{"_id":"699a0f1988e0f7f1660f6b4c","slug":"five-members-of-same-family-died-due-to-financial-crisis-in-kasganj-2026-02-22","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"UP: बुझा चूल्हा और खाली बर्तन, तीन दिन से घर में बंद दंपती और तीन बच्चों की लाशें; कासगंज कांड की पूरी कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: बुझा चूल्हा और खाली बर्तन, तीन दिन से घर में बंद दंपती और तीन बच्चों की लाशें; कासगंज कांड की पूरी कहानी
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 22 Feb 2026 05:38 AM IST
सार
यूपी के कासगंज जिले में घर में पांच लोगों के शव मिले। इसमें पति-पत्नी और तीन बच्चे थे। पुलिस के अनुसार घर के मुखिया ने पत्नी और तीन बच्चों को मारकर जान दे दी। जांच के दाैरान घटना की जो हकीकत सामने आई है वह झकझोर देने वाली है।
विज्ञापन
कासगंज में परिवार के पांच लोगों की माैत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कासगंज के अमांपुर के एक परिवार के पांच लोगों के शव एक घर में मिलने से सनसनी फैल गई। दिल दहलाने वाली घटना पर मौके पर पहुंची पुलिस के मुताबिक घर के मुखिया ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों की जान लेने के बाद फंदे पर लटकर अपनी जान दे दी। पड़ोसियों और परिजन से बातचीत के बाद डीआईजी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि इस वारदात के पीछे प्रथम दृष्टया आर्थिक तंगी का कारण सामने आया है। परिवार के लोगों की मौत तीन दिन पहले हुई है। घटना से पहले मृतक मुखिया ने घर के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए और एक दरवाजे पर ताला भी लगा दिया। इसके बाद पत्नी बच्चों की जान लेकर फंदा लगा लिया।
Trending Videos
घटना के बाद जुटी भीड़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटे की बीमारी से हालात हुए खराब
सत्यवीर के चाचा गया प्रसाद ने बताया कि पहले से ही सत्यवीर के हालात आर्थिक रूप से तंग थे, लेकिन बेटे की बीमारी से हालात और खराब हो गए। सत्यवीर के बेटे गिरीश को न्यूरो की समस्या थी। सिर में किसी नस की समस्या से जूझ रहा था। इस वजह से उसके इलाज का काफी खर्चा हो रहा था। कुछ दिन पहले ही पड़ोसी से एक हजार रुपये उधार लिए थे। उसने लोगों से आर्थिक मदद ली। लोगों से बातचीत में यह भी सामने आया कि परिवार के लोग उसे सहयोग नहीं कर रहे थे। इस बात से सत्यवीर बेहद आहत था।
सत्यवीर के चाचा गया प्रसाद ने बताया कि पहले से ही सत्यवीर के हालात आर्थिक रूप से तंग थे, लेकिन बेटे की बीमारी से हालात और खराब हो गए। सत्यवीर के बेटे गिरीश को न्यूरो की समस्या थी। सिर में किसी नस की समस्या से जूझ रहा था। इस वजह से उसके इलाज का काफी खर्चा हो रहा था। कुछ दिन पहले ही पड़ोसी से एक हजार रुपये उधार लिए थे। उसने लोगों से आर्थिक मदद ली। लोगों से बातचीत में यह भी सामने आया कि परिवार के लोग उसे सहयोग नहीं कर रहे थे। इस बात से सत्यवीर बेहद आहत था।
विज्ञापन
विज्ञापन
माैके पर पहुंचे आला अधिकारी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घर से मदद न मिली तो अवसाद में डूब गया सत्यवीर
पड़ोसियों ने बताया कि सत्यवीर चार दिन पहले मदद के लिए गांव गया था, लेकिन मदद नहीं मिली। इसके बाद से ही वह गहरे अवसाद में चला गया और पत्नी और बच्चों की जान लेने के बाद खुद भी जान दे दी। सत्यवीर के चाचा गया प्रसाद के मुताबिक सत्यवीर करीब 8 वर्ष पूर्व अपने मूल गांव नगला भोजराज से अमांपुर में आकर रहने लगा था, यहां पेट्रोल पंप के पीछे किराए पर रहने लगा, जिसमें एक दुकान थी और पीछे 10 गुणा 10 फीट के एक छोटे से कमरे में परिवार रह रहा था। परिस्थितियों ने उसे घोर अवसाद में ढकेल दिया।
