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UP: ब्रज की भूमि से फिर भरी कारसेवा की हुंकार, जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का शंखनाद; पत्थर गायब होने का भी मचा शोर

Mon, 10 Aug 2026 09:48 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा
अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 10 Aug 2026 09:48 AM IST
सार

अयोध्या के बाद ब्रज की भूमि से फिर कारसेवा की हुंकार भरी है। अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के लिए शंखनाद हुआ। श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए मथुरा-वृंदावन को आंदोलन के लिए मुख्य रणनीति का केंद्र बनाया था।

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Shri Krishna Janmabhoomi call for kar seva rises again from land of Braj After Ayodhya
Shri Krishna Janmabhoomi - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद एक बार दोबारा से श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के लिए ब्रज की भूमि से कारसेवा की हुंकार तेज हो गई है। राधाकुंड के जुलैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ से साधु-संतों ने रविवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के लिए कारसेवा का शंखनाद कर दिया है। 


उधर, राष्ट्रीय हनुमान दल ने भी शाही मस्जिद ईदगाह पर सावन माह के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि जलाभिषेक कारसेवा का एलान किया है। 1983-84 में राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के शुरुआती दौर में मथुरा रणनीतिक का महत्वपूर्ण केंद्र था। श्रीरामलला विराजमान के लिए यहीं से कारसेवा की हुंकार भरी गई थी। 
Shri Krishna Janmabhoomi call for kar seva rises again from land of Braj After Ayodhya
मथुरा की चित्रगुप्त पीठ में श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा के लिए जुटे भक्त - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उस समय आंदोलनकारियों पर प्रशासन की पैनी नजर बनी रहती थी। विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस के नेताओं के जमावड़े पर तुरंत धारा 144 और पुलिस की नाकेबंदी लागू कर दी जाती थी। प्रशासन की सख्ती के चलते नेताओं ने इसका विकल्प तलाशना शुरू कर दिया।
Shri Krishna Janmabhoomi call for kar seva rises again from land of Braj After Ayodhya
मथुरा की चित्रगुप्त पीठ में श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा के लिए जुटे भक्त - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आंदोलन की रूपरेखा को गुप्त रखने और कार्यकर्ताओं को सुरक्षित ढंग से प्रशिक्षित करने के लिए अयोध्या से दूर लेकिन दिल्ली और ब्रज मंडल से सटे क्षेत्र की आवश्यकता महसूस हुई। विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने मथुरा-वृंदावन के धार्मिक वातावरण, स्थानीय पीठों के संतों का समर्थन मिलने और राष्ट्रीय राजधानी से निकटता के कारण ब्रज क्षेत्र को रणनीतिक मुख्यालय के रूप में चुना।

 
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मथुरा की चित्रगुप्त पीठ में श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा के लिए जुटे भक्त - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा में पड़ी बजरंग दल की नींव
अक्तूबर 1984 में सीतामढ़ी से अयोध्या होते हुए लखनऊ तक राम-जानकी रथ यात्रा निकालने की योजना बनाई गई। यात्रा के मार्ग में प्रशासनिक अड़चनों और असामाजिक तत्वों से सुरक्षा की चुनौती खड़ी हो गई। कार्यकर्ताओं को सुरक्षा और गति प्रदान करने के लिए ब्रज क्षेत्र में संघ और विहिप ने एक युवा संगठन खड़ा करने का निर्णय लिया। इसके लिए 8 अक्तूबर 1984 को बजरंग दल के नाम से युवा मोर्चा का गठन किया गया। बजरंग दल के पहले राष्ट्रीय संयोजक विनय कटियार बनाए गए।
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मथुरा की चित्रगुप्त पीठ में श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा के लिए नारे लगाते पीठाधीश्वर सच्चिदानंद महाराज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ब्रज में तैयार हुए कारसेवक
1984 के बाद से ब्रज क्षेत्र रणनीति बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कारसेवकों की खेप तैयार करने में भी अग्रणी रहा। मथुरा और वृंदावन के स्थानीय अखाड़ों और आश्रमों में युवाओं को अनुशासित कारसेवा के लिए संगठित किया गया। पुलिस की घेराबंदी के बाद भी ब्रज से कारसेवक रेल और सड़क मार्ग के बजाय गुप्त व ग्रामीण रास्तों से अयोध्या पहुंचते थे।
 
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