श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में रंगेश्वर महादेव, भूतेश्वर महादेव, पीपलेश्वर और गोकर्णनाथ महादेव नाम से चार प्रमुख शिवालय हैं, जिन्हें ब्रज का कोतवाल कहा जाता है। ये शिव मंदिर मथुरा की चारों दिशाओं में स्थित हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर इन मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। अगली स्लाइड्स में जानिए चारों शिव मंदिरों की महत्ता और इतिहास....
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महाशिवरात्रि: श्रीकृष्ण की नगरी के 'कोतवाल' हैं महादेव, चारों दिशा में हैं प्राचीन शिव मंदिर
Fri, 12 Mar 2021 12:04 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 12 Mar 2021 12:04 AM IST
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भूतेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करते भक्त
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रंगेश्वर महादेव मंदिर, मथुरा।
- फोटो : अमर उजाला
रंगेश्वर महादेव मंदिर जिला अस्पताल के समाने स्थित है। मंदिर के पुजारी सागरनाथ ने बताया कि मामा कंस का वध करने के बाद श्रीकृष्ण और बलराम दोनों भाइयों में इस बात पर विवाद हो गया कि उसे किसने मारा है? दोनों खुद को श्रेष्ठ सिद्ध करने में लगे थे। तभी यह कहते हुए भगवान शिव प्रकट हुए कि रंग है-रंग है, तुम दोनों भाइयों का रंग है। इस पर दोनों में सुलह हो गई। तभी से इस स्थान पर भगवान शिव रंगेश्वर महादेव के रूप में पूजे जाने लगे। महाशिवरात्रि पर सुबह रंगेश्वर बाबा का जलाभिषेक हुआ।
गोकर्णनाथ महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
गोकर्णनाथ महादेव मंदिर
शहर के आकाशवाणी के समीप स्थित गोकर्णनाथ महादेव का वर्णन भगवत गीता में भी मिलता है। गोकर्णेश्वर महादेव के सेवायत मन्नू पंडित ने बताया कि मंदिर में जो व्यक्ति लगातार 40 दिन भगवान को शिव स्त्रोत का पाठ और गन्ने के रस से अभिषेक करता है। बीमारियां उसके पास नहीं आती। मान्यता है कि गोकर्णेश्वर महादेव की पूजा करने से धनलक्ष्मी हमेशा उसके यहां वास करती है। व्यापार उन्नति होती है। बुरी बाधाओं से भक्त से कोसों दूर रहती है।
शहर के आकाशवाणी के समीप स्थित गोकर्णनाथ महादेव का वर्णन भगवत गीता में भी मिलता है। गोकर्णेश्वर महादेव के सेवायत मन्नू पंडित ने बताया कि मंदिर में जो व्यक्ति लगातार 40 दिन भगवान को शिव स्त्रोत का पाठ और गन्ने के रस से अभिषेक करता है। बीमारियां उसके पास नहीं आती। मान्यता है कि गोकर्णेश्वर महादेव की पूजा करने से धनलक्ष्मी हमेशा उसके यहां वास करती है। व्यापार उन्नति होती है। बुरी बाधाओं से भक्त से कोसों दूर रहती है।
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भूतेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
शहर कोतवाल हैं भूतेश्वर महादेव
भूतेश्वर महादेव मंदिर में ऐतिहासिक शिवलिंग एवं पाताल देवी के विग्रह हैं। भूतेश्वर महादेव का शिवलिंग नाग शासकों द्वारा स्थापित किया गया। भूतेश्वर महादेव मथुरा के रक्षक सुप्रसिद्ध चार महादेवों में पश्चिम दिशा के क्षेत्रपाल और शहर कोतवाल माने जाते हैं। भूतेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों की कतार लग गई।
भूतेश्वर महादेव मंदिर में ऐतिहासिक शिवलिंग एवं पाताल देवी के विग्रह हैं। भूतेश्वर महादेव का शिवलिंग नाग शासकों द्वारा स्थापित किया गया। भूतेश्वर महादेव मथुरा के रक्षक सुप्रसिद्ध चार महादेवों में पश्चिम दिशा के क्षेत्रपाल और शहर कोतवाल माने जाते हैं। भूतेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों की कतार लग गई।
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पीपलेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
प्रेतों पर नियंत्रण रखते हैं पीपलेश्वर महादेव
पीपलेश्वर महादेव यमुना नदी के प्रयाग घाट के निकट स्थित हैं। सेवायत नंदलाल चतुर्वेदी ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां के महादेव प्रेतों पर नियंत्रण रखते हैं। इस मंदिर के निकट ही यमुना जी कलकल बहती हैं। यहां के दर्शन करने से सभी कष्टों का समापन हो जाता है। पिपलेश्वर महादेव का नमन करने से शनि की बाधा दूर होती है।
पीपलेश्वर महादेव यमुना नदी के प्रयाग घाट के निकट स्थित हैं। सेवायत नंदलाल चतुर्वेदी ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां के महादेव प्रेतों पर नियंत्रण रखते हैं। इस मंदिर के निकट ही यमुना जी कलकल बहती हैं। यहां के दर्शन करने से सभी कष्टों का समापन हो जाता है। पिपलेश्वर महादेव का नमन करने से शनि की बाधा दूर होती है।