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Time capsule buried in Aligarh Muslim university on Republic Day coming generations will be able to know how studies were done 5 centuries ago
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गणतंत्र दिवस के अवसर पर एएमयू में टाइम कैप्सूल दफन, आने वाली पीढ़ी जान सकेगी पांच शताब्दी पहले कैसे होती थी पढ़ाई
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Tue, 26 Jan 2021 01:12 PM IST
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अलीगढ़ में टाइम कैप्सूल दफन।
- फोटो : अमर उजाला
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गणतंत्र दिवस के अवसर पर आज मंगलवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विक्टोरिया गेट के सामने जमीन के अंदर टाइम कैप्सूल दफन किया गया। शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत चल रहे कार्यक्रमों में यह भी एक प्रोग्राम शामिल था। इसके लिए बकायदा एक कमेटी का गठन किया गया था। जिसने टाइम कैप्सूल के निर्माण और इस में रखी जाने वाली सामग्री के संबंध में व्यापक अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार की। सारा काम कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर की सीधी निगरानी में हुआ।
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अलीगढ़ में टाइम कैप्सूल दफन।
- फोटो : अमर उजाला
इस टाइम कैप्सूल में 1875 में मदरसा शुरू होने से लेकर बाद में कॉलेज और विश्वविद्यालय से लेकर 2020 तक के पूरे सफर का विवरण रखा गया है। इसमें विश्वविद्यालय में अब तक कौन-कौन कुलपति हुए? विश्वविद्यालय के सभी दीक्षांत समारोह का ब्यौरा, सभी मुख्य घटनाओं का ब्यौरा, सभी पद्म पुरस्कार प्राप्त महान व्यक्तियों का विवरण, राष्ट्र के प्रमुखों का संबोधन, विश्वविद्यालय की उपलब्धियां, संग्रहालय आदि सभी का विवरण प्रिंटेड फॉर्म में रखा गया है।
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अलीगढ़ में टाइम कैप्सूल दफन।
- फोटो : अमर उजाला
इस कैप्सूल को 30 फीट जमीन की गहराई में रखा गया है। कैप्सूल को टाइटेनियम मिश्रित इस तरह की धातु से तैयार किया गया है जो 5 शताब्दियों तक खराब नहीं होगी। इस टाइम कैप्सूल में विश्वविद्यालय की सभी फैकेल्टियों, वर्तमान में शिक्षा प्रणाली और अब तक के प्राप्त किए गए ज्ञान को भी रखा गया है। जिससे आने वाली मनुष्य की प्रजाति यह जान सकेगी की 5 शताब्दी पहले किस प्रकार छात्रों को अध्ययन कराया जाता था।
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अलीगढ़ में टाइम कैप्सूल दफन।
- फोटो : अमर उजाला
टाइम कैप्सूल दफन किए जाने का कार्यक्रम कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर द्वारा किया गया। कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू हुआ। कार्यक्रम से पहले विश्वविद्यालय में परंपरागत रूप से होने वाली कुरान ख्वानी का आयोजन किया गया। टाइम कैप्सूल कमेटी के सदस्य डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि यह एक ऐतिहासिक मौका है। हम भविष्य की मनुष्य प्रजाति के लिए एक बहुत बड़ी धरोहर रखी गई है।
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