पड़ोसियों ने बताया कि सत्यवीर चार दिन पहले मदद के लिए गांव गया था, लेकिन मदद नहीं मिली। इसके बाद से ही वह गहरे अवसाद में चला गया और पत्नी और बच्चों की जान लेने के बाद खुद भी जान दे दी। सत्यवीर के चाचा गया प्रसाद के मुताबिक सत्यवीर करीब 8 वर्ष पूर्व अपने मूल गांव नगला भोजराज से अमांपुर में आकर रहने लगा था, यहां पेट्रोल पंप के पीछे किराए पर रहने लगा, जिसमें एक दुकान थी और पीछे 10 गुणा 10 फीट के एक छोटे से कमरे में परिवार रह रहा था। परिस्थितियों ने उसे घोर अवसाद में ढकेल दिया।
घर में मिला बुझा चूल्हा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
न चूल्हा जला, न घर में खाना मिला
तीन दिन से बंद मकान को जब खोला गया तो पुलिस को चूल्हा साफ मिला। इसके आसपास कोई बर्तन भी नहीं था। न ही कोई खाने-पीने का सामान ही मिला। उसके घर में कुछ खास सामान भी नहीं था। मौत कब, किस समय हुई, परिवार के लोगों ने खाना खाया या नहीं, इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन मौके पर चूल्हे में राख तो दिखाई दी, लेकिन आसपास बर्तन थे और न ही सामान। थाली और बर्तनों में खाना भी रखा नहीं मिला। बच्चे की बीमारी और तंगहाली ने अवसाद में डूबे सत्यवीर को यह खौफनाक कदम उठाने को मजबूर कर दिया। अमांपुर विधायक हरिओम वर्मा ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि परिजनों की मौत के मामले के पीछे आर्थिक तंगी के अलावा और कोई कारण नहीं है। परिजन से कोई विवाद हो तो जांच में साफ होगा।
तीन दिन से बंद मकान को जब खोला गया तो पुलिस को चूल्हा साफ मिला। इसके आसपास कोई बर्तन भी नहीं था। न ही कोई खाने-पीने का सामान ही मिला। उसके घर में कुछ खास सामान भी नहीं था। मौत कब, किस समय हुई, परिवार के लोगों ने खाना खाया या नहीं, इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन मौके पर चूल्हे में राख तो दिखाई दी, लेकिन आसपास बर्तन थे और न ही सामान। थाली और बर्तनों में खाना भी रखा नहीं मिला। बच्चे की बीमारी और तंगहाली ने अवसाद में डूबे सत्यवीर को यह खौफनाक कदम उठाने को मजबूर कर दिया। अमांपुर विधायक हरिओम वर्मा ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि परिजनों की मौत के मामले के पीछे आर्थिक तंगी के अलावा और कोई कारण नहीं है। परिजन से कोई विवाद हो तो जांच में साफ होगा।
विज्ञापन
माैके पर जांच करती पुलिस।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दरवाजा काटकर घुसी पुलिस
घटना में सत्यवीर (45), उसकी पत्नी रामश्री (40), उसकी बड़ी बेटी प्राची (14), आकांक्षा (13) एवं बेटा गिरीश (10) के शव पुलिस ने बंद घर से बरामद किए। शनिवार शाम साढ़े छह बजे बंद घर में परिवार के मुखिया सत्यवीर व अन्य परिजनों के मृत होने की सूचना पुलिस मिली। पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। चूंकि घर अंदर से बंद था इसलिए पुलिस प्रवेश नहीं कर सकी। इस पर एसपी ने फॉरेंसिक टीम व डॉग स्क्वायड को मौके पर भेजा और वीडियोग्राफी कराकर बंद मकान का दरवाजा कटवाया।
घटना में सत्यवीर (45), उसकी पत्नी रामश्री (40), उसकी बड़ी बेटी प्राची (14), आकांक्षा (13) एवं बेटा गिरीश (10) के शव पुलिस ने बंद घर से बरामद किए। शनिवार शाम साढ़े छह बजे बंद घर में परिवार के मुखिया सत्यवीर व अन्य परिजनों के मृत होने की सूचना पुलिस मिली। पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। चूंकि घर अंदर से बंद था इसलिए पुलिस प्रवेश नहीं कर सकी। इस पर एसपी ने फॉरेंसिक टीम व डॉग स्क्वायड को मौके पर भेजा और वीडियोग्राफी कराकर बंद मकान का दरवाजा कटवाया।
