रविवार को गंगा दशहरा है। आस्था व परंपरा के तहत श्रद्धालु यमुना के घाटों पर आएंगे, लेकिन कालिंदी की स्थिति जार-जार है। यमुना नदी प्रदूषण से कराह रही है। घाटों पर गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। यमुना बोल सकती तो कहती इन परंपराओं से पहले मेरी सुध लो, मुझे गंदगी से उबारो, स्वच्छ बनाकर रखो। यही मेरे प्रति आस्था होगी। गंगा दशहरा पर मुझे साफ करने का प्रण लो। गंगा दशहरा से पहले अमर उजाला ने आगरा के तीन प्रमुख घाटों पर स्थिति की पड़ताल की। कैलाश घाट से लेकर ताजमहल के दशहरा घाट तक यमुना का पानी न नहाने लायक है और न ही सिंचाई लायक। शहर के 91 नाले यमुना नदी में गिरकर उसे प्रदूषित कर रहे हैं। 280 एमएलडी सीवर में से केवल 160 एमएलडी सीवर ही ट्रीटमेंट के लिए पहुंच रहा है। बाकी सीवर यमुना नदी को मैला कर रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यमुना जल की स्थिति की रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कैलाश घाट के मुकाबले ताजमहल के पीछे दशहरा घाट पर तीन गुना ज्यादा प्रदूषण है।
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अमर उजाला पड़ताल: प्रदूषण से कराह रही यमुना, घाटों पर लगा गंदगी का अंबार, कब होगा उद्धार?
Sat, 19 Jun 2021 03:05 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 19 Jun 2021 03:05 PM IST
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ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
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ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
धवल ताज के सामने दशहरा घाट पर बिखरी गंदगी
ताजमहल के पार्श्व में स्थित दशहरा घाट से ताज का व्यू देखने रोजाना सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। यहां पर यमुना का किनारा गंदगी से पटा पड़ा हुआ है। दूर तक पॉलिथीन, पूजा सामग्री पड़ी है। यमुना में बहाई गई गंदगी बिखरी है। किनारे पर यमुना का पानी इतना मैला है कि नहाना तो दूर आचमन के लिए हिम्मत जुटानी होगी।
ताजमहल के पार्श्व में स्थित दशहरा घाट से ताज का व्यू देखने रोजाना सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। यहां पर यमुना का किनारा गंदगी से पटा पड़ा हुआ है। दूर तक पॉलिथीन, पूजा सामग्री पड़ी है। यमुना में बहाई गई गंदगी बिखरी है। किनारे पर यमुना का पानी इतना मैला है कि नहाना तो दूर आचमन के लिए हिम्मत जुटानी होगी।
आगरा: बल्केश्वर घाट पर यमुना में गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
मुख्य धारा 500 मीटर दूर पहुंची
बल्केश्वर घाट पर अंतिम संस्कार के बाद मृतकों के कपड़े, मिट्टी के बर्तन आदि हटाए नहीं गए हैं। किनारे पर 500 मीटर तक नदी की मुख्य धारा तक पहुंचना संभव नहीं है। समाजसेवी उमेश अग्रवाल का कहना है कि यमुना के घाट पर स्वयंसेवी संगठन भले ही साफ-सफाई करा दें लेकिन नगर निगम यहां से कूड़ा तक नहीं उठवाता है।
बल्केश्वर घाट पर अंतिम संस्कार के बाद मृतकों के कपड़े, मिट्टी के बर्तन आदि हटाए नहीं गए हैं। किनारे पर 500 मीटर तक नदी की मुख्य धारा तक पहुंचना संभव नहीं है। समाजसेवी उमेश अग्रवाल का कहना है कि यमुना के घाट पर स्वयंसेवी संगठन भले ही साफ-सफाई करा दें लेकिन नगर निगम यहां से कूड़ा तक नहीं उठवाता है।
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ताजमहल के पीछे यमुना में गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
मूर्तियों के अवशेष पड़े, गड्ढों में कूड़ा
यमुना किनारा रोड स्थित हाथी घाट भी बदहाल है। यहां गंदगी, कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। यमुना में कपड़ा धोकर गंदगी बहाई जा रही है। पशुपालकों की भैंसें किनारे पर बैठी हैं। मूर्ति विसर्जन के लिए खोदे गए गड्ढों को साफ नहीं किया गया। उनमें अवशेष और गंदगी भरी पड़ी है।
यमुना किनारा रोड स्थित हाथी घाट भी बदहाल है। यहां गंदगी, कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। यमुना में कपड़ा धोकर गंदगी बहाई जा रही है। पशुपालकों की भैंसें किनारे पर बैठी हैं। मूर्ति विसर्जन के लिए खोदे गए गड्ढों को साफ नहीं किया गया। उनमें अवशेष और गंदगी भरी पड़ी है।
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एत्माद्दौला स्मारक के पीछे यमुना
- फोटो : अमर उजाला
गंगाजल प्रोजेक्ट ने बचाई लाज
कैलाश घाट के किनारे पर अन्य घाटों की तुलना में गंदगी भले ही कम है लेकिन यमुना यहां भी साफ नहीं है। कुछ दूरी पर गंगाजल प्रोजेक्ट की पाइपलाइन से आने वाले गंगाजल से पानी का प्रवाह तेज है। इस कारण गंदगी बहकर दूर चली जाती है, लेकिन घाट पर साफ सफाई नहीं है। घाट का पानी अन्य जगह की तुलना में बेहतर है।
कैलाश घाट के किनारे पर अन्य घाटों की तुलना में गंदगी भले ही कम है लेकिन यमुना यहां भी साफ नहीं है। कुछ दूरी पर गंगाजल प्रोजेक्ट की पाइपलाइन से आने वाले गंगाजल से पानी का प्रवाह तेज है। इस कारण गंदगी बहकर दूर चली जाती है, लेकिन घाट पर साफ सफाई नहीं है। घाट का पानी अन्य जगह की तुलना में बेहतर है।