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UP: एसआईटी बनाएं, सेंक्चुअरी में हर 300 मीटर पर लगाएं सीसीटीवी कैमरे; चंबल में बालू माफिया पर शिकंजे की तैयारी

अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 11 May 2026 12:17 PM IST
सार

चंबल नदी में अवैध बालू खनन रोकने के लिए सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में कड़ी सिफारिशें पेश की हैं। रिपोर्ट में हर 300 मीटर पर सीसीटीवी, एसआईटी गठन, विशेष अदालत और सेंक्चुअरी क्षेत्र में पूर्ण प्रतिबंध जैसे सुझाव दिए गए हैं।

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Supreme Court Panel Recommends Strict Action Against Illegal Mining in Chambal
चंबल सेंक्चुअरी - फोटो : अमर उजाला
सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) के सदस्य सीपी गोयल ने दो दिन के निरीक्षण के बाद सुप्रीम कोर्ट में चंबल नदी में हो रहे अवैध बालू खनन पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने सिफारिश की है कि चंबल सेंक्चुअरी में हर 300 मीटर पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना सेंक्चुअरी क्षेत्र की सीमाओं में कोई बदलाव न करें। बालू के अवैध खनन को रोकने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया जाए और मामलों की तत्काल सुनवाई के लिए विशेष अदालत बनाई जाए।


समिति की सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 11 मई को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। कमेटी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को 6 माह के अंदर सेंक्चुअरी क्षेत्र के डीजीपीएस आधारित सर्वेक्षण और सीमांकन के लिए पिलर लगाने की सिफारिश की है। सीईसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अवैध खनन का परिवहन रोकने के लिए इससे जुड़े वाहनों को पेट्रोल-डीजल न दिया जाए। बिना पंजीकरण चल रहे वाहनों को रोकने के लिए सेंक्चुअरी क्षेत्र के जिलों के पेट्रोल पंपों पर सीसीटीवी कैमरे लगाएं। नदी में कचरा फेंकने से रोकने के लिए एनएचएआई पुलों पर जाली लगवाए और खुली जगहों को सील करे ताकि घड़ियाल, मगरमच्छों के पास कचरा न जाए। चंबल नदी में कचरा, मलबा और अन्य सामग्री डालने वालों पर सख्त कार्रवाई करें और जुर्माना लगाएं।


 
Supreme Court Panel Recommends Strict Action Against Illegal Mining in Chambal
चंबल सेंक्चुअरी - फोटो : अमर उजाला
पेयजल छोड़कर सभी योजनाएं रोकें
सीईसी ने कहा कि चंबल नदी में न्यूनतम प्रवाह बनाए रखने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग बेसिन स्तर का आकलन करेगा। इसकी रिपोर्ट आने तक चंबल राष्ट्रीय अभयारण्य के अंदर पेयजल को छोड़कर किसी भी परियोजना को अनुमति नहीं दी जाएगी। यह रिपोर्ट छह महीने के भीतर न्यायालय और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति के सामने प्रस्तुत की जाएगी। अवैध रेत खनन, पर्यावरणीय प्रवाह में कमी और प्रदूषण के कारण घड़ियाल के घोंसले बनाने के स्थलों, कछुओं के आवासों, डॉल्फिन की आवाजाही, तलछट संतुलन, नदी की भू-आकृति विज्ञान और चंबल नदी पारिस्थितिकी तंत्र का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।
 
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चंबल सेंक्चुअरी - फोटो : अमर उजाला
सेंक्चुअरी के खराब हिस्सों को सुधारने की योजना लागू करें
 सीईसी सदस्य चंद्र प्रकाश गोयल ने कोर्ट से सिफारिश की है कि चंबल सेंक्चुअरी के खराब हो चुके हिस्सों को सुधारने के लिए बहाली योजना तैयार कर लागू की जाए। इसमें घोंसला बनाने वाले द्वीपों और रेत के टीलों की बहाली, नदी तट का स्थिरीकरण, अवैध पहुंच मार्गों को बंद करना और लुप्तप्राय जलीय और नदी तटीय प्रजातियों के प्रजनन आवासों की सुरक्षा को मजबूत करना शामिल है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें चंबल सेंक्चुअरी में निगरानी, जीपीएस, प्रवर्तन कार्रवाई, जब्तीकरण, सीवेज उपचार आदि पर हर छह माह में अनुपालन रिपोर्ट सीईसी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेंगी।
 
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चंबल सेंक्चुअरी - फोटो : अमर उजाला
कमेटी की सिफारिशें तार-तार
कमेटी ने रिपोर्ट में कहा कि एनजीटी के आदेश पर बनी संयुक्त समिति की सिफारिशों का पालन होना चाहिए था। कमेटी ने आरटीओ को सेंक्चुअरी क्षेत्र में बालू के अवैध खनन पर वाहनों को जब्त करने और पंजीकरण रद्द करने के निर्देश दिए थे। इन वाहनों को पेट्रोल पंप डीजल-पेट्रोल न दें लेकिन चालान के कदम सतही हैं। खनन रोकने में विफल रहे हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश ने सार्थक कदम नहीं उठाए हैं। ये सभी ट्रैक्टर कृषि कार्य के लिए पंजीकृत हैं लेकिन रेत के परिवहन में शामिल होने पर जुर्माना, रजिस्ट्रेशन रद्द करने जैसे कदम नहीं उठाए गए।

 
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चंबल सेंक्चुअरी में मगरमच्छ और घड़ियाल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अपशिष्ट पदार्थों से जलीय जीवों पर संकट
सीपी गोयल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि निरीक्षण के दौरान चंबल पर बने पुल से भारी मात्रा में कचरा नदी में फेंका जा रहा था। जिस समय कचरा डाला गया, उस दौरान नदी में मगरमच्छ और घड़ियाल व घोंघे मौजूद थे। पुल के खंभों के आधार पर कचरा जमा हो गया है। यह नदी के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और चंबल राष्ट्रीय अभयारण्य के लिए एक गंभीर खतरा है। खनन के कारण पुल के स्तंभों के नीचे और आसपास खनन से गहरी गुफाएं बन गई हैं।
 
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