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Agra: काले हिरनों को सियार से बचाकर बब्बर शेर के घर तक पहुंचाना नहीं आसान, दिए गया ये सुझाव

Fri, 24 Jun 2022 01:42 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 24 Jun 2022 01:42 PM IST
सार

विशेषज्ञ बोले काले हिरन का दिल बेहद कमजोर होता है। उन्हें पकड़ने ये ट्रेंकुलाइज करने के प्रयास में हृदयाघात और ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए शिफ्टिंग में बेहद सावधानी की जरूरत है।

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Shifting Blackbuck to Etawah Lion Safari is not easy
सिकंदरा स्मारक में काले हिरन - फोटो : अमर उजाला
बब्बर शेरों के नए घर इटावा लॉयन सफारी के एंटीलोप पार्क में सिकंदरा के 70 से ज्यादा दुर्लभ काले हिरनों को भेजना बेहद मुश्किल भरा है। सिकंदरा स्मारक के हिरनों को पकड़कर लॉयन सफारी भेजने को वन्य जीव विशेषज्ञ व्यवहारिक नहीं मानते। विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें हिरनों की मृत्यु की आशंका ज्यादा है। हिरन बेहद कमजोर ह्रदय के होते हैं। उन्हें पकड़ने या ट्रेंकुलाइज करने के प्रयास में वह ब्रेन हेमरेज से मर जाते हैं। इसलिए शिफ्टिंग में बेहद सावधानी की जरूरत है।


राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट के रिटायर्ड डीएफओ आनंद कुमार के मुताबिक स्पॉटेड डियर हों या ब्लैक बक, दोनों ही बेहद कमजोर हृदय वाले जानवर हैं। इन्हें पकड़ने पर यह बुरी तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और अपने सींगों के साथ सिर पटकते हैं, जिससे ब्रेन हेमरेज की आशंका रहती है। ट्रेंकुलाइज करने पर बेहोश होने से पहले ये तेजी से भागते हैं, जिसमें घायल होते हैं या हृदयाघात के शिकार हो जाते हैं। इसलिए इनकी शिफ्टिंग आसान नहीं है। 
 
Shifting Blackbuck to Etawah Lion Safari is not easy
अकबर टूम में काले हिरन - फोटो : अमर उजाला
वन्य जीव विशेषज्ञ और वाइल्ड लाइफ एसओएस के डॉ. बैजूराज के मुताबिक उन्होंने पांच साल पहले शिफ्टिंग का प्रस्ताव भेजा था, पर उसके लिए धन नहीं मिला। हिरनों को एक-एक करके बेहद सावधानी से भेजा जा सकता है, लेकिन इसमें उनकी मृत्यु की आशंका ज्यादा है, इसलिए शिफ्टिंग आसान नहीं है।
Shifting Blackbuck to Etawah Lion Safari is not easy
सिकंदर स्मारक में हिरन - फोटो : अमर उजाला

ये सुझाए विकल्प

44 साल सेंक्चुअरी में रहे वन्य जीव विशेषज्ञ आनंद कुमार ने शिफ्टिंग की जगह कॉरिडोर बनाकर हिरनों को कीठम या अन्य किसी जंगल भेजने का विकल्प सुझाया है। उन्होंने कहा कि सिकंदरा सुरक्षित जगह है, पर इनकी बढ़ती संख्या रोकने के लिए नर और मादा हिरनों को अलग किया जा सकता है। इससे इनकी संख्या नहीं बढ़ेगी। स्मारक से हटाने के हाईकोर्ट के आदेश पर दूसरा विकल्प ये है कि सिकंदरा से कीठम के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाए, जिससे होकर यह निकल सकें और प्राकृतिक वातावरण में पहुंच जाएं।

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हिरनों के लिए खतरा बने सियार - फोटो : अमर उजाला
बता दें आगरा के सिकंदरा स्थित अकबर के मकबरे में 70 से ज्यादा काले हिरनों की जान खतरे में है। बुधवार सुबह सिकंदरा स्मारक में घूमने गए पर्यटक ने चार सियारों के झुंड का वीडियो रिकॉर्ड कर वायरल कर दिया, जिसके बाद दुर्लभ काले हिरनों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहा है।
 
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अकबर टूम में हिरन - फोटो : अमर उजाला

1905 में आए थे काले हिरन के दो बच्चे

एएसआई के रिटायर्ड वरिष्ठ संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित बताते हैं कि ब्रिटिश काल में अकबर के मकबरे में 1905 में अंग्रेज अफसर काले हिरन के दो बच्चे लेकर आए थे, जिनमें एक नर और एक मादा था। प्रजनन के बाद उनका कुनबा साल दर साल बढ़ता गया। वर्ष 2007 में बीमारी से पहले सिकंदरा में इनकी संख्या 140 से ज्यादा थी। 
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