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UP: सेना के झंडे, वर्दी में अफसर...फर्जी ट्रेनिंग सेंटर से करोड़ों की ठगी, लेकिन अरविंद के खाते हैं खाली

Sat, 07 Jun 2025 02:02 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 07 Jun 2025 02:02 PM IST
सार

मैनपुरी के किशनी में पुलिस और सेना में भर्ती के नाम पर फर्जी ट्रेनिंग सेंटर का संचालन करने वाले अरविंद के खाते खाली हैं। 600 से ज्यादा युवाओं को ठगने वाले अरविंद की  अचल संपत्ति का भी कोई सुराग नहीं लग सका है। 

 

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Army flags officers in uniform fraud of crores of rupees from fake training center but Arvind's accounts empty
फर्जी ट्रेनिंग सेंटर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सेना भर्ती प्रशिक्षण के नाम पर अवैध रूप से संचालित ''''''''भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स सेंटर'''''''' के संचालक अरविंद पांडेय के कारनामे हर दिन नए रूप में सामने आ रहे हैं। वहीं, ठगी के शिकार हुए हजारों पीड़ितों को उनकी रकम कैसे वापस मिलेगी, यह सवाल आज भी अनुत्तरित है। अरविंद के बैंक खातों में कोई बड़ी रकम नहीं मिली है, उसकी अचल संपत्ति का भी कोई सुराग नहीं है, और न ही उससे कोई नकदी बरामद हुई है। इस गिरोह का कोषाध्यक्ष बिहार का प्रकाश अभी भी फरार है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से ठगी गई करोड़ों की रकम का पता चलेगा।


ठगी के नए पीड़ित और चौंकाने वाले तरीके
शुक्रवार को दो नए पीड़ित सामने आए। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के आनंद कुमार ने किशनी थाने में बताया कि सेंटर में भर्ती के लिए उनसे 1.18 लाख रुपये की मांग की गई थी। उन्होंने 2250 रुपये ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फीस दी थी और उन्हें एक जॉइनिंग लेटर व आईकार्ड भी दिया गया था। अरविंद और उसकी सहयोगी महिला मित्र की गिरफ्तारी के बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। आनंद अपनी ओर से भी एक मामला दर्ज कराएंगे। कन्नौज के एक युवक ने भी अपनी पहचान उजागर किए बिना किशनी पुलिस को बताया कि उसने भी इस ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षण लिया था। दाखिले के लिए उससे 1.20 लाख रुपये फीस और 2100 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस ली गई थी। अरविंद यादव ने खुद को 'डॉ. अरविंद यादव' और आर्मी अफसर बताया था, वर्दी भी पहने हुए था। एक एग्रीमेंट भी किया गया था जिसमें 3 महीने की ट्रेनिंग, उसके बाद 6 महीने तक ट्रेनिंग के साथ 14,800 रुपये प्रति माह देने और बाद में युवाओं को नेता या अभिनेता की सुरक्षा ड्यूटी में लगाने का वादा किया गया था।


 
Army flags officers in uniform fraud of crores of rupees from fake training center but Arvind's accounts empty
फर्जी ट्रेनिंग सेंटर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ठगी की दुनिया में अरविंद पांडेय का सफर: एक शातिर अपराधी की कहानी
अरविंद पांडेय का परिवार मूल रूप से कुर्रा के राजपुर का रहने वाला है। उसकी मां मीरा ने बताया कि अरविंद 15-20 साल पहले ही परिवार को छोड़कर चला गया था और अब उनका उससे कोई संबंध नहीं है। अरविंद ने 2011 में शिकोहाबाद की निधि यादव से प्रेम विवाह किया था, जिसके बाद उसने परिवार से झगड़ा शुरू कर दिया और उन्हें छोड़कर चला गया। हाईस्कूल भी पास न करने वाले अरविंद ने 2014 में मैनपुरी में मोबाइल की दुकान खोलकर ठगी की दुनिया में कदम रखा। वह सिम खरीदने आने वाले लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से लोन लेता था। शहर कोतवाली में उसके खिलाफ इस मामले में भी केस दर्ज है। इसके बाद उसने फर्जी तरीके से 'हिंदुस्तान दंत मंजन' के नाम से कंपनी खोली, फिर 2019 में 'मिस इंडिया प्रतियोगिता' की तैयारी कराने के नाम पर देशभर की लड़कियों से ठगी की। उसने एक राजनीतिक दल भी बनाया और लोगों को जोड़ने के नाम पर पैसे ऐंठे। इसके बाद 'नेशनल एंटी करप्शन क्राइम ब्यूरो' के नाम से संस्था संचालित कर लोगों को धमकाना और ठगना शुरू कर दिया।


