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भाई बचने का कोई रास्ता नहीं है.., दोस्त को आई वो सबसे डरावनी कॉल, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया

Tue, 18 Feb 2020 06:26 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 18 Feb 2020 06:26 PM IST
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inspiring story of two friends, most scary call of a friend, which shocked whole country
अपनों को गंवाने के बाद नहीं रुक रहे थे आंसू - फोटो : PTI

दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में लगी भीषण आग ने 43 जिंदगियों को एक ही झटके में खत्म कर डाला था। आसपास के राज्यों से आकर मजदूरी करने वाले लोगों की मौत के कई दिन बाद तक परिवारों में चूल्हे तक नहीं जले। क्योंकि उनके अपने तो इस भीषण आग में राख हो गए।



जो निकल सका वो बच गया अन्यथा जो जहां था, वहीं निढाल होकर अकाल मौत के मुंह में समा गया। हर तरफ आग की लपटें, धुआं और अंधेरा था। कोई करता भी तो क्या, सांस लेना तक मुश्किल था। कई ऐसे भी थे कि उन्हें अपनी मौत सामने दिख रही थी। इन्हीं में बिजनौर निवासी मुशर्रफ भी था।

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संकरी गली में थी फैक्टरी - फोटो : अमर उजाला

आग की लपटों में घिरे मुशर्रफ ने अंतिम घड़ी में अपने जिगरी दोस्त के मोबाइल पर कॉल कर उसे चंद सेकेंड्स में आने वाली मौत और इस खौफनाक हादसे की जानकारी दी और उससे एक वादा लिया।

फोन सुन रहे दोस्त के जीवन के ये सबसे डरावनी कॉल थी। वह सब कछ जानते हुए भी कुछ कर पाने में असमर्थ। उसने दोस्त को फोन पर ढाढस बंधाया लेकिन फोन से दोस्त की आवाज आनी बंद हो चुकी थी।

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मौत से पहले दोस्त को की आखिरी कॉल के ऑडियों ने पूरे देश को झकझोर दिया था - फोटो : Amar Ujala

‘फैक्टरी में आग लग गई है और चारों ओर लपटें उठ रही हैं। धुएं के कारण सांस लेना भी मुश्किल है और मदद की कोई उम्मीद भी नहीं। कुछ ही देर में मेरी मौत होने वाली है।

 मोनू मेरे दोस्त मेरे मरने के बाद मेरे परिवार का ख्याल रखना।’ यह बात दिल्ली की अनाज मंडी में हुए हादसे में मारे गए मुशर्रफ ने अंतिम क्षणों में अपने दोस्त शोभित उर्फ 'मोनू' से मोबाइल फोन पर कही थी।

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संकरी गलियों में फायर ब्रिगेड तक का पहुंचना था मुश्किल - फोटो : PTI

रविवार का दिन था, सुबह करीब सवा पांच बजे नगीना थाना क्षेत्र के गांव टांडा माईदास निवासी मुशर्रफ की गांव के ही अपने दोस्त शोभित अग्रवाल उर्फ मोनू के मोबाइल फोन पर कॉल आई। 

मुशर्रफ ने बताया कि फैक्टरी में आग लग गई है और वह आग की लपटों में फंस गया है। चारों ओर धुआं ही धुआं घुटा हुआ है। जिसके कारण सांस लेने में भी मुश्किल हो रही है। ऐसा लग रहा है जैसे कुछ ही क्षणों में उसकी मौत हो जाएगी। उसके साथ कई अन्य साथी भी हैं, किसी के पास बचने का कोई रास्ता नहीं है और मदद की भी उम्मीद टूट चुकी है।

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जो जहां था वहीं निढाल हो गया - फोटो : PTI

मौत को करीब देख मुशर्रफ के सामने अपने मासूम बच्चों का चेहरा, परिवार की उम्मीद और टूटते सपने सब एक साथ खडे़ थे। ऐसे में उसे अपने दोस्त से ही कुछ आशा थी, लेकिन लाचार मोनू भी ऐसे क्षणों में कुछ नहीं कर सका।

मुशर्रफ फफक कर रो रहा था और मोनू से कह रहा था कि वह उसके परिवार का हर हाल में ख्याल रखे। बात करते-करते ही मुशर्रफ की सांसें थम गईं। शोभित ने दोस्त को हिम्मत बंधाई, लेकिन सब नाकाम। 'अच्छा भैया! बचने को कोई रास्ता नहीं है मोनू, घर में सब को मेरा सलाम कहना, मेरे बच्चों का ख्याल रखना.... कहते-कहते मुशर्रफ की सांसे सुस्त पड़ती गईं। एक दोस्त दूसरे दोस्त से हमेशा के लिए अलविदा कह चुका था।

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