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अपनों के खोने का दर्द: बेटे-बहू की मौत के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रहे दादा-दादी

Thu, 27 May 2021 11:13 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 27 May 2021 11:13 AM IST
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Father And Mother Death Due To Covid Now Son Depends Of Grandfather
बेटे-बहू की मौत के बाद बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी संभालते 70 साल के बुजुर्ग - फोटो : अमर उजाला

कोरोना संक्रमण ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। अपनों के खोने का दर्द है तो भविष्य का संकट सामने है। घर का मुखिया खो दिया। पिता के साथ मां की भी बीमारी में मौत हो गई। अब घर में कोई कमाने वाला नहीं है। बूढ़े दादा-दादी सहारा बने हैं। प्राथमिक विद्यालय, गुही, बाह में तैनात शिक्षामित्र टिंकी भदौरिया और उनके पति की मौत के बाद दो बच्चे अनाथ हो गए हैं। इन बच्चों की जिम्मेदारी अब बुजुर्ग दादा-दादी के कंधों पर आ गई है, जिनकी उम्र 70 वर्ष के पार है। इस परिवार को आर्थिक मदद की दरकार है। टिंकी भदौरिया की मौत 10 मई को हुई। वह कोरोना संक्रमित थी, इलाज चल रहा था। उनकी मौत के चार दिन बाद ही पति हरवेंद्र सिंह भदौरिया की मौत हो गई। वह भी कोरोना संक्रमित थे। इनके दो बेटे हैं विदित (12 वर्ष) तथा विराट (10 वर्ष) हैं। दोनों माता-पिता का सिर से उठने से गुमसुम रहने लगे हैं। दादा-दादी का सहारा है।

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पति हरविंद सिंह भदौरिया के साथ शिक्षामित्र टिंकी भदौरिया का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र छौंकर का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है, इस स्थिति में बच्चों की परवरिश कर पाना बुजुर्ग दादा-दादी के लिए चुनौतीपूर्ण है। सरकार को इस परिवार को 50 लाख रुपये की अनुग्रह धनराशि और बच्चों की शिक्षा के लिए 10 हजार रुपये महीना गुजारा भत्ता देना चाहिए।
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सोनू अलग - फोटो : अमर उजाला
बेटी ने दी मां को मुखाग्नि, जीजा ने साले का किया अंतिम संस्कार

जिंदगी, तू इतना दर्द देगी। ये मैने सपने में भी नहीं सोचा था। सिसकियों के साथ जब विजय नगर निवासी सोनू अलग अपने दर्द को बयां करती हैं, तो वह फूट फूटकर रोने लगती हैं। सोनू ने बताया कि उसकी मां कैलाशपुरी निवासी राजकमल जयसवाल की मौत 10 मई को कोरोना संक्रमण के कारण हो गई थी। घर में कोई नहीं होने के कारण उसे ही मुखाग्नि देनी पड़ी। सोनू के पति राजेंद्र अलग ने अपने साले अमित का अंतिम संस्कार किया।

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सोनू अलग और राजेंद्र - फोटो : अमर उजाला

सोनू अलग ने कोरोना में 29 अप्रैल को पहले अपने भाई अमित जायसवाल की अंतिम विदाई को देखा। अभी गम से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि 10 मई को उनकी मां राजमकल ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। परिवार में सिर्फ मां और बेटे ही थे। मां की अंतिम विदाई पर जब मां राजकमल का शव श्मशान घाट पहुंचा, तब मुखाग्नि देने के लिए कोई नहीं था। हिंदू रीती-रिवाज के अनुसार दामाद मुखाग्नि नहीं दे सकते थे। इसलिए राजकमल की बेटी सोनू अलग ने अपनी मां को मुखाग्नि दी। 

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कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

जीजा ने निभाया भाई का फर्ज
कोरोना काल में जब लोग एक-दूसरे से दूरी बना रहे थे, उस समय सोनू के पति राजेंद्र अलग ने वो सभी काम किए, जो एक भाई अपने दूसरे भाई के लिए करता है। दस मई को सोनू के भाई अमित जयसवाल का भी निधन हो गया। श्मशान घाट पर जब दाह संस्कार की बात चली, तो राजेंद्र ने उन्हें मुखाग्नि दी। राजेंद्र बताते हैं कि आगरा में अस्पताल खाली नहीं होने के कारण मथुरा के नयति अस्पताल में सास और साले को भर्ती कराया था। 
 

ये भी पढ़ें- अपनों के खोने का दर्द: कोरोना ने छीन लीं परिवारों की खुशियां, घर के मुखिया का निधन, आर्थिक संकट में परिवार
 

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