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कानपुर: रैन बसेरों में ताला, ठंड में बेघरों का रखवाला सिर्फ ऊपरवाला
दिव्यांश सिंह, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 31 Dec 2019 06:23 PM IST
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रैन बसेरों में ताला, ठंड में बेघरों का रखवाला सिर्फ ऊपरवाला
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में ठंड रोज रिकॉर्ड तोड़ रही है और शहर के सिस्टम को ‘ठंड’ लगी हुई है। रात में रैन बसेरों में ताले जड़ दिए जाते हैं और बेसहारा लोग सड़क पर ठिठुरते हुए रात बिताते हैं। यह कही-सुनी बात नहीं, आंखों देखी है। बर्फीली हवाओं से सिर्फ ईश्वर के भरोसे जूझते लोगों की सिहरन महसूस करने के लिए पेश है लाइव रिपोर्ट,,,
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फुटपाथ पर सो रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
रैन बसेरा, एक्सप्रेस रोड- रात: 2.30 बजे
हम एक्सप्रेस रोड रैन बसेरे पहुंचे, तो देखा कि नीचे बरामदे में लगभग 50 लोग सो रहे हैं। सिर पर छत, लेकिन दीवारें नहीं। तीर की तरह शरीर को भेदती बर्फीली हवाओं में कंबल के भरोसे सो रहे इन लोगों के पास ठंड से बचने के इंतजाम नाकाफी दिखे। इसके बाद रैन बसेरे के प्रथम तल पर बने हॉल को जाकर देखा गया, तो वहां चैनल पर ताला लटक रहा था। अंदर महज सात-आठ लोग सोते दिखाई दिए। चैनल खुलवाने के लिए कई आवाज दी गईं, लेकिन र्कोई नहीं आया। सड़क पर एक रिक्शेवाला दिखा, जो कंबल ओढ़कर अपने रिक्शे पर सोने की कोशिश कर रहा था, उससे पूछा कि रैन बसेरे में क्यों नहीं सोते हो, तो वह बोला-अंदर जाने ही नहीं दिया जाता। उससे पूछा कि कौन रोकता है, तो उसने नाम बताने से इनकार कर दिया। यह जरूर कहा कि सिर्फ जुगाड़ वाले ही वहां सो पाते हैं।
हम एक्सप्रेस रोड रैन बसेरे पहुंचे, तो देखा कि नीचे बरामदे में लगभग 50 लोग सो रहे हैं। सिर पर छत, लेकिन दीवारें नहीं। तीर की तरह शरीर को भेदती बर्फीली हवाओं में कंबल के भरोसे सो रहे इन लोगों के पास ठंड से बचने के इंतजाम नाकाफी दिखे। इसके बाद रैन बसेरे के प्रथम तल पर बने हॉल को जाकर देखा गया, तो वहां चैनल पर ताला लटक रहा था। अंदर महज सात-आठ लोग सोते दिखाई दिए। चैनल खुलवाने के लिए कई आवाज दी गईं, लेकिन र्कोई नहीं आया। सड़क पर एक रिक्शेवाला दिखा, जो कंबल ओढ़कर अपने रिक्शे पर सोने की कोशिश कर रहा था, उससे पूछा कि रैन बसेरे में क्यों नहीं सोते हो, तो वह बोला-अंदर जाने ही नहीं दिया जाता। उससे पूछा कि कौन रोकता है, तो उसने नाम बताने से इनकार कर दिया। यह जरूर कहा कि सिर्फ जुगाड़ वाले ही वहां सो पाते हैं।
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रैन बसेरों में ताला, ठंड में बेघरों का रखवाला सिर्फ ऊपरवाला
- फोटो : अमर उजाला
रैन बसेरा, फूलबाग- तड़के 3.10 बजे
यहां पहुंचकर देखा, तो चैनल पर ताला लगा हुआ था। कई आवाजें दीं, लेकिन ताला खोलने कोई नहीं आया। फुटपाथ पर कई लोग सोते नजर आए। यहां का नजारा देखकर यह बात बिल्कुल साफ हो गई कि रैन बसेरा में भी वही डेरा जमा पाता है, जिसका कोई जुगाड़ हो। बाहर सो रहा एक व्यक्ति उठकर कहीं जाता दिखा, तो उससे पूछा कि रैन बसेरा में क्यों नहीं सोते हो, तो उसने भी वही बात दोहराई, जो एक्सप्रेस रोड पर रिक्शेवाले ने कही थी।
यहां पहुंचकर देखा, तो चैनल पर ताला लगा हुआ था। कई आवाजें दीं, लेकिन ताला खोलने कोई नहीं आया। फुटपाथ पर कई लोग सोते नजर आए। यहां का नजारा देखकर यह बात बिल्कुल साफ हो गई कि रैन बसेरा में भी वही डेरा जमा पाता है, जिसका कोई जुगाड़ हो। बाहर सो रहा एक व्यक्ति उठकर कहीं जाता दिखा, तो उससे पूछा कि रैन बसेरा में क्यों नहीं सोते हो, तो उसने भी वही बात दोहराई, जो एक्सप्रेस रोड पर रिक्शेवाले ने कही थी।
रैन बसेरों में ताला, ठंड में बेघरों का रखवाला सिर्फ ऊपरवाला
- फोटो : अमर उजाला
रैन बसेरा, ग्वालटोली- तड़के 3:45 बजे
दो रैन बसेरों की हालत देखकर जो अंदाजा पहले ही लग गया था, वह ग्वालटोली पहुंचने पर सही साबित हो गया। यहां भी वही स्थिति दिखी। रैन बसेरे के चैनल पर ताला और बाहर ठिठुरते हुए लोग। चैनल के सामने जाकर कई बार आवाज लगाई गई, लेकिन कोई उसे खोलने नहीं आया। यहां पर किसी से बातचीत तो नहीं हो पाई, लेकिन स्थिति साफ हो गई कि नगर निगम के रैन बसेरे सभी बेघरों को ठंड में प्रश्रय नहीं दे रहे हैं।
दो रैन बसेरों की हालत देखकर जो अंदाजा पहले ही लग गया था, वह ग्वालटोली पहुंचने पर सही साबित हो गया। यहां भी वही स्थिति दिखी। रैन बसेरे के चैनल पर ताला और बाहर ठिठुरते हुए लोग। चैनल के सामने जाकर कई बार आवाज लगाई गई, लेकिन कोई उसे खोलने नहीं आया। यहां पर किसी से बातचीत तो नहीं हो पाई, लेकिन स्थिति साफ हो गई कि नगर निगम के रैन बसेरे सभी बेघरों को ठंड में प्रश्रय नहीं दे रहे हैं।
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रैन बसेरों में ताला, ठंड में बेघरों का रखवाला सिर्फ ऊपरवाला
- फोटो : अमर उजाला
रैन बसेरे वाले ताला लगाकर रखते हैं। सड़क किनारे ही रात बितानी पड़ती है। कभी कोई अधिकारी हाल देखने नहीं आता। - मोती बात्वा (फूलबाग)
रैन बसेरों में ताला लगाने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया गया है। अगर कहीं ताला लगाया जा रहा है, तो यह गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। - अमृत लाल बिंद, अपर नगर आयुक्त प्रथम
