कलियां नोचोगे तो फूल कहां से लाओगे, बेटी को मार दोगे तो बहू कहां से पाओगे... समाज में फैली कन्या भ्रूण हत्या की कुरीति को नहीं रोका तो भविष्य कितना काला होगा इसका अहसास बालिकाओं ने शहर की जनता को कराया। सोमवार सुबह शहरवासियों को सजग करने, सतर्क रहने और समझाने वाली थी। अमर उजाला के अभियान अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत शहर में तीन प्रमुख चौराहों पर नुक्कड़ नाटिकाओं का मंचन हुआ। समाज में नारी सशक्तिकरण की नई इबारत लिखने के लिए कनोहर लाल महिला डिग्री कॉलेज व श्री मल्हू सिंह आर्य कन्या इंटर कॉलेज की छात्राएं सड़कों पर उतरीं।
अपराजिता: 'कलियां नोचोगे तो फूल कहां से लाओगे, बेटी को मार दोगे तो बहू कहां से पाओगे...'
बता दें कि बच्चा पार्क, कमिश्नरी चौराहा व बेगमपुल पुलिस चौकी चौराहों पर छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक का मंचन किया। घरेलू हिंसा, तेजाब कांड, लिंगभेद, दहेज, कन्या भ्रूण हत्या और छेड़छाड़ की घटनाओं को छात्राओं ने सामने रखा। संवादों ने पीड़ित छात्राओं का दर्द बयां किया। ढपली, संवादों और तालियों से इन चौराहों से गुजारने वाले राहगीरों को रुकने पर विवश कर दिया। राहगीरों ने नाटक देखे, छात्राओं के साहस व प्रस्तुतियों को सराहा और एक सुरक्षित व सभ्य समाज की स्थापना करने का संकल्प लिया।
टीमों ने दिया सहयोग
श्री मल्हू सिंह आर्य कन्या इंटर कॉलेज से प्रिंसिपल डॉ. नीरा तोमर के निर्देशन में खुशी, काजल, सीमा, रीटा, स्नेहा, फरजाना, छवि, आस्था, रेशू, साक्षी, मानसी व शिक्षिका सुनीता एवं अरुण की टीम ने नुक्कड़ नाटिका का मंचन किया। कनोहर लाल महिला डिग्री कॉलेज से प्रिंसिपल डॉ. किरण प्रदीप के निर्देशन में पूरी टीम पहुंची। टीम में कीर्ति राजपूत, बरखा, आंचल शर्मा, दिव्या जोशी, राधिका कालरा, कोमल शर्मा, स्वाति सैनी, राखी, सुमेश, निशा, शिप्रा, मनीषा सैनी, सुरेश व स्मृति यादव ने नाटक का मंचन किया। इस अवसर पर डॉ. सरिता त्यागी, समाजसेविका अतुल शर्मा, कल्पना पांडे, सीमा अदलखा, निशा सक्सेना, कराटे प्रशिक्षक नीलम सिंह सहित अन्य सदस्याएं उपस्थित रहीं।
तकनीक से करो अपनी सुरक्षा
कनोहर लाल महिला डिग्री कॉलेज की छात्राओं ने कमिश्नरी चौराहे व बेगमपुल पर नुक्कड़ नाटक के जरिए कन्या भ्रूण हत्या और महिला शिक्षा का संदेश दिया। छात्राओं ने बताया कि मोबाइल पर कई ऐसे एप हैं, जो आपकी सुरक्षा करते हैं। इन मोबाइल एप का प्रयोग करके सुरक्षित हो सकती हैं। पुलिस से तुरंत मदद भी ले सकती हैं।
काजल लगाना फैशन है क्या
मल्हू सिंह आर्य कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने बच्चा पार्क व बेगमपुल पर नाटक के माध्यम से छेड़खानी से पीड़ित लड़की का दर्द बयां किया। बेटियों ने कहा कि आंख में काजल लगाना फैशन है क्या। जो मैं काजल लगाकर स्कूल जाती हूं तो मेरे साथ छेड़खानी हो जाती है। क्या इन पुरूषों के घरों में स्त्रियां नहीं जो हर लड़की को छेड़ना इनकी आदत है।
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