आगरा के श्री पारस अस्पताल में हुए ऑक्सीजन मॉकड्रिल कांड को 43 दिन बीत गए हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। पीड़ित इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इधर प्रशासन ने मंगलवार को आगे जांच करने से पल्ला झाड़ लिया। उधर, आईएमए मीटिंग-मीटिंग ‘खेल’ रहा है। वहीं पुलिस पीड़ितों के प्रार्थनापत्रों को अहमियत नहीं दे रही। आगरा के प्रभारी मंत्री और उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के 18 दिन पहले दिए बयान की अब सच्चाई भी सामने आ गई है।
श्री पारस अस्पताल: उपमुख्यमंत्री ने जांच को बताया था सतही, अब डीएम बोले- मेरी तरफ से जांच हुई पूरी
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मंगलवार को प्रशासन ने आगे जांच करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह का कहना है कि प्रशासन की तरफ से जो जांच होनी थी वो पूरी हो चुकी है। अब आगे कोई जांच नहीं होगी। इस प्रकरण में अब आगे जो भी कार्रवाई होनी है वह पुलिस और अदालत करेगी। जिलाधिकारी के इस बयान के बाद 18 दिन पहले दिए उपमुख्यमंत्री के बयान के अब कोई मायने नहीं नजर आते।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने अमर उजाला से कहा, हमने अपनी जांच करके संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेज दी है। डेथ ऑडिट रिपोर्ट थाने को भेजी है। सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश है कि किसी भी चिकित्सक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने से पहले कोई आधार होना चाहिए। उस शर्त का पालन किया है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस पूरी तरह स्वतंत्र है। पुलिस को कार्रवाई करनी है। जो कमियां मिलीं उसके आधार पर हमने हॉस्पिटल को सील किया है।
उन्होंने कहा कि सीएमओ को लाइसेंस निरस्त करना है। वो अपनी कार्रवाई करेंगे। महामारी की धाराओं के साथ आईपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। कुछ पीड़ित अदालत में गए हैं। उन्होंने मुकदमा दर्ज कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिए हैं। कोर्ट का जो निर्णय होगा उसमें भी पुलिस ही कार्रवाई करेगी। अंतिम जांच रिपोर्ट के सवाल पर जिलाधिकारी ने कहा, प्रशासन की तरफ से जो रिपोर्ट भेजनी थी भेजी जा चुकी हैं, अब हमें कोई और रिपोर्ट नहीं भेजनी। एडीएम सिटी ने न्यू आगरा थाना को अपनी रिपोर्ट भेजी है। एसएसपी को भी उसकी प्रति भेजी गई है।
26 अप्रैल को की गई मॉकड्रिल में 22 मरीजों की मौत के आरोप हैं। दो दिन के डेथ ऑडिट में 16 मृतकों की पुष्टि हो चुकी है। वीडियो में डॉ. अरिन्जय जैन ने सुबह सात बजे मॉकड्रिल करने की बात कही थी। डीएम का कहना है कि मॉकड्रिल के समय से तीन घंटे पहले और तीन घंटे बाद तक कोई मृत्यु नहीं हुई। यानी पहली मौत करीब तीन घंटे बाद हुई।