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झांसी अग्निकांड: आए थे दवा कराने... लापरवाही ने निकाला दम; मायूसी के माहौल के बीच सुनाई देती रहीं सिर्फ चीखें

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 17 Nov 2024 01:38 PM IST
सार

झांसी मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में आग लगने से नवजातों की हुई मौत के मामले में शुरुआती जांच में सामने आया है कि एसएनसीयू में उपकरणों के अत्यधिक लोड की वजह से शॉर्ट-सर्किट हुआ। इसके बाद चिंगारी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर तक पहुंची। इसके बाद ही आग बेकाबू हो गई। 

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Jhansi Medical College Fire Case only screams were heard in medical college Amidst the atmosphere of despair
Jhansi Medical College Fire - फोटो : अमर उजाला
पहर बदलने के साथ तारीख भी बदल गई थी। रात के अंधेरे पर दिन का उजाला हावी हो चुका था और शनिवार की सुबह शहर अपनी रवानगी पर फिर से दौड़ने लगा था। नहीं बदले थे तो सिर्फ मेडिकल कॉलेज के हालात। पुलिस और अफसरों की गाड़ियों के हूटरों की आवाजों के बीच उन महिलाओं का चीखें सुनाई दे रहीं थीं, जो अपने बच्चों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आईं थीं, लेकिन उनकी लाश लेकर घर वापस जाने वालीं थीं।


हमीरपुर निवासी याकूब की पत्नी नजमा ने आठ नवंबर को दो जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया था। नजमा और याकूब की पहली संतानें थीं। घर में नन्हीं परियों के आने से सभी बेहद खुश थे। लेकिन, दोनों बच्चियां बेहद कमजोर थीं। हमीरपुर के अस्पताल में उन्हें बताया गया था कि बच्चियों को वे झांसी मेडिकल कॉलेज ले जाएं, यहां वे ठीक हो जाएंगी।
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Jhansi Medical College Fire Case only screams were heard in medical college Amidst the atmosphere of despair
मेडिकल कॉलेज के बाहर जमा परिजन - फोटो : अमर उजाला
नजमा की खुशी को शुक्रवार रात ग्रहण लगा
नौ नवंबर को उन्होंने बच्चियों को मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करा दिया था। यहां उनकी सेहत स्थिर बनी हुई थी। डॉक्टर बच्चियों के 10-15 दिन में ठीक होने का भरोसा दे रहे थे, जिससे नजमा खुश थीं। लेकिन, उसकी खुशी को शुक्रवार की रात ग्रहण लग गया। वार्ड में आग लगने से दोनों बच्चियों की मौत हो गई। इसके बाद से नजमा के आंसू नहीं थमे। शनिवार को हमीरपुर से परिवार की अन्य महिलाएं भी यहां पहुंच गई थीं, जो नजमा को लगातार ढांढस बंधा रहीं थीं, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हो रहा था। 
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नवजात की मौत से परिजन बेहोश - फोटो : अमर उजाला
उसके मुंह से चीखें निकल रहीं थीं। रोते-रोते बेसुध हो जाने पर उसकी चीखें शांत होती थीं। यही स्थिति ललितपुर निवासी सोनू की पत्नी संजना की बनी हुई थी। सोनू और संजना की एक साल पहले शादी हुई थी। इसी महीने उसने बेटे को जन्म दिया था। सब बेहद खुश थे। बच्चे के बीमार होने पर उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया था। सोनू और संजना बीमार बेटे की देखरेख में जुटे हुए थे। 
 
Jhansi Medical College Fire Case only screams were heard in medical college Amidst the atmosphere of despair
मेडिकल कॉलेज में नवजात के परिजन - फोटो : अमर उजाला
उम्मीद थी कि कुछ दिनों में बेटा ठीक हो जाएगी और वे खुशी-खुशी अपने घर वापस लौट जाएंगे। लेकिन, उनकी यह तमन्ना पूरी नहीं हो सकी। शनिवार की शाम वे बेटे का शव लेकर घर की ओर रवाना हुए। सोनू तो अपने अंदर की पीड़ा को दबाए हुए था, लेकिन संजना के आंसू नहीं थम रहे थे। कमोबेश इन परिस्थितियों से वे सभी परिवार गुजर रहे थे, जिन्होंने मेडिकल कॉलेज में शनिवार की रात हुए अग्निकांड में अपनों को खो दिया था। उन्हें ढांढस बंधाने के लिए लोगों के पास शब्द भी कम पड़ रहे थे।
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मेडिकल कॉलेज के बाहर जमा भीड़ और पुलिस - फोटो : अमर उजाला
मेडिकल की आग पर गरमाया सियासी पारा
झांसी मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में आग लगने से 10 नवजातों की हुई मौत के बाद शनिवार को लखनऊ से लेकर झांसी तक सियासी पारा गरमाया रहा। इस मुद्दे पर सपा, बसपा और कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरा। वहीं, झांसी में सपा नेता पीड़ित परिवारों के साथ धरने पर बैठे रहे। उन्होंने प्रशासन पर पीड़ित परिवारों की मदद न करने का आरोप लगाया। घटना के बाद कई बच्चों के बारे में जानकारी न मिल पाने से आक्रोशित परिजन मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर दो पर धरने पर बैठ गए। 

 
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