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Terror Attack: 'झगड़ों से दूर रहो... पढ़ाई पर दो ध्यान', बलिदानी सुभाष देते थे युवाओं को ये सलाह
Thu, 25 Jul 2024 12:21 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 25 Jul 2024 12:21 PM IST
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Terror Attack
- फोटो : अमर उजाला
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पुंछ जिले के मेंढर में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की साजिश को नाकाम कर दिया। इसमें सेना के लांस नायक सुभाष चंद्र बलिदान हो गए थे। वह उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के रहने वाले थे। घुसपैठियों के साथ मुठभेड़ के दौरान बलिदान हुए सेना के लांस नायक सुभाष चंद्र को जम्मू के वायुसेना स्टेशन पर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर सैन्य सम्मान के साथ घर भेज दिया है।
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गांव के गोविंद चौधरी ने बताया कि सुभाष गांव में आकर लोगों से घुल-मिल जाता था, छोटे बच्चों पढ़ने के लिए कहता था। रिंकू चौधरी बताते हैं कि वह मुझसे करीब तीन साल छोटा था, हम लोग आपस में बैठकर काफी बातें करते थे, हमने एक अच्छा और निडर दोस्त खो दिया। वह तीसरी बार जम्मू कश्मीर में गया था, मैंने इस बारे में बात की तो उसने कहा कि उसे देश के दुशमनों को मारने में मजा आता है।
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हरेंद्र चौधरी बताते हैं कि वह और मैं मौसेरे भाई है, बहुत ही साहसी था। छुट्टी आने पर रात में खेतों में पानी लगाने अकेला ही चला जाता था। उसके जैसा भाई अब नहीं मिल पाएगा। सब दुखी हैं, पर सब ईश्वर के अधीन है।
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23 जाट बटालियन में तैनात हरेंद्र बताते हैं कि सुभाष उससे दो साल सीनियर थे। वह सहपऊ के एमएल इंटर कॉलेज में कक्षा 12 में पढ़ते थे और मैं कक्षा दस में पढ़ता था। दोनों साइकिल से साथ ही पढ़ने जाते थे। सुबह हम सब एक साथ दौड़ लगाते थे। वह मुझसे एक साल पहले सात जाट बटालियन में भर्ती हो गए थे।
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हाथरस के सहपऊ क्षेत्र के गांव नगला मनी निवासी लांस नायक सुभाष चंद्र के जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में हुए बलिदान पर ग्रामीणों और परिजनों को गर्व है। उनके साथी बताते हैं कि पहली ही मुठभेड़ में सुभाष के हेलमेट में गोली लग गई थी, लेकिन वह घबराए नहीं और उनका देश के प्रति जोश और जुनून कम नहीं हुआ। वह आतंकियों के खिलाफ चलाए कई अभियान में शामिल रहे और उन्हें ढेर किया।