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ब्रज की होली का हिस्सा बना चरकुला नृत्य: राधारानी के जन्म से जुड़ी है अनूठी कला, देखने वाले रह जाते हैं दंग

संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 05 Mar 2022 05:46 PM IST
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Holi 2022 Women perform Charkula dance on Holi in Mathura
चरकुला नृत्य करती ब्रज की कलाकार - फोटो : अमर उजाला

मथुरा के राधाकुंड में राधारानी की ननिहाल गांव मुखराई से शुरू हुआ चरकुला नृत्य अब ब्रज की होली का हिस्सा बन चुका है। ब्रज में जहां भी होली महोत्सव का आयोजन होता है, वहां चरकुला नृत्य का आयोजन देखने को मिलता है। चाहे मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि की होली हो या बरसाना की लठामार होली। चरकुला नृत्य के बिना होली का कार्यक्रम अधूरा सा दिखाई देता है। 



होली के दूसरे दिन गांव मुखराई में ग्रामीण महिलाओं द्वारा 108 जलते दीपकों के साथ चरकुला नृत्य की परंपरा होती है। इस बार भी चरकुला नृत्य को लेकर महिलाएं तैयारियों में जुट गई हैं। इस अनूठी परंपरा का ब्रज की माटी से ही नहीं सात समुद्र पार तक आकर्षण बना हुआ है। ब्रज के कलाकारों द्वारा थाईलैंड, रूस, लंदन, इटली, इंडोनेशिया, श्रीलंका आदि देशों में चरकुला नृत्य का आयोजन किया जा चुका है। 

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Holi 2022 Women perform Charkula dance on Holi in Mathura
बरसाना का राधारानी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
चरकुला नृत्य की कला राधारानी के जन्म से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्र मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी को पिता वृषभानु और माता कीरत का आंगन आदि शक्ति राधारानी की किलकारियों से गूंज उठा था, जब यह बात राधारानी की नानी मुखरा देवी ने सुनी तो वह बहुत खुश हुईं।
 
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108 जलते दीपक सिर पर रखकर किया जाता है नृत्य - फोटो : अमर उजाला
राधारानी के जन्म की खुशी में उनकी नानी मुखरा देवी ने आंगन में रखे गाड़ी के पहिये पर 108 दीपक जलाकर सिर पर रखकर नृत्य किया। इसी को चरकुला नृत्य कहा गया। होली के दूसरे दिन गांव मुखराई में ग्रामीण महिलाओं द्वारा 108 जलते दीपकों के साथ चरकुला नृत्य की परंपरा होती है। इस बार चरकुला नृत्य को लेकर महिलाएं तैयारियों में जुट गई हैं। 
Holi 2022 Women perform Charkula dance on Holi in Mathura
चरकुला नृत्य करतीं ब्रज की कलाकार (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

प्यारेलाल ने दिया चरकुला को नया रूप

1845 में गांव के प्यारे लाल ने चरकुला को नया रूप दिया। लकड़ी का घेरा लोहे के थाल, लोहे की पत्ती और मिट्टी के 108 दीपक रख 5 मंजिला चरकुला बनाया गया। महिलाओं द्वारा 108 जलते दीपकों के साथ चरकुला को सिर पर रख मदन मोहन जी के मंदिर के निकट चरकुला नृत्य किया जाता है। वर्ष 1930 से 1980 तक यह नृत्य लक्ष्मी देवी, अशर्फी देवी ने किया। पूर्व में इसका वजन 60 किलोग्राम था। वर्तमान में इसका वजन 40 किलोग्राम है। 
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चरकुला नृत्य करती ब्रज की कलाकार - फोटो : अमर उजाला

1980 के बाद गांव से बाहर होने लगे आयोजन 

प्यारे लाल ने बताया कि 1980 से पहले चरकुला नृत्य गांव की सीमा से बाहर नहीं गया था। बदलती सोच और समय के अनुसार सबसे पहले चरकुला नृत्य का आयोजन श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा में किया गया। इसके बाद प्यारे लाल चरकुला नृत्य के लिए लक्ष्मी देवी के साथ मॉरीशस गए। इसके बाद ब्रज के साथ-साथ विदेशों में भी चरकुला नृत्य की लोकप्रियता बढ़ती गई। 

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