शारदीय नवरात्र गुरुवार को चित्रा नक्षत्र से प्रारंभ हो गए हैं। नवरात्र में भौम आदित्य योग, गजकेसरी योग, श्रीवत्स योग और केदार योग होने से भक्तों को आराधना करने से अति शुभ फल प्राप्त होंगे। माता महिषासुर मर्दिनी इस बार डोली पर सवार होकर आएंगी और हाथी पर विदाई होगी। यह सौभाग्य सूचक है। सभी मंगल कार्य बनेंगे और भारतवर्ष में सभी लोगों को उन्नति, वैभव और आयु प्राप्त होगी। ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि इस बार तृतीया व चतुर्थी तिथि के शनिवार को होने के कारण नवरात्र आठ दिन के होंगे। नवरात्र के शुभारंभ पर सूर्य, मंगल, बुध, कन्या राशि में और चंद्रमा तुला राशि में गोचर करेंगे। गुरुवार को प्रारंभ होने से आध्यात्मिक उन्नति, साहस, मान-सम्मान, संतोष एवं विजय प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि नवरात्र में दिव्य शक्ति का प्रादुर्भाव होता है। इसलिए इन दिनों में आद्या शक्ति की उपासना या आराधना का विशेष महत्व है। नव शक्तियां मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री एक महाशक्ति का रूप धारण करती हैं, उसे ही नवरात्र कहा जाता है।
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शरदीय नवरात्र 2021: मंगलकारी-उन्नति देने वाला योग, लगाएं ये भोग, जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
Thu, 07 Oct 2021 12:00 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 07 Oct 2021 12:00 AM IST
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मां दुर्गा
- फोटो : अमर उजाला
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शारदीय नवरात्रि 2021
- फोटो : अमर उजाला
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
प्रात: काल सूर्योदय से लेकर दोपहर 1:30 बजे तक
प्रात: काल सूर्योदय से लेकर दोपहर 1:30 बजे तक
पूजा विधि-विधान
प्रात: काल मां की अष्टभुजी प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें। मां को वस्त्र, आभूषणों से सजाकर केसर, चंदन से से शृंगार करें। पुष्पमाला पहनाएं। चौकी के आगे एक कलश स्थापित करें और उसमें वरुण देवता का आह्वान करें। मिट्टी के बर्तन में जौ को बोएं। फल, नैवेद्य, दूध, मिष्ठान्न का भोग लगाएं एवं धूप, दीप से आरती करें।
नवरात्रि पूजा
- फोटो : अमर उजाला
ये भोग लगाएं
प्रथम दिन फल, पीली बर्फी का भोग
दूसरे दिन दूध, दही एवं सफेद बर्फी और फल।
तीसरे दिन अन्नकूट के बने फलाहार।
चौथे दिन केला और मालपुए।
पांचवें दिन फल और मखाने की खीर।
प्रथम दिन फल, पीली बर्फी का भोग
दूसरे दिन दूध, दही एवं सफेद बर्फी और फल।
तीसरे दिन अन्नकूट के बने फलाहार।
चौथे दिन केला और मालपुए।
पांचवें दिन फल और मखाने की खीर।
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शारदीय नवरात्रि
- फोटो : Rohit Jha
कालरात्रि स्वरूप को शहद, फल और दूध का भोग।
सप्तम दिन गुड़, सिंघाड़े के आटे के बने हुए नैवेद्य और फल।
आठवें दिन नारियल, हलवा पूरी और चने का भोग।
नवमी को हलवा पूरी, चना, मेवा, फल।
सप्तम दिन गुड़, सिंघाड़े के आटे के बने हुए नैवेद्य और फल।
आठवें दिन नारियल, हलवा पूरी और चने का भोग।
नवमी को हलवा पूरी, चना, मेवा, फल।
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कन्या पूजन (फाइल फोटो)
उद्यापन में करें कन्या पूजन
शास्त्र अनुसार व्रत के उद्यापन पर मां भगवती की शुभ विदाई के समय 2 से 10 वर्ष की कन्याओं का पूजन करने का विधान है। पूजन के उपरांत कन्याओं को भेंट स्वरूप दक्षिणा भी प्रदान करनी चाहिए। उस दिन आपको मां की प्रसन्नता के लिए मां के मंत्रों से हवन करना चाहिए।
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