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विश्व प्रवासी पक्षी दिवस: मथुरा में आठ महीने ठहरता है प्रवासी पक्षी फ्लेमिंगो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 08 May 2021 12:15 AM IST
सार
विश्व भर में संकटग्रस्त श्रेणी के प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियानों द्वारा विलुप्त होने से रोकने के लिए विश्व प्रवासी पक्षी दिवस मनाया जाता है।
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जोधपुर झाल में प्रवासी पक्षी फ्लेमिंगो
- फोटो : अमर उजाला
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सुदूर देशों के प्रवासी पक्षियों को मथुरा खूब रास आ रहा है। प्रवासी पक्षियों ने मथुरा में एक दर्जन से अधिक अपने ठिकाने बना लिए हैं। प्रवासी पक्षी ग्रेटर फ्लेमिंगो आठ महीने मथुरा में ठहरता है। सितंबर के अंत में आकर मई के महीने तक इसे मथुरा में 6 स्थानों पर देखा गया है। जोधपुर झाल को प्रवासी पक्षियों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है।
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जोधपुर झाल में पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
बीआरडीएस सोसाइटी के अध्यक्ष एवं पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि अधिकतर पक्षी उत्तर से दक्षिण व कुछ पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर प्रवास करने जाते हैं। इन्हीं पक्षियों को प्रवासी पक्षी कहते हैं। यह प्रतिवर्ष होने वाली स्वाभाविक प्रक्रिया है। सर्दियों के मौसम में मथुरा में प्रवासी पक्षियों का आगमन बड़ी संख्या में होता है। जैसे-जैसे मौसम गर्म होने लगता है, प्रवासी पक्षी वापस अपने देश को लौटने लगते हैं।
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जोधपुर झाल में पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष में दो बार मनाया जाता है विश्व प्रवासी पक्षी दिवस
विश्व भर में संकटग्रस्त श्रेणी के प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियानों द्वारा विलुप्त होने से रोकने के लिए विश्व प्रवासी पक्षी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस साल में दो बार मनाया जाता है। इसे आठ मई एवं अक्तूबर के दूसरे शनिवार को मनाया जाता है।
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जोधपुर झाल में पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
विश्व का सबसे ऊंचाई पर उड़ने वाला पक्षी मथुरा में आता है
बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह के अनुसार बार हेडेड गूज हजारों की संख्या में हिमालय से सर्दियों में उत्तरी व दक्षिणी भारत तक प्रवास करने आते हैं। यह विश्व का सबसे ऊंचाई पर उड़ने वाला पक्षी है, जो 8400 मीटर की ऊंचाई पर भी उड़ सकता है। उड़ने की गति 300 किमी प्रति घंटा तक होती है। इसके खून के हीमोग्लोबिन में एक विशेष एमीनो एसिड होता है। यह एसिड इनके काफी ठंडे स्थानों पर रहने में सहायक होता है। आठ घंटे बिना रुके यह तिब्बत से उड़कर हिमालय की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों को पार कर भारत में आते हैं।
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बार हैडेड गूंज
- फोटो : अमर उजाला
ये पक्षी मार्च के बाद हिमालय की लगभग 8000 मीटर की ऊंचाई को पार कर पुन: अपने देश चले जाते हैं। पक्षियों का अध्ययन करने वाली संस्था बायोडायवर्सिटी द्वारा मथुरा में एकत्रित किए आंकड़ों के अनुसार मथुरा जनपद में यूरोप व मध्य एशियाई देशों के प्रवासी पक्षियों के समूह पहुंचते हैं। मथुरा में साइबेरिया, अलास्का, मंगोलिया, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, रूस, फ्रांस, जर्मनी, तिब्बत सहित मध्य एशिया व यूरोपीय देशों से प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है। फरह एवं वृंदावन में 80 प्रजातियां प्रवासी पक्षियों की हैं।
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