मेरठ में मोहकमपुरा स्थित अमर उजाला कार्यालय में गुरुवार को कॉमनवेल्थ कांस्य पदक जीतकर लौटी अन्नू रानी को सम्मानित किया गया। उन्होंने जीत का श्रेय परिवार को दिया। संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय था जब उन्हें भरी सर्दी में सुबह रोशनी होने से पहले अभ्यास करके घर लौटना पड़ता था ताकि समाज के लोगों को बुरा न लगे। क्योंकि लड़की होने के नाते लोग नहीं चाहते थे कि मैं खेलों में हिस्सा लूं।
अन्नू के संघर्ष की कहानी: कहा- सर्दी में अभ्यास करके सुबह की रोशनी से पहले लौटना पड़ता था घर, अब रचा इतिहास
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यहां भारतीय मतदाता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित आदेश फौजी ने उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान भाजपा मंडल अध्यक्ष पवन शर्मा, प्रदीप कुमार, खेल संस्था एसपीओ से नमन भारद्वाज, किक बॉक्सिंग कोच अरविंद शेरवालिया मौजूद रहे।
खेल संसाधनों पर ज्यादा युवा न दें ध्यान
युवाओं को खेलों पर फोकस करने के लिए संसाधनों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। क्योंकि खेल जज्बा होना चाहिए। अन्नू ने बताया कि मैंने बांस और गन्ने को भाला बनाकर अभ्यास शुरू किया था। जैवलिन का इंतजार करती तो यहां तक नहीं पहुंच पाती।
गुरुकुल प्रभात आश्रम से मिली प्रेरणा
अन्नू ने बताया कि बेटियों को खेलों में जाने के लिए समाज के लोगों ने आपत्ति की। इसके बाद परिवार के लोगों ने गुरुकुल प्रभात आश्रम टिकरी में संपर्क किया, वहां के कुलाधिपति स्वामी विवेकानंद सरस्वती के कहने पर परिवार वाले भी मान गए। इसके बाद नया संघर्ष शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंडल खेलों में पदक आने के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
अन्नू के गांव में बनवाएंगे मिनी स्टेडियम: गुलाम मोहम्मद
सिवालखास विधायक हाजी गुलाम मोहम्मद ने अन्नू के घर जाकर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आज देश की बेटियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर बड़ी पहचान बनाई है। इस उपलब्धि से क्षेत्र को नाज है। इससे गांव की अन्य बेटियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि अन्नू के गांव में मिनी स्टेडियम बनवाएंगे।