आगरा के धनौली में नाला निर्माण की मांग को लेकर धरने पर बैठी 49 वर्षीय महिला की मौत हो गई। धरना स्थल पर महिला की मौत होने से लोगों में गम और गुस्सा है। यही वजह है कि रविवार को जब महिला का शव पोस्टमार्टम के बाद धनौली पहुंचा तो लोगों ने शव सड़क पर रख कर जाम लगाने का प्रयास किया और हंगामा भी किया।
आगरा: दो किमी नाला नहीं बनवा पाया प्रशासन, धरना देते-देते महिला की जान चली गई, लोगों में गम और गुस्सा
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धनौली में नाला निर्माण ना होने से 2015 से समस्या बनी है। गंदे पानी की निकासी नहीं है, यह रास्तों पर भरा रहता है। गंदगी के कारण संक्रामक रोग फैलने का खतरा है। छह किमी लंबाई के इस नाले के निर्माण पर 49 करोड़ रुपये खर्च होने हैं, जिसमें से चार किमी नाला बन चुका है। दो किमी लंबाई का नाला नहीं बन रहा है। इसी को लेकर धनौली के लोग 82 दिनों से धरना दे रहे हैं।
जिला अस्पताल में भर्ती कराईं कीर्ति अम्मा
धरना स्थल पर टेंट लगा है। जहां 82 दिन से हर वक्त कोई न कोई रहता है। मृतक रानी के पास सो रही कीर्ति अम्मा की भी रविवार को तबीयत बिगड़ गई। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। 85 वर्षीय कीर्ति अम्मा भी आंदोलन में शामिल है। नाला निर्माण के लिए 5 दिसंबर को कीर्ति अम्मा और चौ. प्रेम सिंह ने भूसमाधि की कोशिश की थी। तहसीलदार ने समाधि के लिए खोदे गए गड्ढे से दोनों को निकाला था। तब 24 घंटे में नाला निर्माण कराने का आश्वासन दिया था।
किराए के मकान में रहते थे मां-बेटे
मृतक के 25 वर्षीय पुत्र नीरज ने बताया कि मैं जूता का मजदूर हूं। मेरे पिता मिट्ठन लाल की 10 साल पहले मृत्यु हो गई। उसकी मां दो महीने से धरने में शामिल थी। रात को धरना स्थल पर ही सोती थी। मैंने कई बार वहां सोने से मना किया, लेकिन वो नहीं मानती थी। नीरज ने बताया कि धरना स्थल के पास ही एक हजार रुपये महीना किराए पर कमरा ले रखा है।
पीड़िता के परिवार के बारे में जुटाई जानकारी
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट लक्ष्मी एन ने बताया कि महिला रानी के परिवार की आर्थिक स्थिति, जमीन आदि के बारे में लेखपाल से जानकारी इकट्ठा कराई जा रही है। इस संबंध में जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह का कहना है कि एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।