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यूपी: कोहरे की आड़ में विदेशी पक्षियों का शिकार, पिनटेल और नार्थन शॉवेलर को शिकारियों ने मार डाला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 31 Dec 2019 01:43 PM IST
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Foreign birds are being hunted under the cover of fog in kannauj
दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का शिकार जारी - फोटो : अमर उजाला
कई देशों की सीमाएं लांघकर कन्नौज के लाख बहोसी पक्षी विहार में अठखेलियां करने आने वाले दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का शिकार जारी है। कोहरे की धुंध का सहारा लेकर शिकारी झीलों में जाल डालकर शिकार कर रहे हैं। झाड़ियों में नशीली दवा डालकर भी इन्हें निशाना बना रहे हैं।
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दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का शिकार जारी - फोटो : अमर उजाला
लाख बहोसी झील विदेशी पक्षियों से गुलजार है। सोमवार रात शिकारियों ने उत्तरी पिनटेल (सींखपर), नार्थन शॉवेलर और कॉमन कूट पक्षियों को मारा डाला। कुछ पक्षियों के शव उतराते देखे गए हैं। शिकारी सुबह के वक्त कोहरे में जाल डालकर पक्षियों को पकड़ लेते हैं।
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दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का शिकार जारी - फोटो : अमर उजाला
जहरीली दवा डालकर भी शिकार कर रहे हैं। कस्बे के कुछ इलाकों में विदेशी पक्षियों का मांस मंहगे दामों पर बिक रहा है। इसके बाद भी लाख बहोसी पक्षी विहार और वन विभाग के अधिकारी खामोश हैं। रेंजर सुशील कुमार ने बताया कि झीलों में शिकार की जानकारी नहीं है। शिकारियों की निगरानी के लिए सुबह-शाम झीलों में चौकसी बढ़ाई गई है।
Foreign birds are being hunted under the cover of fog in kannauj
दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का शिकार जारी - फोटो : अमर उजाला
यूरोप और उत्तरी अमेरिका से उड़कर आते हैं पिनटेल
पिनटेल यूरोप, उत्तरी अमेरिका से उड़कर सर्दियों में एशिया के देशों में विचरण करने आते हैं। यह बतख प्रजाति का पक्षी है। इसे सींखपर भी कहते हैं। यह 48 मील प्रतिघंटा उड़ान भर सकता है। यह एक बार में 1800 मील तक उड़ान की क्षमता रखता है। यह पक्षी नवंबर से मार्च तक विचरण करने आते हैं।
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दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का शिकार जारी - फोटो : अमर उजाला
शिकारियों पर इन धाराओं में होती है कार्रवाई  
विदेशी और प्रतिबंधित पक्षियों का शिकार करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। शिकार करने वाले लोगों पर वर्ल्ड लाइफ एक्ट 1972 के तहत धारा 52,53 और 54 के तहत मुकदमा दर्ज होता है। करीब दो साल तक जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने का प्रावधान है। इसके बाद भी वन विभाग शिकारियों पर सख्त कार्रवाई से बचता है।
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