नई शिक्षा नीति में आंगनबाड़ी केंद्रों को बेसिक शिक्षा में समाहित कर प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में चलाने की योजना है। लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली योजना को मूर्त रूप देने में बड़ी चुनौती बनेगी। ग्रामीण इलाकों के ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन जर्जर हैं तो कहीं खुद का भवन ही नहीं है। बड़ी संख्या में ये केंद्र किराए पर या किसी अन्य सरकारी भवन में चल रहे हैं। केंद्र चलाने वाली कार्यकत्रियों व सहायिकाओं के पद भी बड़ी संख्या में खाली हैं। इससे यहां छह साल से छोटे बच्चों की देखभाल व उन्हें प्री-प्राइमरी स्तर की शिक्षा देने के नाम पर खानापूर्ति ही हो रही है। कोरोना काल के बाद खुले खुले इन केंद्रों की अमर उजाला ने पड़ताल की तो ग्रामीण क्षेत्रों में यही स्थिति सामने आई। जानिए, कहां क्या है स्थिति..?
रिपोर्ट: बदहाल आंगनबाड़ी केंद्र कैसे बनेंगे प्री-प्राइमरी स्कूल, कहीं भवन जर्जर तो कहीं दूसरे भवनों में चल रहे केंद्र
ऐसे में आगनबाड़ी कार्यकत्री दुर्गेश कुमारी वहां के बजाय गांव के प्राथमिक विद्यालय में ही केंद्र चला रही है। इसके अलावा रामपुर, इस्माइल नगर, कल्याण खेड़ा, बहरौली तृतीय, सेल्हूमऊ, खेमा खेड़ा, जौखंडी प्रथम केंद्र में कार्यकत्री ही नहीं है। यहां का चार्ज दूसरी आगनबाड़ी की कार्यकत्रियों को सौंपा गया है, जो यहां नियमित रूप से नहीं पहुंच पा रही हैं। बहरौली प्रथम केंद्र काफी जर्जर है। वहीं कई केंद्र किराये के भवन में चल रहे हैं।
मलिहाबाद : पंचायत भवन व प्राइमरी स्कूलों में संचालन
विकास खंड क्षेत्र की 67 ग्राम पंचायतों व उनके मजरों में चल रहे 218 आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब 1935 बच्चे पंजीकृत हैं। इनकी देखरेख व पढ़ाने के लिए 189 आंगनबाड़ी कार्यकत्री हैं। ब्लॉक में 29 कार्यकत्री की कमी है। साथ ही 19 मिनी सेंटरों को छोड़कर 42 सहायिका के पद खाली है। मात्र 90 सरकारी भवन हैं। इनमें 9 जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। सीडीपीओ निरूपमा का कहना है कि कुछ नए केंद्र बने हैं, जिन्हें विभाग को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। खाली पद भी जल्द भरने की उम्मीद है। ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों के पास खुद का भवन न होने से ये कहीं पंचायत भवन, कहीं प्राइमरी स्कूल तो कहीं किराये के भवन में चल रहे हैं।
सरोजनी नगर : एक दर्जन से अधिक केंद्र जर्जर
सरोजनी नगर क्षेत्र में 336 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें सरैया, सदरौना चतुर्थ और खुर्रामपुर सहित एक दर्जन केंद्रों के भवन जर्जर हैं। आंगनबाड़ी सहायिकाओं के 320 पदों में 106 पद तो आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के 214 पदों में 90 पद खाली हैं। हालांकि बाल विकास परियोजना अधिकारी कामनी श्रीवास्तव का कहना है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की इमारतें सही हैं। सरकार के आदेश के बाद हफ्ते में दो दिन सोमवार व गुरुवार को केंद्र खुलेंगे। क्षेत्र में 17 आंगनबाड़ी केंद्र मॉडर्न हैं। कल्ली पूरब सेकंड, रामचौरा और चंद्रावल आदि में मॉडल व्यवस्था लागू है। इंजीनियरिंग कॉलेजों ने इन केंद्रों को गोद लिया है।
माल : भवन नहीं तो बंद हो गए सेंटर
माल में 177 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें आऊमऊ थरी, रनीपारा, बहरौरा, मसीढ़ा व भानपुर जैसे जर्जर भवन वाले केंद्र बंद हो गए हैं। वहीं खखरा, बेलाहार केंद्र की भी स्थित काफी खराब है। यहां 107 सहायिका व 127 वर्कर हैं, जबकि 109 पद खाली हैं। करीब 10893 बच्चे व 2400 गर्भवती धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। बाल विकास परियोजना अधिकारी सुधा मौर्या ने बताया कि बीते तीन दशक से बाल विकास परियोजना का कोई अपना भवन नहीं है।
मोहनलालगंज : सीडीपीओ का भवन तक किराए पर
मोहनलालगंज तहसील में कुल 79 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिसमें छह जर्जर हैं। यहां बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) तक का अपना भवन नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्रों में कुल 4948 बच्चे पंजीकृत हैं। कर्मचारी 262 की जगह 213 ही कार्यरत हैं।