडव मचाने को बेताब दिख रही है। यह नदी खतरे के निशान से 1.40 मीटर ऊपर बह रही है। बरही पाथ बांध से तेज रिसाव हो रहा है। भगने, थुन्नी और मंगलपुर बांध से भी रिसाव हो रहा है। ब्रह्मपुर क्षेत्र की आबादी तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इससे कई संपर्क मार्गों से आवागमन ठप हो गया है। गोर्रा नदी का जलस्तर बढ़ता है तो चौरीचौरा तक तबाही मचती है। दूसरी तरफ बाढ़ की वजह से ही फारेन नाला भी उफना गया है। इसका पानी रसूलपुर नंबर दो के नेकवार, टोला दुबौली, हरपुर, लक्ष्मीपुर, रामघाट, बलुघाट्टा, नरेंद्रपुर गांव तक पहुंच गया है।
राहत: सरयू का जलस्तर स्थिर, रोहिन कुछ नीचे आई
जिले से होकर बहने वाली सरयू नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर है, लेकिन जलस्तर स्थिर है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को शाम चार बजे तक सरयू का जलस्तर 93.19 मीटर रिकॉर्ड किया गया था। रोहिन नदी भी खतरे के निशान से ऊपर है। राहत की बात यह है कि रोहिन का जलस्तर कम हो रहा है। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को शाम चार बजे तक रोहिन का जलस्तर 84.28 रिकॉर्ड किया गया है। यह जलस्तर खतरे के निशान से 2.16 मीटर ज्यादा है। अभी दो मीटर से नीचे पानी जाएगा, तब बंधों के कटान का खतरा कम होगा।

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