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फादर्स डे: वे नहीं हैं पर उनका हौसला साथ है...अपनों की यादों से जीवन में आगे बढ़ने हिम्मत ले रहे लोग, पढ़िए इनकी कहानी

Sun, 20 Jun 2021 01:28 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sun, 20 Jun 2021 01:28 PM IST
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Father's Day 2021: Son Lost Father In Corona Virus Read Story
फादर्स डे 2021: कोरोना संक्रमण काल में खोए पिता - फोटो : अमर उजाला

पिता महज एक रिश्ता नहीं है...यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के बीच का ऐसा मजबूत पुल है, जिससे कई बाधाओं, मुश्किलों और चुनौतियों से आसानी से पार पाया जा सकता है। पिता ऐसा हौसला है जो संतानों की धमनियों में ताउम्र दौड़ता रहता है...। इस बार का फादर्स डे कोरोना के भयावह दौर में आया है। इस दौरान कई ने अपने पिता को खोया है तो कई पिताओं का अपने बच्चों से असमय साथ छूट गया है। अमर उजाला ने ऐसे लोगों से बात की जिनके पिता इस महामारी में छिन गए लेकिन उनका हौसला, उनकी सीख आज उनकी बड़ी पूंजी है। साथ ही, ऐसे पिता भी हैं जिन्होंने बुढ़ापे की लाठी को भले खो दिया है लेकिन वे अपने बच्चों के सपनों को जीना चाहते हैं और उनकी याद में नई पीढ़ी को गढ़ना चाहते हैं। अगली स्लाइड में इनकी पूरी कहानी...

Father's Day 2021: Son Lost Father In Corona Virus Read Story
फादर्स डे: पिता डॉ. आरएस कपूर के साथ शुभम कपूर - फोटो : अमर उजाला
पिता की नसीहत ने बदल दी मेरी जिंदगी

पिता (डॉ. आरएस कपूर) ने हमेशा मेरा साथ दिया। अक्सर बेटा पिता के सपने को पूरा करता है लेकिन मेरे मामले में पिता ने मेरे सपने को पूरा करने के लिए साथ दिया। पिता बाल रोग विशेषज्ञ थे, मुझसे भी डॉक्टर बनने की अपेक्षा रखते थे। मैं एमबीए करना चाहता था, उन्होंने मेरी इच्छा का सम्मान रखा। बोले, अच्छी बात है कि तुम मन की बात सुन रहे हो। कभी किसी का दिल मत दुखाना तो तुम निश्चित ही किसी भी पेशे में तरक्की करोगे। कोरोना काल में पिता को खो दिया लेकिन उनकी नसीहत जीवन का सूत्र बन गई है। मैं विप्रो में ऊंचे ओहदे पर हूं, उनकी ही बदौलत। 

जरूरतमंदों में करूंगा सहयोग
शुभम कपूर का कहना है कि पिता जरूरतमंदों पर रुपये न होने पर भी बच्चों का इलाज करते थे। मैं उनके इस कार्य को आगे बढ़ाऊंगा। उनकी स्मृति में बच्चों का स्वास्थ्य शिविर लगवाया करूंगा।

Father's Day 2021: Son Lost Father In Corona Virus Read Story
फादर्स डे: रीतेश बबानी, स्व. ईश्वर दास बबानी के पुत्र - फोटो : अमर उजाला
पापा की यादें मेरी हिम्मत बढ़ा देती हैं (रीतेश बबानी, स्व. ईश्वर दास बबानी के पुत्र)