ठगी का शिकार, फिर गिरोह में शामिल और दूसरी पत्नी
अरविंद के साथ ठगी में शामिल रही उड़ीसा की सुमित्रा को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि 2023 में जब अरविंद घिरोर में सेंटर चलाता था, सुमित्रा वहां सेना भर्ती की तैयारी के लिए जुड़ी थी। नौकरी न मिलने पर उसने अरविंद का विरोध किया, तो अरविंद ने उसे अपने केंद्र में ही नौकरी दे दी। बाद में दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने मंदिर में प्रेम विवाह कर लिया। सुमित्रा की उम्र 21 और अरविंद की 40 वर्ष से अधिक है। अरविंद ने सुमित्रा की चचेरी बहन को भी एयर होस्टेस की तैयारी कराने का लालच दिया।

 
Army flags officers in uniform fraud of crores of rupees from fake training center but Arvind's accounts empty
फर्जी ट्रेनिंग सेंटर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा का सुमित और मुकेश उर्फ रामपाल भी पुलिस के रडार पर
पुलिस को अरविंद से पूछताछ और उसके दस्तावेजों से पता चला है कि उसने आगरा के संजय प्लेस स्थित एक टावर में भी एक कार्यालय खोल रखा था। यहां उसने सुमित नाम के एक वीडियो एडिटर को नौकरी पर रखा था, जिसने अरविंद के लिए आर्मी कैप्टन का फर्जी आईकार्ड तैयार किया था। अरविंद ने बताया कि यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए जाने वाले वीडियो की एडिटिंग का काम सुमित का था। एडिटिंग सेंटर संजय प्लेस के प्रतीक टावर में शॉप नंबर 502 में संचालित था, हालांकि पुलिस को वहां कोई सेंटर नहीं मिला। पुलिस का मानना है कि अरविंद ने गुमराह करने की कोशिश की है। अरविंद ने 2024 में किशनी के जटपुरा चौराहे पर 1 लाख रुपये मासिक किराए पर 12 बीघा जमीन ली थी, जिसे किशनी के ही डीड राइटर मुकेश उर्फ रामपाल ने दिलाया था। पुलिस मुकेश उर्फ रामपाल की भी तलाश कर रही है।

पुलिस जांच जारी, फरीदाबाद जाएगी टीम
पुलिस इस मामले में गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। अरविंद की पहली पत्नी निधि यादव से पूछताछ के लिए पुलिस फरीदाबाद भी जाएगी। गिरोह में शामिल कई अन्य लोगों के बारे में भी पुलिस सुराग लगा रही है।

 
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फर्जी ट्रेनिंग सेंटर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सीएम योगी के साथ एडिटेड तस्वीरें और बाहरी युवाओं को निशाना
अरविंद पांडेय बेहद शातिर अपराधी है। वह अपना रुतबा दिखाने के लिए फोटो एडिट कर सोशल मीडिया पर शेयर करता था। एक तस्वीर में वह सीएम योगी के स्थान पर खुद बैठा है, जिसके पीछे हिंदुस्तान रक्षा धर्म का पोस्टर लगा है। र यूपी के मुख्य सचिव संजय प्रसाद व पूर्व एडीजी प्रशांत कुमार भी नजर आते हैं। वह इसी तरह जवानों के साथ तस्वीरें बनवाकर अपने कैंप में लगाता था।

ट्रेनिंग सेंटर में थी फायरिंग रेंज और प्रशिक्षण सुविधाएं
अरविंद पांडेय ने जटपुरा चौराहे के पास अपने सेंटर में फायरिंग रेंज भी बना रखी थी। वह एयर गन से हथियार चलाने की ट्रेनिंग देता था। इसके अलावा उसने लॉन्ग जंप, हाई जंप, दौड़, जिम और रस्सी चढ़ने के प्रशिक्षण के लिए भी व्यवस्था कर रखी थी।


 
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फर्जी ट्रेनिंग सेंटर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भर्ती सेंटर को सरकार की सहयोगी संस्था बताता था अरविंद पांडे
किशनी। थाने पर पहुंचा उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के आनंद कुमार ने एक बड़ा खुलासा भी किया है। उसने बताया कि अरविंद पांडेय युवाओं को सेंटर में भर्ती कराने के लिए अपने सेंटर को सेमी गर्वनमेंट संस्था बताता था, जिससे युवा उसके झांसे में आ जाते थे। उसके पास रुपये जमा करने के लिए अरविंद पांडेय के अलावा उसकी सहयोगी सुमित्रा के मैसेज व फोन आते थे। उसके जैसे कई युवा इस जाल में फंसे हैं, जो जल्द ही सामने आएंगे। इसके अलावा आनंद ने बताया कि सेंटर के भीतर आर्मी के कपड़े, आईकार्ड, कैप आदि सामान की बिक्री भी करता था। कैंटीन संचालित कर रखी थी, जिसमें यह सामान मिलता था। इनकी कीमत बहुत अधिक थी। अरविंद पांडेय ने नियम बना रखा था कि आर्मी की वर्दी पहनकर ही युवा प्रशिक्षण लेंगे। सादा कपड़ों में कोई भी प्रशिक्षण नहीं ले सकता था।

 
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