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ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में बिखरे आस्था के रंग, गुलाल से सरोबार हुए श्रद्धालु, देखें तस्वीरें
Thu, 25 Mar 2021 08:13 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 25 Mar 2021 08:13 AM IST
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रंगभरनी एकादशी पर बांकेबिहारी मंदिर में होली खेलते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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रंगभरनी एकादशी पर मथुरा के वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी ने भक्तों के संग होली खेली। रंगभरनी एकादशी दो दिवसीय होने के कारण श्रीबांकेबिहारी मंदिर में रंगों की होली बुधवार से ही शुरू हो गई। होली पांच दिन तक हर रोज सुबह से दोपहर दो बजे तक चलेगी। बुधवार को मंदिर प्रशासन ने पहले से ही पूरी तैयारी कर ली थीं। सुबह वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर में एकादशी के अवसर पर श्रद्धालु गुलाल में सराबोर होते हुए दिखे।
बांकेबिहारी मंदिर में होली के दौरान भक्त
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि रंगभरनी एकादशी इस बार 24 और 25 मार्च को है। इस दिन से वृंदावन के मंदिरों में रंग-गुलाल की होली शुरू हो जाती है। बुधवार को श्रीबांकेबिहारी मंदिर में रंगों की होली शुरू हो गई। सुबह शृंगार आरती और राजभोग की सेवा के बाद ठाकुरजी भक्तों के साथ रंगों की होली खेली।
बांकेबिहारी मंदिर में होली के दौरान साधु
- फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि परंपरा के अनुसार, श्रीबांकेबिहारी मंदिर में रंग की होली रंगभरनी एकादशी से शुरू होती है। इसी परंपरा के तहत बुधवार को रंगों की होली खेली गई। यह दौर लगातार पांच दिन तक चलेगा। हालांकि पहले दिन सुबह के समय गुलाल की होली हुई और शाम को फूलों क होली।
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रंग भरनी एकादशी पर बांके बिहारी मंदिर में होली खेलते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
ठाकुर जी के लिए टेसू के फूलों का रंग
होली पर ठाकुर श्री बांकेबिहारी के लिए खास रंग तैयार किया गया। अपने आराध्य के लिए सेवायतों ने टेसू के फूलों से रंग तैयार किया है। इसमें केसर और फिटकरी का उपयोग किया गया है। टेसू के फूल और केसर अलग-अलग स्थानों से मंगाए गए हैं। श्रीनाथ गोस्वामी बताते हैं कि ठाकुरजी को ध्यान में रखते हुए रंग तैयार किया जा जाता है। टेसू के फूलों का यही रंग भक्तों पर डाला जाता है। विगत दो दिन से रंग बनाने का काम चल रहा था।
होली पर ठाकुर श्री बांकेबिहारी के लिए खास रंग तैयार किया गया। अपने आराध्य के लिए सेवायतों ने टेसू के फूलों से रंग तैयार किया है। इसमें केसर और फिटकरी का उपयोग किया गया है। टेसू के फूल और केसर अलग-अलग स्थानों से मंगाए गए हैं। श्रीनाथ गोस्वामी बताते हैं कि ठाकुरजी को ध्यान में रखते हुए रंग तैयार किया जा जाता है। टेसू के फूलों का यही रंग भक्तों पर डाला जाता है। विगत दो दिन से रंग बनाने का काम चल रहा था।
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बांकेबिहारी मंदिर में पहुंचे भक्त
- फोटो : अमर उजाला
संतों की वृंदावन परिक्रमा
रंगभरनी एकादशी पर 25 मार्च को वृंदावन कुंभ में आए साधु-संत और कान्हा के भक्त वृंदावन की परिक्रमा करेंगे। इसके मद्देनजर श्री बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र के साथ परिक्रमा मार्ग में अतिक्रमण हटाने का काम मंगलवार को जारी रहा। कोतवाल अरुण कुमार के नेतृत्व में विद्यापीठ चौराहा और आसपास अतिक्रमण हटाया गया।
रंगभरनी एकादशी पर 25 मार्च को वृंदावन कुंभ में आए साधु-संत और कान्हा के भक्त वृंदावन की परिक्रमा करेंगे। इसके मद्देनजर श्री बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र के साथ परिक्रमा मार्ग में अतिक्रमण हटाने का काम मंगलवार को जारी रहा। कोतवाल अरुण कुमार के नेतृत्व में विद्यापीठ चौराहा और आसपास अतिक्रमण हटाया गया।