बदन सिंह बद्दो और सुशील मूंछ की दोस्ती बहुत गहरी लेकिन बेहद अजीब, एक जेल में तो दूसरा रहता है बाहर
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पुलिस के मुताबिक बद्दो और मूंछ में कई वर्षों से गहरी दोस्ती है। मूंछ करीब तीन साल जेल में बंद रहा है। इस दौरान बद्दो जेल से बाहर था। मूंछ का सारा खर्चा बद्दो उठाता था। दोनों के गुर्गे भी एक-दूसरे से वाकिफ हैं। 2017 में बद्दो को उम्रकैद की सजा हो गई थी। इस दौरान मूंछ बाहर था। मूंछ गुपचुप तरीके से बद्दो की मदद करता रहा। 2018 में मां-बेटे की हत्या में मूंछ नामजद हुआ और पुलिस ने इनाम कर दिया। लेकिन मूंछ जेल नहीं गया। 28 मार्च को बद्दो पुलिस कस्टडी से भाग गया। सवा साल बाद मूंछ बिल से बाहर आया व कोर्ट में सरेंडर कर जेल चला गया।
दोनों दोस्तों का सुरक्षित अड्डा कहां?
एक-एक लाख का इनाम होने के बाद भी पुलिस बद्दो और मूंछ को गिरफ्तार नहीं कर पाती है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसी भी उन्हें ढूंढने में नाकाम हो जाती हैं। सवाल है कि आखिर इन दोनों कुख्यातों का वहां कौन सा सुरक्षित अड्डा है, जहां तक पुलिस नहीं पहुंच पाती। विदेश में भी दोनों बदमाशों का नेटवर्क फैला हुआ है। दोनों की करोड़ों की प्रॉपर्टी भी विदेश व दूसरे राज्यों में होनी बताई जाती है। बताया जा रहा कि बद्दो के फरार होने व मूंछ के सरेंडर होने के पीछे पूरी प्लानिंग है।
गवाही से एक दिन पहले चश्मदीद गवाह बेटे भोलू व उसकी मां निछत्तर कौर की हत्या बदमाशों ने सरेआम गोली बरसाकर की थी। सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात कैद हो गई थी। जिसको लेकर प्रदेश भर में खलबली मची थी। इस मामले में विनय, मालू समेत 12 लोग नामजद हुए जबकि सुशील मूंछ और उसका बेटा मंजीत साजिश रचने के मुल्जिम बने थे। आरोप था कि आरोपियों और पीड़ित पक्ष के साथ मूंछ ने पंचायत की थी।