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एक्सक्लूसिव: घूंघट की ओट से साधा निशाना और जीत लिया 'जहां', ये है शूटर दादी की पूरी कहानी

Thu, 24 Oct 2019 01:46 AM IST
कपिल kapil रैना पालीवाल, अमर उजाला, बागपत
रैना पालीवाल, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Thu, 24 Oct 2019 01:46 AM IST
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Exclusive, Shooter Dadi Chandro Tomar of Full story of Success
शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला

उम्र के जिस पड़ाव पर लोग विराम ले लेते हैं, दादी ने वहां से जिंदगी की नई शुरुआत की। या यूं कहें कि 65 साल के बाद उन्होंने अपने लिए जीना शुरू किया। घूंघट की ओट से ऐसा निशाना साधा कि दुनिया उनके कदमों में झुक गई। वो निशाना उस रूढ़िवादी सोच पर भी था जो औरत को दोयम दर्जे का समझती है। अगली स्लाइडों में पढ़िए पूरी कहानी...

Exclusive, Shooter Dadi Chandro Tomar of Full story of Success
शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला

पितृसत्तात्मक समाज में अपनी जगह बनाना बेहद मुश्किल था। घर और बाहर वालों के ताने कलेजे में तीर से चुभते थे पर दादी ने कान बंद कर लिए। लगन थी तो बस लक्ष्य भेदने की। दादी का संघर्ष कनक बन चमका और लोगों के मुंह बंद हो गए। कल तक दादी जौहड़ी की थी आज जौहड़ी दादी का है। इसलिए चंद्रो तोमर का घर ढूंढने के लिए किसी पुरुष के नाम की जरूरत नहीं पड़ती। हर एक शख्स उनका पता जानता है। यही नहीं गांव के लोग बाहर जाकर दादी के नाम से अपना परिचय देते हैं। दादी की सोच से बेटियों की राह भी रोशन भी हुई। प्रकाशी देवी के बोर्ड के नीचे लिखा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बेटी खिलाओ महज एक स्लोगन नहीं बल्कि इस गांव की सच्ची तस्वीर है। पश्चिमी यूपी में जहां लड़कियों के खिलाफ तमाम फरमान जारी होते रहते हैं, उससे इतर इस गांव में लिंग भेद की कोई जगह नहीं बची है। जौहड़ी की बेटियां पढ़ ही नहीं रही बल्कि खेल रही हैं और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम भी लहरा रही हैं। सांड़ की आंख फिल्म से दादी दमकी हैं लेकिन उनकी चमक हर बेटी की आंख में है।

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शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला

फिल्म की रिलीज से पहले शूटर दादी से मिलने अमर उजाला की टीम उनके गांव जौहड़ी पहुंची। प्रकाशी तोमर नोएडा में हैं। उनकी जेठानी चंद्रो तोमर दोपहर में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ौत गई थीं। शाम को दोबारा गांव जाकर उनसे मुलाकात की। लाल कमीज और नीला गरारा पहने 88 वर्षीय चंद्रो तोमर की आंखों में आत्मविश्वास की चमक है। चोट लगने के कारण वॉकर से चलती हैं। इस उम्र में भी दादी की स्फूर्ति देखने लायक है। कहती हैं कि 15 साल की थी जब शादी हुई। तीन साल बाद गौना हुआ।

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शूटर दादी चंद्रो तोमर - फोटो : अमर उजाला

घूंघट में दुबकी रहती थी। ये वो दौर था जब रोटी भी सास-ननद देती थी। 65 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की। बेटा! लोगों ने बड़ी बाधा खड़ी करी। कहते कि तू जागी कारगिल में, तू जागी फौज में।

घर में सब रोकते थे। मैं कान बंद करके लगी रही। बड़ा परिवार था। रात 12 बजे के बाद जग लेकर प्रैक्टिस करती। सहनशक्ति बड़ी चीज है। मुझे यू दिखानी थी कि एक औरत भी सब कुछ कर सके। जो लोग धज्जियां उड़ाया करते थे, वे अब तारीफ करते हैं। फिल्म आ रही, घना अच्छा लग रहा। तापसी-भूमि ने मौज बिठा दी। इससे अच्छा क्या होगा, सांड़ की आंख। हंसते हुए दादी कहती हैं।

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बागपत के जौहड़ी गांव में बना शूटिंग रैंज - फोटो : अमर उजाला

चंद्रो तोमर गरीब तबके की लड़कियों के लिए शूटिंग रेंज बना रही हैं। बताती हैं, उसका काम चल रहा है। ठीक हो जाऊं तब शुरू कर दूंगी। सरकार की मदद मिल जाए तो हॉस्टल भी बना दूंगी। कोई भी बेटी खेले बिना ना रहे। गरीब बेटियों के लिए मैं हूं। बेटी खेलेगी, मेडल लाएगी। इससे ज्यादा खुशी क्या होगी।

शूटिंग के शौक के सवाल पर दादी कहती हैं, कुंवारेपन से ही लगन थी पर उस समय बंदूक उठाने में झिझकती थी। पोती मेरे से चांद हुई, मैं पोती से। पोती शैफाली के लहरे में मुझे भी उड्डा मिल गया। मैं सफल हो गई। पोती इंटरनेशनल शूटर है।

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