बेतवा पुल हादसा: ‘नीचे कूदे तो मौत, ऊपर रहें तो काल’, मजदूर बोले- बचेंगे या नहीं? पिलर पर कटी रात, ऐसा था मंजर
Hamirpur Betwa Bridge Tragedy: हमीरपुर पुल हादसे में फंसे तीन मजदूरों को एसडीआरएफ की टीम ने सुरक्षित बचा लिया है। रात भर मजदूर करीब 20 मीटर ऊंचाई पर फंसे रहे। हादसे में छह मजदूरों की मौत हो गई है, जिनके शव मलबे से निकाल लिए गए हैं।
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पुल और पिलर हिलते महसूस होने लगे
राजेश निषाद ने बताया कि पहले रात करीब 12:05 बजे तेज हवा का झोंका आया। इसके बाद 12:15 बजे के आसपास आंधी और अधिक तेज हो गई। कुछ ही देर में पुल और पिलर हिलते महसूस होने लगे। मजदूरों को लगा कि स्थिति सामान्य हो जाएगी लेकिन अचानक जोरदार झटका लगा और आगे का स्पैन भरभराकर नीचे चला गया। उस हिस्से में मौजूद लोकेंद्र निषाद, कुलदीप निषाद, गंगाचरण और सभाजीत मलबे में दब गए।
लगा- अब शायद हम भी नहीं बचेंगे
नीचे हाइड्रा मशीन के पास मौजूद राजेश पाल और पुष्पेंद्र सिंह चौहान भी गिरते स्लैब की चपेट में आ गए। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद कुछ पल तक किसी को समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है। नीचे अफरा-तफरी मच गई थी। तेज हवा और बारिश के बीच किसी की आवाज साफ सुनाई नहीं दे रही थी। पहली बार मौत को इतने करीब से देखा। लगा कि अब शायद हम भी नहीं बचेंगे।
देखते ही देखते सब खत्म हो गया
कल्लू यादव ने बताया कि हादसे में उनके सगे भतीजे गंगाचरण और पारिवारिक भतीजे सभाजीत की मौत हुई है। दोनों सिर्फ दो दिन पहले ही काम पर आए थे। कुछ देर पहले तक सभी लोग साथ बैठकर आंधी थमने का इंतजार कर रहे थे। अचानक स्पैन खिसकने की आवाज आई और देखते ही देखते सब खत्म हो गया। उन्होंने बताया कि दोनों की आखिरी आवाज आज भी कानों में गूंज रही है। हादसे के बाद सबसे पहले उन्होंने 112 पर फोन कर सूचना दी और फिर अपने बड़े भाई प्रमोद गौतम तथा परिजनों को घटना की जानकारी दी।
हर मिनट दूसरा हादसा होने का डर सता रहा था
अवधेश निषाद ने बताया कि हादसे के बाद बिजली और जनरेटर बंद हो गए थे। चारों तरफ अंधेरा छा गया था। प्यास से गला सूख रहा था लेकिन पानी तक नहीं मिल सका। नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं था। उन्होंने साथी के मोबाइल से मदद के लिए फोन किया। पूरी रात यही डर बना रहा कि कहीं पुल का बचा हुआ हिस्सा भी न गिर जाए। उन्होंने बताया कि हवा इतनी तेज थी कि पूरा ढांचा हिलता महसूस हो रहा था और हर मिनट दूसरा हादसा होने का डर सता रहा था।