उत्तर प्रदेश के बागपत में यमुना का जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान पर पहुंच गया है, जिससे यमुना किनारे खेती करने वाले किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। बागपत, काठा, खेड़ा इस्लामपुर, फैजपुर निनाना, कोताना आदि गांवों में यमुना खादर में करीब एक हजार बीघा में सब्जी की फसल डूबने से बर्बाद हो गई है। चारे की फसल भी डूब गई है। यमुना में अभी शनिवार तक पानी बढ़ेगा, जिससे वह आबादी के पास तक पहुंच सकता है।
किसानों की नींद उड़ी: खतरे के निशान से ऊपर बह रही यमुना, फसलें तबाह, कई गांवों पर मंडराया संकट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यमुना खादर में उगाई गई घीया, तोरई, सीताफल, लोभिया, मूली की फसलें डूबने से बर्बाद हो गईं। यमुना खादर में करीब 300 किसानों की एक हजार बीघा से ज्यादा फसल खराब हुई है। इसके अलावा ज्वार व बाजरा की फसल भी डूब गई। किसानों ने बताया कि अगर जल्द पानी कम हो जाता है, तो ज्वार व बाजरा की फसल बर्बाद होने से बच जाएगी।
यमुना में अभी जिस तरह से जलस्तर बढ़ रहा है, उससे सब्जी की काफी फसल बर्बाद होती दिख रही है। इस कारण ही टांडा, बदरखा, शबगा, जागोस, कोताना, खेड़ा इस्लामपुर, सुल्तानपुर हटाना, नैथला, फैजपुर निनाना, निवाड़ा, सिसाना, बागपत, काठा, पाली, साकरौद में परेशानी बढ़ सकती है।
इन किसानों की डूबी फसल
यमुना का जलस्तर बढ़ने से बागपत के किसान शकील की बाजरा व ज्वार की 12 बीघा, शौकीन की 10 बीघा सीताफल, लोकी की 10 बीघा, जयकिशन की 10 बीघा में लोकी, हरिकिशन की 15 बीघा में लोकी, हाजी इस्लाम की 30 बीघा में मूली व 40 बीघा में लोभिया, हाजी मोमीन की 15 बीघा में मूली, बिजेंद्र की 10 बीघा में सीताफल, निसार की 12 बीघा में मक्का, इसकी की दस बीघा में लोकी, शौकीन की 10 बीघा में लोकी की फसल डूबने से खराब हो गई।
इनके अलावा फैजपुर निनाना में सुभाष कश्यप की छह बीघा में पालक, चैनपाल की पांच बीघा में सरसों, सुभाष जोगी की नौ बीघा में सरसों, जगमाल की चार बीघा में सरसों, नीरज की तीन बीघा में लोकी, राहुल पंडित की नौ बीघा में लोकी, नरेश कश्यप की पांच बीघा में सरसों की फसल डूब गई। इनके अलावा भी अन्य गांवों में एक हजार बीघा में किसानों की फसल डूब गई।