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गोरखपुर में जाम: खेल नौ करोड़ रुपये का... ऑटो स्टैंड के नाम कर दिए प्रमुख चौराहे

शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 30 Dec 2023 12:24 PM IST
सार

गोरखपुर में ऑटो एसोसिएशन को स्टैंड चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। उनका कहना है कि 10 हजार में से सात सौ ऑटो ही स्टैंड से संचालित होते हैं। आंबेडकर चौक, विश्वविद्यालय चौक, धर्मशाला के पास सड़क पर ही स्टैंड बना दिए गए हैं। वहीं शास्त्री चौक के लिए भी जमीन खोजी जा रही है।

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Traffice in Gorakhpur Game worth Rs 9 crore Major intersections named after auto stands
शास्त्री चौक पर खड़े ऑटो। - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर शहर में जाम को लेकर मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद हरकत में आए नगर निगम और पुलिस-प्रशासन ने अतिक्रमण हटवाए और ऑटो चलने के लिए स्थान तय कर दिए, लेकिन इसी बीच नगर निगम ने एक बड़ा खेल कर दिया। बड़ी चालाकी से पांच दिसंबर 2023 को चार प्रमुख चौराहों पर सड़क पर ही स्टैंड का ठेका दे दिया।



राजस्व में इसके लिए महज आठ लाख 14 हजार 200 रुपये ही जमा कराए गए हैं, जबकि खेल सालाना करीब नौ करोड़ रुपये का है। पहले भी ऐसे ही स्टैंड की अनुमति दी गई थी, लेकिन वह लिखा-पढ़ी में नहीं थी, लेकिन इस बार ऑटो चालकों से शुल्क लेकर रसीद दी जा रही है।

शहर में करीब 10 हजार ऑटो चलते हैं। अगर ठेका लेने वाले फर्म की बात मान लें तो महज सात सौ ऑटो वाले ही शुल्क देते हैं। ऐसे में हर महीने की आमदनी सात लाख 35 हजार रुपये की है। यानी सालाना इससे आय करीब नौ करोड़ रुपये होगी। इस शुल्क को देने के बाद ऑटो चालक भी बेखौफ होकर प्रमुख चौराहे के किनारे ऑटो खड़ा कर देते हैं। जबकि, शहर से जाम को मुक्त कराने के लिए चौराहों से ऑटो को हटाया गया था। इसके लिए कमिश्नर और एडीजी जोन के निर्देश पर शहर में लगातार अभियान चलाया गया।

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यूनिवर्सिटी चौक पर ऑटो स्टैंड। - फोटो : अमर उजाला।

जानकारी के मुताबिक, शहर में जाम से निपटने के लिए अतिक्रमण हटाने का अभियान चला। सभी जगहों से ठेले वाले और स्थायी निर्माण को हटा दिया गया तो सड़कें चौड़ी हो गईं। गाड़ियां भी रफ्तार भरने लगीं, लेकिन ऑटो वालों का चौराहे पर ही कब्जा दिखने लगा। पुलिस इसे अवैध कब्जा बताकर कार्रवाई कर रही है तो ऑटो एसोसिएशन के पदाधिकारी इसे गलत ठहरा रहे हैं।

दोनों के बीच के इसी विवाद की तह तक जाने की जब कोशिश की गई तो पता चला कि इस पूरे खेल के केंद्र में नगर निगम के कुछ जिम्मेदार खुद ही हैं। शहर के शास्त्री चौक के लिए गए स्टैंड को अगर छोड़ दें तो इसके अलावा तीन जगहों पर खुद नगर निगम ने ही सड़क पर स्टैंड बनाने की अनुमति दे दी है। इसके लिए बाकायदा निविदा की प्रक्रिया की गई और राजस्व में कुछ रकम जमाकर सड़क पर स्टैंड का ठेका दे दिया गया। ठेका की शर्तों में यह कहीं नहीं लिखा है कि किस स्टैंड से कितने ऑटो चलेंगे।

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आंबेडकर चौराहे का ऑटो स्टैंड। - फोटो : अमर उजाला।

आंबेडकर चौराहे पर सड़क पर ही ठेका
आंबेडकर चौक से कमिश्नर कार्यालय की तरफ बढ़ते ही बाईं साइड में विश्वविद्यालय कॉलोनी की दीवार से सटे पार्किंग के लिए निर्धारित किया गया है। यहां पर पंद्रह फीट की जगह है, जिसे स्टैंड बनाया गया है। अब वहां पर आगे-पीछे करके स्टैंड लगेंगे तो फिर चलने के लिए जगह बच रही महज सात फीट की।

दूसरे अगर आप हरिओम नगर तिराहे की ओर से आते हैं और आंबेडकर चौक से बाईं लेन से निकलकर कमिश्नर कार्यालय जाना चाहें तो ऑटो आपका रास्ता रोक देंगे। इस लेन पर रुकते ही इसका असर सभी लेन पर पड़ना तय है। यानी समस्या का समाधान करने की जगह लाइसेंस देकर स्थायी समस्या पैदा कर दी गई।

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विश्वविद्यालय चौक पर बना ऑटो स्टैंड। - फोटो : अमर उजाला।

विश्वविद्यालय चौक : सड़क पर दी गई ऑटो खड़ा करने की छूट
कुलसचिव आवास के पास नगर निगम की अपनी जगह खाली पड़ी है। यहां से पहले प्राइवेट बसों का संचालन होता था। उसे एडीजी और कमिश्नर ने पहल करके शहर के बाहर करा दिया और इसी जगह पर ऑटो स्टैंड के लिए चिह्नित किया गया। लेकिन, नगर निगम ने चौराहे से दूरी पर खाली पड़ी इस जगह में ऑटो स्टैंड न बनाकर सड़क किनारे स्थित गणेश प्रतिमा के सामने जगह निर्धारित कर दिया है। यानी मोहद्दीपुर से आते समय आप विश्वविद्यालय की तरफ जाएंगे तो आप के रास्ते में ऑटो होगा। दूसरे यहां पर ऑटो लगने के बाद चलने के लिए जगह महज आठ फीट सड़क बचती है। यानी इस चौराहे पर भी जाम को स्थायी रूप से करने की व्यवस्था बना दी गई है।

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गोरखपुर में ऑटो - फोटो : अमर उजाला।

धर्मशाला रेलवे पुलिया के पास ही स्टैंड का ठेका
धर्मशाला रेलवे पुलिया से आगे खाली पड़ी जमीन को स्टैंड के लिए चिह्नित किया गया था। रेलवे और यातायात पुलिस के बीच इसके लिए पत्राचार भी हुआ था, लेकिन इसी बीच जो नया ठेका दिया गया है, वह फिर से रेलवे पुलिया के पास ही कर दिया गया है। जिस वजह से लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने की कोशिश यहां पर भी धड़ाम ही नजर आ रही है। ये सब इतने सलीके से किया गया है कि किसी को भनक तक नहीं लगी है। अब इस जगह से पुलिस जब भी ऑटो वालों को हटाती है तो वे आपत्ति करते हैं। पुलिस डंडे के बल पर हटा तो जरूर देती है, लेकिन पर्ची के दम पर वह फिर से वहीं पर काबिज हो जाते हैं।

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