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पीएफआई की यूपी में गहरी जड़ें, रडार पर 40 लोग, धार्मिक स्थलों में मीटिंग कर फैलाया था नेटवर्क

गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 05 Feb 2020 03:51 AM IST
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Police has action continue against PFI in Meerut of Uttar Pradesh
पथराव करते उपद्रवी - फोटो : अमर उजाला

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गहरी जड़ें हैं। सीएए के विरोध की आड़ में हिंसा कराने के लिए करोड़ों रुपये की फंडिंग की गई। हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने के साथ ही धार्मिक स्थलों में मीटिंग कर लोगों की भीड़ जुटाई गई। मेरठ पुलिस ने पीएफआई के 24 लोगों को जेल भेजा है। 40 और लोगों को सुरक्षा एजेंसियों ने रडार पर ले लिया है। हिंसा कराने के लिये पीएफआई ने बहुत बड़ी साजिश रची थी।

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Police has action continue against PFI in Meerut of Uttar Pradesh
उपद्रवियों ने पथराव किया था - फोटो : अमर उजाला

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को हिंसा पीएफआई ने कराई थी। मेरठ में पीएफआई के लोग पकड़े गए। लेकिन इसके बावजूद पुलिस मामले में खानापूर्ति करती रही। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खुलासा किया कि हिंसा कराने के लिए मेरठ में करोड़ों रुपये की फंडिंग हुई है, तो पुलिस की नींद टूटी। ईडी और एटीएस की टीम ने मेरठ में डेरा डाला हुआ है। पीएफआई का पूरा नेटवर्क खंगालने के लिए लखनऊ से दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। लखनऊ से मेरठ पुलिस से रोजाना अपडेट लिया जा रहा है।

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Police has action continue against PFI in Meerut of Uttar Pradesh
पथराव करते उपद्रवी - फोटो : अमर उजाला

सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया कि वेस्ट यूपी के जिलों में पीएफआई का गहरी जड़ें फैली हैं। खासतौर पर मेरठ में बड़ी हिंसा कराने के लिए पीएफआई ने अपने सदस्यों को यहां पर छोड़ा। दिल्ली से करीब 20 से 25 लोगों को मेरठ में भेजा गया। लिसाड़ीगेट इलाके में लोगों को उकसाने के लिये पहले मीटिंग की और फिर उनको पैसा दिया गया। हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दी गई। गहन छानबीन के बाद मेरठ में 40 लोग चिह्नित किए गए हैं, जिनकी गतिविधियों की जांच की जा रही है।

Police has action continue against PFI in Meerut of Uttar Pradesh
प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

शांतिभंग नहीं, मुकदमे में भी शामिल 
पीएफआई के लोगों की धरपकड़ के लिए पुलिस का अभियान चल रहा है। ताबड़तोड़ दबिश देकर पुलिस ने तीन दिन में 15 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जिसमें दस लोगों का शांतिभंग में चालान किया गया। पीएफआई के लोगों का शांतिभंग में चालान होने पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे थे। एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि जिन लोगों का शांतिभंग में चालान हुआ है, उनका लिसाड़ीगेट और नौचंदी थाने में पहले से ही दर्ज हिंसा के मुकदमों में नाम जोड़ा गया है।

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पथराव करते उपद्रवी - फोटो : अमर उजाला

गुर्गे नहीं, सरगना की तलाश जारी 
आईजी रेंज प्रवीण कुमार का कहना कि पीएफआई ने हिंसा करने के लिए पूरी प्लानिंग की थी। अभी पुलिस गुर्गे ही पकड़ पायी है, असली गुनहगार तो पुलिस की पकड़ से दूर हैं। यह सारी साजिश दिल्ली में बैठकर की गई। दिल्ली से ही फंडिंग हुई थी। पुलिस असली गुनहगार की तलाश में लगी है। पुलिस पांच-छह दिन में पीएफआई का सारा नेटवर्क खंगालकर बड़ा खुलासा करेगी। पुलिस ने कई लोगों के मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाई है। जिसमें काफी महत्वपूर्ण जानकारी मिली हैं।

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