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दहशत की कहानी: मैं रातभर पेड़ पर मौत का इंतजार करता रहा, यकीन नहीं हो रहा कि जिंदा कैसे हूं...
Tue, 13 Jul 2021 11:14 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 13 Jul 2021 11:14 AM IST
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pilibhit tiger attack
- फोटो : अमर उजाला।
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पीलीभीत जिले के दियोरिया रेंज में रविवार शाम बाघ के हमले की घटना में एकमात्र जीवित बचे विकास उर्फ दिक्षु ने पेड़ पर चढ़कर अपनी जान तो बचा ली। मगर उसके चेहरे पर साथियों की मौत और बाघ का खौफ देखा जा सकता है। सुबह पेड़ से उतरने के बाद वह बोलने की स्थिति में नहीं था। करीब दो बजे के बाद उसने आंखों देखी बताई। रविवार को सुबह 11 बजे गांव के कंधई ने मुझसे कहीं बाहर चलने को कहा। मैं, कंधई और गांव का ही सोनू एक ही बाइक पर सवार होकर निकल पड़े। पहले मैं अपनी एक रिश्तेदारी में गया। उसके बाद शाहजहांपुर के पुवायां क्षेत्र स्थित गांव जलालपुर पहुंचे। यहां कंधई की ससुराल है। कुछ देर मिलना-मिलाना हुआ और शाम होने लगी। हम तीनों अपने गांव दियोरिया के लिए चल दिए। घुंघचाई-दियोरिया मार्ग पर दियोरिया जंगल के पास पहुंचते ही वन चौकी पर एक वनकर्मी ने बाइक को रोककर आगे बाघ होने की बात कही थी। लेकिन हम गांव पहुंचने की जल्दी में आगे बढ़ गए।
pilibhit tiger attack
- फोटो : अमर उजाला।
बाइक जंगल के अंदर करीब 15 मिनट ही चली होगी कि सड़क किनारे दो बाघ बैठे दिखाई दिए। हम लोगों के होश ही उड़ गए। हड़बड़ाहट में बाइक बाघों से कुछ दूरी पर ही रोक दी। इसके बाद संभल पाते कि एक बाघ ने बाइक पर छलांग लगा दी। हम तीनों गिर पड़े।
विलाप करते हुए परिजन
- फोटो : अमर उजाला
बाइक सोनू चला रहा था। मैं सबसे पीछे हेलमेट लगाए बैठा हुआ था। हम लोगों ने भागना शुरू किया। इसी दौरान दूसरे बाघ ने मेरे सिर पर पंजे से वार किया। लेकिन हेलमेट लगा होने के कारण मैं बच गया और भागता रहा।
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जांच करने पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
कुछ ही दूरी पर एक पेड़ पर चढ़ गया। जबकि मेरे दोस्त सोनू और कंधई रोड पर दौड़ रहे थे। इतने में एक बाघ ने सोनू पर हमला कर उसे मार डाला। इसकी मैंने झलक भर देखी।
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मौके पर पुलिस और ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
इसी बीच कंधई भी मौका पाकर एक पेड़ पर चढ़ने लगा कि बाघ ने उसे भी लपककर दबोच लिया। दहशत के कारण मैंने आंखें बंद कर ली। लगा कि मैं भी मार दिया जाऊंगा।