बुलंदशहर हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या मामले में आरोपी फौजी को लेकर एसटीएफ एसएसपी ने एक बड़ी कही है। उनका कहना है कि अभी तक उनके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे फौजी को हत्यारोपी साबित किया जा सके। उधर, फौजी ने भी पूछताछ में यही स्वीकार किया है कि वह भीड़ में तो मौजूद था लेकिन उसने गोली नहीं चलाई है। आगे पढ़िए पूरा अपडेट:-
बुलंदशहर बवाल: फौजी ने इंस्पेक्टर सुबोध को गोली मारी या नहीं, इसका STF के पास कोई सबूत नहीं
वहीं पुलिस ने उसे रविवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस और कई जांच एजेंसियां फौजी के खिलाफ सबूत जुटाने में जुटी हुई हैं।
बुलंदशहर बवाल में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के आरोप में पकड़े गए फौजी जीतू को लेकर एसटीएफ और अन्य जांच एजेंसियां पुलिस से एकमत होती नहीं दिख रही हैं। पांच घंटे तक एसटीएफ ने उससे पूछताछ की। एसटीएफ को इस पर संशय है कि जीतू ने ही इंस्पेक्टर को गोली मारी। फिलहाल ऐसे पुख्ता सुबूतों के सामने न आने की बात कही जा रही है। जम्मू में सेना द्वारा की गई पूछताछ में भी इसी तरफ इशारा किया गया था।
स्याना की चौकी चिंगरावठी पर हुए बवाल के जांच एसआईटी कर रही है। इसमें स्याना इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की गोली लगने से मौत हो गई थी। वहीं, बुलंदशहर पुलिस ने दावा किया था कि फौजी जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू ने इंस्पेक्टर को गोली मारी थी। जीतू को जम्मू से गिरफ्तार कर मेरठ लाया गया और पूछताछ की गई। एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह समेत एसआईटी के अधिकारी भी पूछताछ में शामिल रहे। पुलिस लाइन स्थित एसटीएफ कार्यालय में फौजी से पांच घंटे तक चली पूछताछ के दौरान ही वीडियो और अन्य साक्ष्यों को भी गहराई से परखा गया।
फिलहाल जांच एजेंसियां बुलंदशहर पुलिस के इस दावे पर संशय कर रहीं हैं कि जीतू ने ही इंस्पेक्टर को गोली मारी। सामने आ रहा है कि चिंगरावठी चौकी पर जब गोकशी के शक में भीड़ हंगामा कर जाम लगा रही थी तो उस समय जीतू फौजी मौके पर था। वीडियो फुटेज की जांच में यही सामने आया कि फौजी भीड़ का हिस्सा था। उसके बाद धरना प्रदर्शन के बाद चौकी में तोड़फोड़ हुई और आगजनी कर दी गई। जिस दौरान सिर के पास गोली लगने से इंस्पेक्टर की मौत हो गई।
इस बवाल में चिंगरावठी निवासी छात्र सुमित की भी गोली लगने से मौत हुई थी। अब यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इंस्पेक्टर को जीतू ने गोली मारी या किसी अन्य ने। उसके द्वारा फायरिंग करने के सुबूतों पर भी संशय है। बुलंदशहर पुलिस इसी दावे के साथ जीतू का वारंट लेकर जम्मू पहुंची थी और उसे वहां से लाया गया। जीतू के परिजनों के मुताबिक वहां सेना ने भी उससे पूछताछ की और यही सामने आया कि जीतू ने गोली नहीं चलाई।
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