फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

75वां महोत्सव विश्वास का: अमर उजाला से जुड़ी यादें... जो चेहरे पर लाती हैं मुस्कान

Mon, 18 Apr 2022 01:49 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 18 Apr 2022 01:49 PM IST
विज्ञापन
amar ujala foundation day see amar ujala journey in photos
अमर उजाला स्थापना दिवस - फोटो : स्पीड कलर लैब/ कलाकुंज
तस्वीरें बोलती हैं...शब्द मुकाबिल हों तो और भी मुखर हो उठती हैं। हर मौके की प्रत्यक्षदर्शी वर्षों तक बेधड़क गवाही देती रहती हैं। अमर उजाला के 75 वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर गवाही के दस्तावेज के चंद पन्ने अपने पाठकों के सामने प्रस्तुत हैं। ये तस्वीरें जाहिर करती हैं उस दौर का संघर्ष और पाठकों व हमारे अपनों के बीच अखबार की पैठ...ये यादें यकीनन आज चेहरे पर मुस्कान ला देती हैं।


कलाकुंज, स्पीड कलर लैब के विजय गोयल के मुताबिक उनके पिता सत्यनारायन गोयल ने अपनी डायरी में जो लिखा, उसके अंश इस तरह हैं - अमर उजाला का ऑफिस तब पथवारी - बेलनगंज स्थित एक छोटे से भवन में था। तब न ऑफसेट  मशीन थी, न टेलीप्रिंटर न कंप्यूटर। ‘अमर उजाला’ टाइप से कंपोज होकर छोटी सी मशीन पर छपता था जिसमें मशीनमैन कागज निकालता था और पेपर मैन कागज लगाता था। 
amar ujala foundation day see amar ujala journey in photos
राममनोहर लोहिया के कलेक्ट्रेट में आने पर रिपोर्टिंग करते हुए डोरीलाल अग्रवाल - फोटो : स्पीड कलर लैब/ कलाकुंज
आज ‘अमर उजाला’ हर क्षेत्र की समृद्धतम स्थिति में है, बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि कभी ‘पेपरमैन’ के न होने पर डोरीलाल जी स्वंय पेपर निकालते थे। वह और मुरारी लाल जी देर रात प्रेस में अखबार छपने के बाद घर जाते थे और सुबह 10-11 बजे तक सोकर पुन: 12-1 बजे कार्यालय आ जाते थे। 
amar ujala foundation day see amar ujala journey in photos
धूलियागंज में था पहला दफ्तर - फोटो : अमर उजाला
‘अमर उजाला’ की नींव के इस परिश्रम ने ही उसे सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाया है। ‘अमर उजाला’ का कार्यालय बाद में बेलनगंज के एक बड़े भवन के प्रथम तल पर स्थापित हुआ और वहां ‘ब्लाॅक’ बनने लगे जिससे ‘अमर उजाला’ में चित्र छपने लगे थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन
amar ujala foundation day see amar ujala journey in photos
प्रिटिंग मशीन के बारे में राम मनोहर लोहिया को बताते हुए डोरीलाल अग्रवाल, साथ में मुरारीलाल माहेश्वरी - फोटो : स्पीड कलर लैब/ कलाकुंज

ऑफसेट मशीन पर छपने लगा 

विजय गोयल बताते हैं कि अमर उजाला में ऑफसेट की छपाई प्रारंभ हो गई। ब्लॉकों की आवश्यकता समाप्त हो गई। फोटो दिन के दिन छपने लगे। फोटो की संख्या भी बढ़ गई। शाम को पांच बजे फोटो खींचे तो सात बजे और रात को 12 बजे फोटो खींचे तो उसी समय बनाने पड़ते थे। 
विज्ञापन
amar ujala foundation day see amar ujala journey in photos
अमर उजाला पढ़ते अटल बिहारी वाजपेयी और मोरारजी देसाई - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि दिन में कई-कई बार फोटो खींचकर देने पड़ते थे। यह मेरे लिए उन्होंने कठिनाई कर दी। फोटो की संख्या बढ़ गई सारे-सारे दिन अमर उजाला का ही काम रहता था। मैं तथा सारा स्टाफ, सारे लड़के दिनरात इसी में लगे रहते थे। 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed