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नगर निगम की अंधेरगर्दी: 17 करोड़ स्मार्ट बनने पर खर्च, निगरानी फिर भी फेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 15 Jan 2020 03:35 PM IST
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आगरा नगर निगम
नगर निगम एक तरफ पैसे की तंगी से जूझ रहा है, लेकिन दूसरी तरफ 17 करोड़ रुपये कूड़ा निस्तारण के सिस्टम पर निगरानी के नाम पर खर्च कर दिए गए। हैरतअंगेज पहलू ये है कि इसके बाद भी न तो सफाई व्यवस्था पर निगरानी ही रखी जा सकी है और न ही डीजल की चोरी पर प्रभावी रोक लग सकी है। स्मार्ट निगरानी के नाम पर अनाप शनाप तरीके से कई गुना दाम पर महंगा सामान खरीदने का आरोप भी नगर निगम पर लग रहा है।
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रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग को रीडर के जरिए स्कैन करने की प्रक्रिया समझाते हुए पर्यावरण अभियंता राजीव राठी
- फोटो : अमर उजाला
डस्टबिन 75 फीसदी भर जाने पर सेंसर के जरिए मैसेज आ जाएगा। घर से कूड़ा उठा या नहीं, घर के मालिक पर मैसेज आ जाएगा। कूड़ा ले जाने वाला ट्रक कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर पहुंच गया। यह तीनों ही दावे नगर निगम के अधिकारियों ने स्मार्ट निगरानी के नाम पर किए थे। कूड़ा ले जाने वाले ट्रकों पर जीपीएस भी लगवाया गया। हर ट्रक पर 13 हजार रुपये की लागत से जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लगा, लेकिन अब ज्यादातर ट्रकों पर यह है ही नहीं। जिन ट्रकों पर लगे हैं, उनकी मॉनीटरिंग का कोई नेटवर्क ही नहीं।
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घरों पर लगाए गए क्यूआर कोड
- फोटो : अमर उजाला
कुछ ऐसा ही हाल घरों पर लगाए गए क्यूआर कोड का है। डोर-टू-डोर कंपनियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित स्कैनर दिए गए थे, लेकिन यह 2 से ढाई हजार घरों को ही स्कैन कर पाई। अक्तूबर में कंपनी के कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई थी, लेकिन दिसंबर तक दस फीसदी घर भी स्कैन नहीं हो पाए। उल्टे कई कर्मचारियों ने स्कैनर को ही तोड़ने और खराब करने की कोशिश की। स्मार्ट सिटी के इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर पर इसकी रिपोर्ट आती रही
नगर निगम अागरा
- फोटो : अमर उजाला
कूड़ा ले जाने वाले वाहनों पर पहले भी जीपीएस लगाया गया था, लेकिन 15 दिन में ही हटा दिए गए। मॉनीटरिंग के नाम पर जनता के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है और गड़बड़ियां भी रुक नहीं रहीं - रवि बिहारी माथुर, पार्षद
डोर-टू-डोर कू ड़ा ही नहीं उठ रहा तो क्यूआर कोड कैसे स्कैन होगा। पहले भी नहीं हुआ और अब भी नहीं हो रहा। हर बार टेक्नोलॉजी के नाम पर पैसा बर्बाद होता है, पर निगम में डीजल चोरी, अन्य गड़बड़ियों पर रोक नहीं लग पा रही। - राकेश जैन, पार्षद
डोर-टू-डोर कू ड़ा ही नहीं उठ रहा तो क्यूआर कोड कैसे स्कैन होगा। पहले भी नहीं हुआ और अब भी नहीं हो रहा। हर बार टेक्नोलॉजी के नाम पर पैसा बर्बाद होता है, पर निगम में डीजल चोरी, अन्य गड़बड़ियों पर रोक नहीं लग पा रही। - राकेश जैन, पार्षद
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अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
- फोटो : अमर उजाला
घरों से कूड़ा न उठाने, कुबेरपुर न ले जाने की, डस्टबिन भर जाने की शिकायतों पर तकनीक के जरिए निगरानी रखने के लिए यह कोशिश की जा रही है। इसमें कुछ समय लगेगा। डोर टू डोर कंपनियों का करार निरस्त होने के बाद हमारे कर्मचारियों को ट्रेनिंग देनी होगी, तब वह महंगी डिवाइस चला पाएंगे। तकनीक के जरिए ही हम कमजोरियों को पकड़ पाएंगे, लेकिन इसमें कुछ समय जरूर लगेगा - अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त

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