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गंदगी और कीचड़ के बीच कछार में लौटने लगी जिंदगी, बढ़ा संक्रमण का खतरा

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 14 Aug 2021 10:07 PM IST
सार

  • गंगा-यमुना खतरे के निशान से एक मीटर नीचे,दुर्गंध फैलने से बढ़ी दिक्कत, लोग परेशान

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Life started returning to alluvium amidst dirt and mud, increased risk of infection
prayagraj news : बाढ़ का पानी घटने के बाद मुहल्ले पट गए कचरे से। - फोटो : prayagraj

गंगा-यमुना शनिवार की रात खतरे के निशान से एक मीटर नीचे आ गईं। लेकिन, कछार की बाढ़ प्रभावित करीब एक लाख से अधिक की आबादी के बीच घरों में पानी घटने के साथ ही परेशानियां बढ़ने लगी हैं। जलस्तर घटने के साथ ही लोग अब राहत शिविरों और रिश्तेदारों के यहां से वापसी करने लगे हैं, लेकिन अब गलियों से घरों तक गंदगी और कीचड़ का अंबार लग गया है। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

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Life started returning to alluvium amidst dirt and mud, increased risk of infection
prayagraj news : बाढ़ का पानी कम होने के बाद साफ-सफाई में जुटे लोग। - फोटो : prayagraj

शनिवार की रात आठ बजे फाफामऊ में गंगा खतरे के निशान से एक मीर नीचे आ गई। इसी तरह यमुना 1.21 मीटर नीचे बहने लगी। इससे द्रोपदी घाट से छोटा बघाड़ा के बीच बाढ़ से घिरे हिस्सों में जिंदगी की गाड़ी ढर्रे पर लौटने लगी है।

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Life started returning to alluvium amidst dirt and mud, increased risk of infection
prayagraj news : गंगा यमुना का जलस्तर तेजी से घट रहा है। - फोटो : prayagraj

हालांकि गलियां और मकानों की फर्श कीचड़ से भरी हुई हैं। गलियां बाढ़ के साथ आई जलकुंभी, कचरा, लकड़ी और खर-पतवार से पट गई हैं। सांप,बिच्छू के अलवा अन्य खतरनाक जंतु मंडरा रहे हैं। इस दिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में दिन भर सफाई में लोग पसीना बहाते रहे। घरों में सीलन बरकरार है, इस वजह से अभी भी पहली मंजिल पर ही लोगों की गृहस्थी पड़ी हुई है। गंदगी की वजह से बुखार, दर्द और त्वचा संबंधी संक्रामक बीमारियों का भी खतरा पैदा हो गया है।

Life started returning to alluvium amidst dirt and mud, increased risk of infection
prayagraj news : बाढ़ का पानी कम होने के बाद साफ-सफाई में जुटे लोग। - फोटो : prayagraj

नेवादा का रोशन अपनी पत्नी मुस्कान और दो बच्चों को लेकर सुबह बाढ़ राहत शिविर से अपने घर पहुंचा। रोशन के तीन हजार रुपये प्रतिमाह के किराये के मकान में एक फीट से ऊपर कीचड़ भरा हुआ है। उसने बताया कि बरसाती कीड़ों और मच्छरों की भरमार हो गई है। सांप, बिच्छू भी निकल रहे हैं। ऐसे में अभी घर में रहने लायक नहीं है। इसी तरह बेली कछार के मोइनुद्दीन ने बताया कि पानी घटने के बाद गंदगी और दुर्गंध फैल गई है। अभी तक नगर निगम की ओर से कोई नहीं आया है। यही हाल रहा तो लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आने लगेंगे।

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prayagraj news : बाढ़ का पानी घटने के बाद मुहल्ले पट गए कचरे से। - फोटो : prayagraj

पीने के पानी का संकट, लोग वाटर केन खरीदने के लिए मजबूर
बाढ़ प्रभावित कछार में पीने के पानी का संकट बना हुआ है। नेवादा, अशोर नगर कछार, गंगानगर, बेली कछार में नलों में पानी नहीं आ रहा है। कहीं आ रहा है तो सीवरयुक्त गंदे पानी की दुर्गंध से लोग नाक बंद कर ले रहे हैं। इस वजह से लोगों को वाटर केन खरीदनी पड़ रही है।

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