आगरा में यमुना नदी के बायीं ओर चीनी का रोजा के बाद है एत्माद-उद-दौला का मकबरा, जिसे मुगल बादशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां ने अपने पिता की याद में बनवाया था। जहांगीर के शासनकाल में नूरजहां के पिता मिर्जा ग्यास बेग वजीर के पद पर थे। उन्हें एत्माद-उद-दौला की उपाधि दी गई थी। नूरजहां ने अपने पिता के मकबरे का निर्माण उनकी मृत्यु के लगभग 7 वर्ष बाद 1628 ई. में पूरा करवाया। वह इस स्मारक को चांदी से बनवाना चाहती थीं। इतिहासविद राजकिशोर राजे बताते हैं कि लेखक बाला दुबे ने अपनी पुस्तक ‘आगरा के गली-मुहल्ले’ में नूरजहां द्वारा चांदी से पिता का मकबरा बनवाने की इच्छा का जिक्र किया है। सखी सित्ती उन्निसा के समझाने पर अपना विचार बदल दिया था। चारबाग शैली में बने बागीचे के बीच में बने एत्माद-उद-दौला स्मारक सफेद संगमरमर से बना है। इसमें मिर्जा ग्यास बेग और उनकी बेगम अस्मत बेगम की कब्र है।
आगरा कथा: नूरजहां चांदी से बनवाना चाहती थी पिता का स्मारक, बेबी ताज के नाम से प्रसिद्ध है ये मकबरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 25 Jun 2021 02:19 PM IST
विज्ञापन