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आईईडी ब्लास्ट में जवान शहीद, पत्नी बोलीं- चेक नहीं चाहिए, एक के बदले दस सिर लाए सरकार
Tue, 19 Nov 2019 11:50 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 19 Nov 2019 11:50 AM IST
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वीरनारी को राज्य सरकार की ओर से 25 लाख का चेक देते सांसद राजकुमार चाहर
- फोटो : अमर उजाला
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शहीद संतोष कुमार सिंह के घर सोमवार की रात पहुंचे सांसद राजकुमार चाहर ने राज्य सरकार की ओर से 25 लाख रुपये का चेक जैसे ही शहीद की पत्नी विमला देवी को सौंपा। उन्होंने दो टूक में कहा कि चेक नहीं चाहिए। पति की शहादत का बदला चाहिए। वह यहीं नहीं रूकी, एक के बदले दस को मारे सरकार, जिससे कायराना हरकत करने से पहले पाकिस्तान सौ बार सोचे। किसी और का सुहाग उजाड़ने से पहले आतंकवादियों की रूह तक कांप जाए।
सांसद, डीएम, एसएसपी ने दिया कंधा
- फोटो : अमर उजाला
शहीद की पत्नी की बातें सुनकर सांसद राजकुमार चाहर ने भरोसा दिलाया कि सरकार बदला जरूर लेगी। पाक की बर्बादी का समय नजदीक आ गया है। पाकिस्तान की नापाक हरकत बंद नहीं हुई तो उसका अस्तित्व मिट जाएगा। भाजपा के जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया ने कहा कि पार्टी और सरकार उनके साथ खड़ी है। पाकिस्तान को उसके किए की सजा जरूर मिलेगी।
श्रद्घांजलि देते शहीद के बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
शहीद के तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देखकर अपनी बेटियों दीक्षा, प्रिया के साथ फफक पड़ी विमला देवी ने बताया कि रविवार की सुबह फोन पर बात हुई थी, बेटे को सेना का अफसर बनाने, बेटी प्रिया को डॉक्टर बनाने के लिए रोज स्कूल भेजने की ताकीद दी थी। साथ ही जल्द घर आने का भरोसा भी दिलाया था। पति को खोने का गम है लेकिन गौरव इस बात का कि देश के लिए अपनी जान कुर्बान की।
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शहीद की अंतिम यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
घर से अंतिम संस्कार के लिए तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर लेकर सेना के जवान निकले तो कंधा देने के लिए पहले डीएम एनजी रवि कुमार और सांसद राजकुमार चाहर आगे आए। इसके बाद भाजपा के जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया, संतोष कटारा, मानवेन्द्र सिंह राठौर आदि ने कंधा दिया। अंतिम यात्रा में शामिल होने से शहीद की बेटियां दीक्षा और प्रिया खुद को नहीं रोक पाईं। शव यात्रा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगाए। सेना ने सलामी दी तो भावुक होकर अपने शहीद पिता को हाथ जोड़कर अंतिम विदाई दी। दोनों बेटियां बोलीं कि पिता की शहादत पर उन्हें गर्व है। लेकिन सरकार उनकी कुर्बानी का बदला सौ आतंकियों को मारकर ले। यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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संतोष कुमार सिंह का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
एलओसी पर शहीद हुए पुरा भदौरिया गांव के हवलदार संतोष कुमार सिंह का परिवार हमेशा से देशसेवा करता रहा है। भतीजे की कुर्बानी से घरवालों का सीना 56 इंच का हो गया है। उसके चाचा हवलदार जय सिंह भदौरिया ने 1971 की जंग लड़ी थी। 1986 में रिटायर्ड हुए जय सिंह भदौरिया ने बताया कि संतोष कुमार सिंह के बलिदान ने परिवार और देश का गौरव बढ़ाया है। पारिवारिक चाचा हवलदार कलियान सिंह 1999 में कारगिल जंग लडे़ थे। भतीजे संतोष कुमार सिंह के बलिदान को लेकर वह बोले, कई बार पिटने के बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा भतीजे के बलिदान परिवार के लिए गम के साथ गौरव की बात भी है। 2004 में रिटायर्ड हुए कलियान सिंह ने कहा कि संतोष का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का काम करेगा। उसके बलिदान ने उनका सीना 56 इंच कर दिया है।