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प्रशिक्षु एडवोकेट प्रियांशु की अंतिम इच्छा: सब लोग मेरे इस सुसाइड नोट को अंत तक पूरा पढ़े…
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Fri, 24 Apr 2026 05:17 PM IST
सार
Kanpur News: बर्रा आठ के वरुण विहार निवासी प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु ने कचहरी में सुसाइड से पहले नोट लिखा।
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प्रशिक्षु एडवोकेट प्रियांशु सुसाइड केस
- फोटो : अमर उजाला
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कचहरी की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान देने से पहले प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने दो पेज के सुसाइड लोट लिखा है कि उनकी आखिरी इच्छा है कि सुसाइड नोट जो भी देखे उसे आखिरी तक पढ़े। पिता राजेंद्र कुमार की डांट, उलाहने और निर्वस्त्र कर घर से निकालने की धमकी उन्हें जिंदगी भर सालती रही। पिता से रिश्ते में इस कदर दूरी आ गई कि उन्हें लिखना पड़ गया... ऐसे पिता भगवान किसी को भी न मिले। पिता उसका शव भी न छू पाएं... पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक हो।
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इसी बिल्डिंग से कूद कर प्रियांशु ने दी जान
- फोटो : अमर उजाला
सबके सामने करते थे बेइज्जत
टार्चर इस सीमा तक नहीं हो कि नफरत में बदल जाए। सुसाइड नोट के अनुसार पिता के कक्षा नौ में विषय के चयन से लेकर कम अंक आने पर घर से निर्वस्त्र कर निकालने की धमकी के डर से नापसंद विषय भी लेने पड़े। हाईस्कूल में अंक कम आने पर घर छोड़कर मथुरा पहुंच गया था। बचपन में चुराए गए एक रुपये के सिक्के वाली गलती को पिता सबके सामने कह कर बेइज्जत करना नहीं भूलते थे।
टार्चर इस सीमा तक नहीं हो कि नफरत में बदल जाए। सुसाइड नोट के अनुसार पिता के कक्षा नौ में विषय के चयन से लेकर कम अंक आने पर घर से निर्वस्त्र कर निकालने की धमकी के डर से नापसंद विषय भी लेने पड़े। हाईस्कूल में अंक कम आने पर घर छोड़कर मथुरा पहुंच गया था। बचपन में चुराए गए एक रुपये के सिक्के वाली गलती को पिता सबके सामने कह कर बेइज्जत करना नहीं भूलते थे।
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प्रशिक्षु एडवोकेट प्रियांशु की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
शारीरिक रूप से कमजाेर होने का लगाते थे आरोप
पिता को घर खर्च में मदद कर सकूं, इसलिए ट्यूशन भी पढ़ाया। अपना ऑनलाइन वर्क कर पिता को मोबाइल और बहन को फोन संग स्कूटी दिलाई। इसके बावजूद पिता शारीरिक रूप से कमजाेर होने का आरोप लगाते थे। लिखा कि उनका न तो गलत शौक है न संगत।
पिता को घर खर्च में मदद कर सकूं, इसलिए ट्यूशन भी पढ़ाया। अपना ऑनलाइन वर्क कर पिता को मोबाइल और बहन को फोन संग स्कूटी दिलाई। इसके बावजूद पिता शारीरिक रूप से कमजाेर होने का आरोप लगाते थे। लिखा कि उनका न तो गलत शौक है न संगत।
प्रियांशु के पिता अधिवक्ता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव
- फोटो : अमर उजाला
देते थे ये ताना
पिता खुद का घर और ऑफिस न बना पाने का ताना देते हैं। उसके पास किसका फोन आया, कहां जा रहे हो जैसी जरूरत से ज्यादा दखल उसके जीवन में दी जा रही थी। सुसाइड नोट के अनुसार गुरुवार को भी पिता ने मोहल्ले में सबके के सामने बेइज्जत किया।
पिता खुद का घर और ऑफिस न बना पाने का ताना देते हैं। उसके पास किसका फोन आया, कहां जा रहे हो जैसी जरूरत से ज्यादा दखल उसके जीवन में दी जा रही थी। सुसाइड नोट के अनुसार गुरुवार को भी पिता ने मोहल्ले में सबके के सामने बेइज्जत किया।
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प्रशिक्षु एडवोकेट प्रियांशु सुसाइड केस
- फोटो : अमर उजाला
इससे उसकी जीने की इच्छा खत्म हो गई। लिखा कि पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक हो। क्योंकि इतनी बंदिशों और बेइज्जती के साथ वह जी नहीं सकता। पिता पर कोई कार्रवाई न करने की बात लिखी है। साथ ही मां और बहन को ढेर सारा प्यार देने की बात लिखी है।

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