पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान प्रदीप और अमित का पार्थिव शरीर देख पूरा गांव रो पड़ा। गमगीन माहौल में अमित और प्रदीप का अंतिम संस्कार हुआ। वहीं केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह समेत कई मंत्री और नेताओं ने भी पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।
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शहीदों को अंतिम विदाई
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार रात से ही हजारों लोग शहर के रेलपार कालोनी निवासी शहीद अमित और बनत कस्बे के शहीद जवान प्रदीप के घर के बाहर जुटे थे।
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अंतिम विदाई
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शनिवार सुबह करीब छह बजे जैसे ही दोनों के शव उनके घर पहुंचे। दोनों के घर के पास ही प्रशासनिक स्तर पर एक भव्य पंडाल बनवाया गया था। जहां शहीदों को श्रद्धांजलि देने लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। बच्चों और युवाओं के हाथों में तिरंगे थे और हर किसी की आंखें नम थीं।
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विलाप करते परिजन
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करीब सुबह करीब नौ बजे बनत गांव में शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा शुरू हुई। गांव की गलियों में जब तक सूरज चांद रहेगा प्रदीप तेरा नाम रहेगा। हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद और जवानों की शहादत का बदला लो बदला लो के नारे गूंज रहे थे। श्मशान घाट पर पूरे राजकीय और सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। प्रदीप के बडेे़ बेटे सिद्धार्थ ने मुखाग्नि दी। सीआरपीएफ के जवानों की गारद ने फायर किए और सशस्त्र सलामी दी।
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विलाप करते परिजन
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इसके बाद पूर्वाह्न 11 बजे शामली रेलपार कालोनी में अमित के शव जनता दर्शन और श्रद्धांजलि के बाद शव यात्रा शुरू हुई। इस दौरान कुछ लोगों ने प्रदीप की समाधि स्थल की मांग उठा दी और प्रशासन द्वारा निर्धारित नगरपालिका के श्मशान में अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया। इसे लेकर दो घंटे तक शव यात्रा रास्ते में ही रुकी रही।