{"_id":"60715bfd8ebc3ed4c3763654","slug":"panchayat-election-2021-10-contenders-for-pradhani-in-bikru-gram-panchayat","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"पंचायत चुनाव: 25 साल बाद बिकरू में ग्राम प्रधान के 10 दावेदार, विकास के गुर्गे-समर्थकों ने चुनाव से किया किनारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचायत चुनाव: 25 साल बाद बिकरू में ग्राम प्रधान के 10 दावेदार, विकास के गुर्गे-समर्थकों ने चुनाव से किया किनारा
Sun, 11 Apr 2021 09:16 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 11 Apr 2021 09:16 AM IST
विज्ञापन
पंचायत चुनाव 2021: बिकरू में 25 साल बाद खुलकर प्रचार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लंबे समय तक आतंक का पर्याय बने रहे विकास दुबे के खात्मे के उपरांत बिकरू ग्राम पंचायत में लगभग ढाई दशक बाद एक बार पुन: लोकतंत्र का उदय होने जा रहा है। 15 अप्रैल को होने जा रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए यहां न सिर्फ दावेदारों ने स्वतंत्र रूप से अपने नामांकन कराए हैं, बल्कि मतदाताओं को भी अब अपनी स्वेच्छा से ग्राम प्रधान व अन्य जनप्रतिनिधि चुनने का मौका हासिल हो रहा है।
बिकरू गांव
- फोटो : अमर उजाला
आतंक का एक ऐसा नाम जिसके रहते वर्षों तक गांव में किसी ने उसके खिलाफ अपनी जुबान खोलने की कभी हिमाकत नहीं की। मालूम रहे कि विकास दुबे वर्ष 1995 में बिकरू ग्राम पंचायत का प्रधान बना था। उसकी दहशतगर्दी का ही नतीजा था कि एक बार ग्राम प्रधान बनने के पश्चात दोबारा उसकी मर्जी बगैर कोई प्रधान नहीं बन पाया।
वर्ष 2000 में अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित हुई तो दुर्दांत विकास दुबे ने गांव की गायत्री देवी को प्रधान बनवाया, लेकिन सत्ता चलाने के सारे अधिकार अपने पास ही सुरक्षित रखे। वर्ष 2005 में सामान्य महिला सीट होने पर छोटे भाई दीपू दुबे की पत्नी अंजली दुबे को निर्विरोध प्रधान बनाया। वर्ष 2010 में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर गांव के रजनीकांत कुशवाहा को प्रधान बनाया, लेकिन बागडोर अपने हाथों में ही रखी।
वर्ष 2000 में अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित हुई तो दुर्दांत विकास दुबे ने गांव की गायत्री देवी को प्रधान बनवाया, लेकिन सत्ता चलाने के सारे अधिकार अपने पास ही सुरक्षित रखे। वर्ष 2005 में सामान्य महिला सीट होने पर छोटे भाई दीपू दुबे की पत्नी अंजली दुबे को निर्विरोध प्रधान बनाया। वर्ष 2010 में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर गांव के रजनीकांत कुशवाहा को प्रधान बनाया, लेकिन बागडोर अपने हाथों में ही रखी।
बिकरू गांव
- फोटो : अमर उजाला
तमाम दखलंदाजी व हिटलरशाही से आजिज आकर आखिर तत्कालीन प्रधान रजनीकांत गांव छोड़कर ही चले गए। वर्ष 2015 में एक बार पुन: मौका मिलने पर विकास ने अपनी बहू अंजली को निर्विरोध प्रधान बनवाया। ग्रामीणों की मानें तो दुर्दांत विकास दुबे के आगे जुबान खोलने का मतलब मौत को दावत देना जैसा था।
विकास की मौत के बाद मानो यहां आतंक व दहशतगर्दी का पूरी तरह से अंत हो चुका है। उसके रहते पंचायत चुनाव लड़ने की जुर्रत न करने वाले इस बार बेखौफ होकर चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आरक्षित हुई सीट के लिए बीते दिनों हुए नामांकन में बिकरू गांव से 7, जबकि इसके मजरा डिब्बानिवादा गांव से 3 दावेदारों ने पर्चे दाखिल किए हैं।
विकास की मौत के बाद मानो यहां आतंक व दहशतगर्दी का पूरी तरह से अंत हो चुका है। उसके रहते पंचायत चुनाव लड़ने की जुर्रत न करने वाले इस बार बेखौफ होकर चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आरक्षित हुई सीट के लिए बीते दिनों हुए नामांकन में बिकरू गांव से 7, जबकि इसके मजरा डिब्बानिवादा गांव से 3 दावेदारों ने पर्चे दाखिल किए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिकरू गांव
- फोटो : अमर उजाला
गांव में जगह-जगह लगे बैनर, पोस्टर व ग्रामीणों की चौपाल मानो गुलामी से मिली आजादी जैसा एहसास करा रहे हैं। प्रत्याशी भी घर-घर जाकर खुलकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जी तोड़ कोशिश में लगे हैं। लगभग डेढ़ हजार मतदाताओं वाली इस ग्राम पंचायत में प्रमुख रूप से ब्राह्मण, यादव व मुस्लिम वोटरों की भागेदारी ही निर्णायक भूमिका निभाएगी।
विज्ञापन
रिचा दुबे और विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विकास का अंत, उसके गुर्गे-हिमायतियों ने चुनाव से किया किनारा
दो जुलाई 2020 से जनपद और प्रदेश में चर्चा में आया चौबेपुर थाने व शिवराजपुर ब्लाक का बिकरू गांव पंचायत चुनावों में एक बार भी राजनीतिक जनों की जुबान पर है। कुछ लोगों की शह पर जादेपुर घस्सा गांव के राहुल तिवारी की शिकायत पर चौबेपुर थाने में तत्कालीन एसओ विनय तिवारी द्वारा रिपोर्ट पंजीकृत होने और तत्कालीन सीओ देवेंद्र मिश्रा द्वारा बिकरू में कुख्यात विकास दुबे की कोठी पर शिवराजपुर, बिठूर और चौबेपुर की पुलिस संग दबिश के दौरान गोली बाजी की घटना अभी तक लोगों के दिमाग में है।
दो जुलाई 2020 से जनपद और प्रदेश में चर्चा में आया चौबेपुर थाने व शिवराजपुर ब्लाक का बिकरू गांव पंचायत चुनावों में एक बार भी राजनीतिक जनों की जुबान पर है। कुछ लोगों की शह पर जादेपुर घस्सा गांव के राहुल तिवारी की शिकायत पर चौबेपुर थाने में तत्कालीन एसओ विनय तिवारी द्वारा रिपोर्ट पंजीकृत होने और तत्कालीन सीओ देवेंद्र मिश्रा द्वारा बिकरू में कुख्यात विकास दुबे की कोठी पर शिवराजपुर, बिठूर और चौबेपुर की पुलिस संग दबिश के दौरान गोली बाजी की घटना अभी तक लोगों के दिमाग में है।