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यूपीः छोटे शहर में गरीबों की सहारा बनी ये 'नेकी की दीवार',..तो इस काम में आप क्यों रहें पीछे 

Fri, 23 Nov 2018 09:46 AM IST
आनंद द्विवेदी, अमर उजाला, महोबा
आनंद द्विवेदी, अमर उजाला, महोबा Updated Fri, 23 Nov 2018 09:46 AM IST
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poor wall of support in mahoba
डेमो पिक
पुरानी कहावत है ..नेकी कर दरिया में डाल। कुछ ऐसा ही काम महोबा जिले के बस स्टैंड के पास इलाहाबाद बैंक की दीवार पर नेकी की दीवार के रूप में चल रहा है। बिना प्रचार किए गरीबों की मदद करने वालों की मंशा है कि जो अतिरिक्त है उसे छोड़ा जाए, ताकि समाज में जो भी उस वस्तु से वंचित है वह उसका लाभ उठाए।

 

poor wall of support in mahoba
डेमो पिक

फिलहाल यह काम वस्त्र, स्वेटर, शाल, जूते चप्पल  व अन्य वस्तुओं से के साथ किया जा रहा है। इस नेक काम का प्रारंभ किसने किया यह तो कोई बताने को तैयार नहीं है, पर गर्मी के मौसम में पास में रहने वाले युवा घड़ों में पानी जरूर यहां पर भर देते थे। 

poor wall of support in mahoba
डेमो पिक

कुछ ऐसे होता है काम 
दीवार पर हैंगर लगाए गए हैं। यहां पर लोग आते हैं और यहां पर सभी आयु के लोगों के लिए सामान्य व गर्म वस्त्र, जूते चप्पल आदि सामग्री टांग जाते हैं। जरूरतमंद आते हैं और उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से लेकर चले जाते हैं। 

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डेमो पिक

सर्दी में बढ़ जाता है महत्व 
गर्मी के मौसम में लोगों को लोगों को ज्यादा कपड़ों की जरूरत पड़ती नहीं है। लेकिन सर्दी से बचाव के लिए गर्म कपड़ों की जरूरत बढ़ने के कारण इस दीवार का महत्व बढ़ जाता है। 
सबसे पहले अरब देशों में बनाई गई थी नेकी की दीवार 
अधिवक्ता व कुलपहाड़ विकास समिति के सदस्य सुरेंद्र सिंह यादव बताते हैं कि नेकी की दीवार सर्वप्रथम अरब देशों में बनाई गई थी ताकि युद्ध ग्रस्त बर्बाद हो चुके ईरान इराक में जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। संपन्न लोग कपड़े खाने का सामान और गृहस्थी की दूसरी अन्य चीजें एक स्थान पर रख जाते थे जिन्हें लोग रात के अंधेरे में जरूरत के हिसाब से ले जाते थे। इससे लोगों का सम्मान भी बरकरार रहता था। ऐसा ही काम जागरूक लोग बुंदेलखंड के अति पिछड़े जिले में कर रहे है।

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डेमो पिक

श्रेय लेने को कोई तैयार नहीं 
सेंट जोसेफ स्कूल महोबा में शिक्षक के पद पर कार्यरत सादाब मंसूरी  कहते है कि यह नेक कार्य है। जिसका श्रेय एक व्यक्ति नहीं लेना चाहता। इसी कारण से इस काम का कोई संचालक नहीं है। हर व्यक्ति की मदद से गरीबों को राहत पहुंचाने का कार्य चल रहा है। उन्होंने नेकी की दीवार को कंबल दान किए थे जो जरूरतमंदों तक पहुंच गए है।  
अभी तक 20 बोरे कपड़े ले जा चुके हैं लोग 
नेकी की दीवार के पास ही दुकान करने वाले अंशुल नायक कहते हैं कि एक वर्ष से यह काम चल रहा है। लगभग 20 बोरे से ज्यादा कपड़े अब तक जरूरतमंद ले जा चुके हैं। कई लोग तो अपनी बेटी की शादी व अन्य आयोजनों में पहनने के लिए कपड़े ले जाते हैं। जिसे देखकर काफी खुशी मिलती है। 

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