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ट्रांसपोर्टर केस में नया मोड़: एक कार, कई ड्राइवर और हादसा नहीं हत्या! मौत की ये है पूरी कहानी; CCTV हुआ वायरल

संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Mon, 13 Apr 2026 07:42 AM IST
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सार

आगरा में ट्रांसपोर्टर असगर अली की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है, जहां टक्कर के बाद कार कई लोगों ने चलाकर छिपाई। पुलिस जांच में पुराने कार मालिक और संदिग्धों के बीच कनेक्शन सामने आने से साजिश गहराती जा रही है।

New twist in transporter case, bloody car passed through many hands after the collision
कार की टक्कर से ट्रांसपोर्टर की माैत। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

आगरा के शाहगंज के मेवाती गली निवासी ट्रांसपोर्टर असगर अली की मौत के मामले में अब पुलिस की जांच में कड़ियां जुड़ती जा रही हैं। सीसीटीवी की जांच में पता चला कि हादसे के बाद कार को कई चालकों ने थोड़ी-थोड़ी दूरी तक चलाया और फिर एक सुरक्षित स्थान पर ठिकाने लगाया गया। कार का पुराना मालिक भी शक के घेरे में आए लोगों के संपर्क में निकल रहा है। पुलिस ने शक के आधार पर एक और युवक को पकड़ने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं मिला।
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रामनगर की पुलिया के पास अजमन ट्रांसपोर्ट के संचालक असगर अली का शव 4 अप्रैल को मल्ल का चबूतरा क्षेत्र में मिला था। परिजन ने एक जीएसटी महिला अधिकारी, उसके पति, पूर्व चालक और दो अन्य पर हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस की जांच में घटना का सीसीटीवी फुटेज मिला था, जिसमें एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मारी थी। असगर अली ने चार माह पूर्व जीएसटी अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर शिकायत की थी। अधिकारी ने भी असगर पर चौथ मांगने का आरोप लगाकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामला लोकायुक्त तक पहुंच गया था।
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परिजनों का आरोप है कि खुद को फंसता देख जीएसटी अधिकारी और उसका पति लगातार धमकियां दे रहे थे। एक रिश्तेदार और उसके गुर्गे से धमकियां दिलाने के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करवाकर बदनाम किया जा रहा था। असगर ने घटना के दो दिन पहले ही प्रेस कांफ्रेंस कर जान का खतरा बताया था।

पुराने मालिक से मिला कनेक्शन
पुलिस को पता चला है कि कार पहले दिल्ली के व्यक्ति के नाम थी और बाद में उसे जालौन के व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किया गया। दिल्ली वाले पुरानेे कार मालिक का शक के घेरे में आए लोगों से कनेक्शन पुलिस को मिल गया है। पुलिस अब जालौन निवासी कार स्वामी का कनेक्शन खंगाल रही है। उसके पकड़ में नहीं आने से पुलिस खुलकर कुछ नहीं बोल रही है। पुलिस को यह भी पता चला है कि जीएसटी कार्यालय में वसूली के लिए प्राइवेट लोगों को शामिल किया जाता है। प्राइवेट व्यक्ति ट्रांसपोर्टर्स के संपर्क में रहकर ठेका लेते थे। जो रुपये दे देता था,उसके वाहन आराम से निकलते हैं।

शुरू हुआ दबिश का दौर
असगर अली की मौत के दो दिन बाद तहरीर दी गई। प्राथमिकी में अपना नाम शक के घेरे में देखने के बाद सभी भूमिगत हो गए। अपने मोबाइलों को बंद कर दिया। संभावित ठिकानों पर भी नहीं हैं। इससे पुलिस का शक बढ़ गया है। जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस उन्हें पकड़ने के प्रयास में लग गई है। शनिवार को एक व्यक्ति के ताजगंज क्षेत्र में होने की सूचना पर पुलिस ने दबिश दी। हालांकि वह मौके पर नहीं मिला।


 
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