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UP: चंबल में लौटी जंगल की रौनक, घड़ियालों संग अब सिवेट कैट और दुर्लभ जीवों का सुरक्षित बसेरा; देखें तस्वीरें
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 15 May 2026 09:09 AM IST
सार
कभी डाकुओं और बीहड़ों के लिए बदनाम रही चंबल घाटी अब दुर्लभ वन्यजीवों का सबसे सुरक्षित आशियाना बन चुकी है। घड़ियाल, गंगेटिक डॉल्फिन, इंडियन स्कीमर के साथ अब सिवेट कैट और मॉनिटर लिजर्ड जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
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चंबल में लौटी जंगल की रौनक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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किसी समय डाकुओं और बीहड़ों के लिए पहचानी जाने वाली चंबल की वादियां आज दुर्लभ वन्यजीवों की अठखेलियों से गुलजार हैं। हर साल मई के तीसरे शुक्रवार को मनाए जाने वाले ‘लुप्तप्राय प्रजाति दिवस’ पर चंबल से एक सुखद तस्वीर सामने आई है। चंबल अब केवल घड़ियालों का घर नहीं, बल्कि रहस्यमयी सिवेट कैट (कस्तूरी बिलाव) और मॉनिटर लिजर्ड (विष खापर) जैसे जीवों का भी सबसे सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।
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विलुप्त प्रजाति दिवस: जंगली बिल्ली
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घड़ियालों का कुनबा: 250 से 2938 तक का सफर
दुनिया भर में दुर्लभ हो चुके घड़ियालों के लिए चंबल संजीवनी साबित हुई है। 1981 में जब संरक्षण शुरू हुआ, तब यहां मात्र 250 घड़ियाल थे। आज इनका कुनबा बढ़कर 2938 हो गया है। अब ये जीव नदी के प्राकृतिक वातावरण में खुद ही नेस्टिंग और हैचिंग कर रहे हैं।
दुनिया भर में दुर्लभ हो चुके घड़ियालों के लिए चंबल संजीवनी साबित हुई है। 1981 में जब संरक्षण शुरू हुआ, तब यहां मात्र 250 घड़ियाल थे। आज इनका कुनबा बढ़कर 2938 हो गया है। अब ये जीव नदी के प्राकृतिक वातावरण में खुद ही नेस्टिंग और हैचिंग कर रहे हैं।
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विलुप्त प्रजाति दिवस: विष खापर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गंगेटिक डॉल्फिन और दुर्लभ कछुओं का घर
चंबल का पानी सिर्फ ऊपर से ही नहीं, बल्कि अपनी गहराई में भी जीवन समेटे हुए है। राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन की आबादी एक साल में 111 से बढ़कर 155 हो गई है। गंगा के अलावा कछुओं की साल'' और ढोर प्रजातियां अब केवल चंबल में ही बची हैं, जिनकी संख्या लगभग 5 हजार है।
चंबल का पानी सिर्फ ऊपर से ही नहीं, बल्कि अपनी गहराई में भी जीवन समेटे हुए है। राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन की आबादी एक साल में 111 से बढ़कर 155 हो गई है। गंगा के अलावा कछुओं की साल'' और ढोर प्रजातियां अब केवल चंबल में ही बची हैं, जिनकी संख्या लगभग 5 हजार है।
विलुप्त प्रजाति दिवस: इंडियन स्कीमर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इंडियन स्कीमर का सबसे पसंदीदा ठिकाना
चंबल सफारी अब पक्षी प्रेमियों के लिए दुनिया का बड़ा केंद्र बन रही है। दुर्लभ पक्षी इंडियन स्कीमर की पूरी दुनिया की 80% आबादी अकेले चंबल नदी में निवास करती है। पिछले एक साल में इनकी संख्या 740 से बढ़कर 843 हो गई है।
चंबल सफारी अब पक्षी प्रेमियों के लिए दुनिया का बड़ा केंद्र बन रही है। दुर्लभ पक्षी इंडियन स्कीमर की पूरी दुनिया की 80% आबादी अकेले चंबल नदी में निवास करती है। पिछले एक साल में इनकी संख्या 740 से बढ़कर 843 हो गई है।
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चंबल सेंक्चुअरी
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों की भागीदारी से बना ईको-टूरिज्म हब
बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि इस सफलता के पीछे स्थानीय लोगों का बड़ा हाथ है। वन विभाग ने 60 से ज्यादा वन समितियां बनाई हैं, जो ग्रामीणों को वन्यजीवों के संरक्षण के लिए जागरूक करती हैं। यही कारण है कि बाह रेंज अब एक बड़े ईको-टूरिज्म हब के रूप में उभर रही है।
बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि इस सफलता के पीछे स्थानीय लोगों का बड़ा हाथ है। वन विभाग ने 60 से ज्यादा वन समितियां बनाई हैं, जो ग्रामीणों को वन्यजीवों के संरक्षण के लिए जागरूक करती हैं। यही कारण है कि बाह रेंज अब एक बड़े ईको-टूरिज्म हब के रूप में उभर रही है।