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खामोश हुई अमन की आवाज: जलते घरों के बीच भी मोहब्बत लिखते रहे बशीर बद्र, दंगों की राख से दिया इंसानियत का पैगाम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 28 May 2026 08:24 PM IST
सार

Bashir Badr Passes Away: मशहूर शायर बशीर बद्र ने दंगों में अपना घर खोने के बाद भी इंसानियत, भाईचारे और अमन का संदेश दिया। 1987 के एक साक्षात्कार में उन्होंने दंगों और मानवता पर खुलकर बात की थी। 

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Bashir Badr Passes Away: Bashir Badr Turned Riot Pain Into Poetry of Humanity and Peace
बशीर बद्र का हआ निधन। - फोटो : अमर उजाला

 'लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में...'


यह सिर्फ एक शेर नहीं, बल्कि इंसानियत के दर्द की वह आवाज थी जिसे मशहूर शायर बशीर बद्र ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में महसूस किया और फिर शब्दों में ढाल दिया।

उर्दू अदब की दुनिया का यह बड़ा नाम अब हमारे बीच नहीं रहा, लेकिन मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का उनका पैगाम हमेशा जिंदा रहेगा। दंगों में अपना घर खोने के बाद भी उन्होंने नफरत नहीं, बल्कि अमन और इंसानियत की बात की।

Bashir Badr Passes Away: Bashir Badr Turned Riot Pain Into Poetry of Humanity and Peace
बशीर बद्र - फोटो : सोशल मीडिया
दंगों की राख से निकली मोहब्बत की शायरी
वर्ष 1987 में प्रकाशित एक विशेष साक्षात्कार में बशीर बद्र ने मेरठ दंगों के दर्द को साझा किया था। उन्होंने कहा था कि दंगों ने उन्हें सिर्फ माली नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि उनकी शायरी को एक नया एहसास भी दिया। उन्होंने कहा था कि अब उनकी शायरी उन लोगों को समर्पित होगी, जिन्होंने दंगों के दौर में भी इंसानियत और हमदर्दी का रिश्ता निभाया।
 
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Bashir Badr Passes Away: Bashir Badr Turned Riot Pain Into Poetry of Humanity and Peace
बशीर बद्र - फोटो : kavya

जब पड़ोसियों ने बचाई जान
बशीर बद्र ने उस दौर को याद करते हुए बताया था कि जब उनका घर आग में जल रहा था, तब उनके हिंदू पड़ोसी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने बताया कि पड़ोसी करन सिंह अपने घर से बार-बार पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे। जब किसी ने उनसे पूछा कि एक कलसे पानी से क्या होगा, तब उनका जवाब था -
'अगर मेरे पास दमकल होती तो आग को भड़कने का मौका ही नहीं देता।'

बशीर बद्र ने यह भी बताया कि उनके पड़ोसी हरगोपाल सिंह और धर्मपाल सिंह ने उनके परिवार की महिलाओं को अपने घर में सुरक्षित रखा और दंगाइयों से बचाया।

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बशीर बद्र - फोटो : kavya

नफरत नहीं, भाईचारे का संदेश
बशीर बद्र का मानना था कि दंगे हमेशा खत्म हो जाते हैं, लेकिन इंसानियत और साथ रहने का रिश्ता हमेशा कायम रहता है। उन्होंने कहा था कि नफरत फैलाने वाले लोग इतिहास में कभी सम्मान नहीं पाते। उन्होंने समाज के बुद्धिजीवियों से भी अपील की थी कि वे सच और इंसानियत के पक्ष में खड़े हों, चाहे उसके लिए जोखिम ही क्यों न उठाना पड़े।

यह भी पढ़ें: स्मृति शेष: गजलों का शहर सूना हुआ, मोहब्बत का आखिरी मुसाफिर चला गया, अमर रहेगी बशीर बद्र की उम्दा शायरी

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बशीर बद्र - फोटो : kavya

दंगाइयों पर सख्ती की वकालत
सांप्रदायिक हिंसा पर बोलते हुए बशीर बद्र ने कहा था कि दंगा छोटा हो या बड़ा, उससे सख्ती से निपटना जरूरी है। उनका मानना था कि समाज में नफरत फैलाने वालों के खिलाफ प्रशासन को पूरी ताकत से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा था कि दंगाई पूरे समाज में जहर घोलते हैं और उनके साथ किसी तरह की नरमी नहीं होनी चाहिए।

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