हमारी किराने की दुकान है। पापा दुकान चलाने के साथ धर्मकर्म के काम में हमेशा आगे रहते थे। दुकान पर कोई मांगने आता तो उसे कुछ न कुछ देते। मैंने धर्मपरायणता उनसे ही सीखी। कंचन गार्ड, कहरई मोड़ पर घर में सुबह भजन गूंजने लगते थे, पापा के जाने के बाद भी ऐसा ही है। उन्होंने मुझे पूजा करने के लिए प्रेरित किया। पापा का 1 मई को कोरोना से निधन हो गया। उनके जाने के बाद परेशान हुआ लेकिन उनकी कही बातें याद आईं तो हिम्मत मिली। मजबूत बनकर उभरा। ध्येय है कि अपने भाई, बहन और मां की जिम्मेदारी को ठीक उसी तरह संभालूंगा जैसे मेरे पिता संभालते थे।

जरूरतमंदों की सहायता करूंगा
दूसरों की सहायता करने को जो संस्कार पिता ने मुझे दिए, वह मेरी मजबूती का आधार हैं। मैं उनके समान जरूरतमंदों की सहायता करूंगा।
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Father's Day 2021: Son Lost Father In Corona Virus Read Story
फादर्स डे: पिता दीपक गुप्ता के साथ मनी सजनानी - फोटो : अमर उजाला

मैं पापा की मौत पर काफी टूट गया था। लेकिन मेरे पापा का एक वचन जब भी मुझे याद आता है, तो मुझे नई ऊर्जा मिलती है। यह कहना है बिचपुरी के रहने वाले मनी सजनानी का। मनी बीबीए अंतिम वर्ष के छात्र हैं। मनी के पिता दीपक कुमार प्रॉपर्टी डीलर थे। मनी कहते हैं कि उनके  पिता हमेशा उन्हे कर्मवीर बनने की बात कहते थे। वह कहते थे कि सच्चे कर्मवीर को उसकी मंजिल एक दिन जरूर मिलती है। हार मानना मेरे पिता की आदत में नहीं था। उनके पद चिह्नों पर चलने की मैं भी कोशिश कर रहा हूं। मेरे पापा के लिए मेरी सच्ची श्रद्धांजलि सिर्फ यही है कि मै भी कभी हार नहीं मानूंगा। ईमानदारी के साथ निरंत अपने पथ पर आगे बढ़ूंगा। अपने पिता की उस जिम्मेदारी को वैसे ही निभाने का मैने संकल्प लिया है जैसे पपा निभाते थे। मेरी खुद से संकल्प है कि मै अपनी मां और भाई के गम को अपनी कोशिशों से दूर कर सकूं। 
 
सूत्र: कर्मवीर बनने की पापा की दी गई सीख मेरे जीवन का मूलमंत्र बन चुकी है।   

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Father's Day 2021: Son Lost Father In Corona Virus Read Story
फादर्स डे: हर्दिक गुप्ता, स्व. ओपी गुप्ता के पुत्र - फोटो : अमर उजाला
पापा ने सिखाया, ईमानदार व्यक्ति झुकता नहीं (हर्दिक गुप्ता (11वीं के छात्र), स्व. ओपी गुप्ता के पुत्र)
मैं अपने पापा को जीवन का आदर्श मानता हूं। उन्होंने मुझे बताया कि ईमानदार व्यक्ति कभी झुकता नहीं है। सच बोलने की ताकत दी।  हम शास्त्रीपुरम के वैभव स्टेट में रहते हैं। पापा रेलवे में कार्यरत थे। कोरोना की दूसरी लहर में 25 अप्रैल को काल के हाथों ने उनको हमसे छीन लिया। पापा भले चले गए हैं लेकिन उनकी यादें मुझे जिंदगी में निरंतर आगे बढ़ने का हौसला देती हैं। उनके दिए संस्कार मेरे जीवन की अनमोल पूंजी हैं। तस्वीर देख आंखें नम हो जाती हैं लेकिन हिम्मत भी मिलती है।

सभी जिम्मेदारी निभाऊंगा
पापा ने खुद से ईमानदारी को सिखाया है। मैं उनके समान परिवार की सभी जिम्मेदारियों को निभाऊंगा। जिंदगी में जीतना है मुझे।

 
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